केंद्र सरकार ने गत दिवस लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जे को रोकने के साथ ही वक़्फ़ बोर्ड में पूर्व न्यायाधीश सहित 2 महिलाओं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि को रखा जाना है जो गैर इस्लामिक भी हो सकता है। मौजूदा कानून के अनुसार वक्फ द्वारा किसी भी संपत्ति पर अधिकार जताने से वह उसकी हो जाती है । उसके विरुद्ध अपील भी वक़्फ़ बोर्ड और उसके द्वारा बनाये गए ट्रिब्यूनल के समक्ष की जा सकेगी जिसका फैसला अंतिम होगा। संशोधन पारित हो जाने पर ऐसे विवाद अदालत के क्षेत्राधिकार में आ जाएंगे। ये भी शिकायतें आने लगी थीं कि वक़्फ़ के अंतर्गत आने वाली संपत्ति पर प्रभावशाली मुस्लिम ही कब्जा कर लेते थे जिनमें उ.प्र के कुख्यात माफिया सरगना अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी भी थे। और भी ऐसी विसंगतियाँ हैं जिन्हें दूर कर इन संपत्तियों का सही उपयोग करना समय की मांग है। दुर्भाग्य से 21 वीं सदी में भी भारत का मुस्लिम समाज मध्ययुगीन सोच से प्रभावित और संचालित है। किसी भी सुधार को इस्लाम विरोधी बताकर आसमान सिर पर उठा लेना आम बात है। समाज के शिक्षित वर्ग में भी इतना साहस नहीं है कि वह मुल्ला - मौलवियों के फरमान पर सवाल उठा सके। मसलन तीन तलाक़ भले ही अवैध हो गया हो लेकिन अपवाद स्वरूप ही कोई मुस्लिम महिला सार्वजनिक तौर पर उसका स्वागत करने का साहस जुटा पाती है। वक़्फ़ की संपत्ति का उपयोग धार्मिक और सामाजिक हित के कार्यों के लिए किये जाने का प्रावधान है। देश में सेना और रेल्वे के बाद सबसे अधिक भूमि वक़्फ़ की है। जिसका आकार देश की राजधानी दिल्ली से भी तीन गुना अधिक है। लेकिन इतनी विशाल संपत्ति का सही उपयोग न होने से वक़्फ़ का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाता है। मुस्लिम समाज में अशिक्षा के बोलबाले की वजह से मुल्ला - मौलवियों का वर्चस्व कायम है। जो किसी भी तरह की सुधार प्रक्रिया को इस्लाम और शरीयत विरोधी प्रचारित करने लगते हैं। मुस्लिम वोट बैंक का दोहन करने वाले राजनीतिक दल भी ऐसी बातों का समर्थन करते हुए खुद को मुसलमानों का हमदर्द साबित करते हैं। ऐसे नेताओं के कारण ही आजादी के 77 सालों बाद भी मुसलमान मुख्यधारा में शामिल होने से वंचित हैं। धर्म के प्रति निष्ठा और समर्पण अच्छी बात है किंतु उसको तालाब का ठहरा हुआ पानी बना देना अधकचरापन और अज्ञानता है। भारत में सभी धर्मों का प्रचलन है। सबके अपने कायदे -कानून और रीति - रिवाज हैं किंतु देश के संविधान के साथ उनकी टकराहट यदि होती भी है तो उसे शांति से दूर कर लिया जाता है। इसके विपरीत मुस्लिम समाज के किसी भी रीति - रिवाज में सुधारात्मक कदम उठाये जाने पर इस्लाम खतरे में है का शोर मचने लगता है। वक़्फ़ संबंधी संशोधन पर भी यही देखने मिल रहा है। गत दिवस लोकसभा में ज्योंही सरकार विधेयक लेकर आई समूचा विपक्ष विरोध में खड़ा हो गया। आश्चर्य की बात ये है कि उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना भी मुस्लिम मतों के फेर में विधेयक का विरोध करने लगी। ये आरोप भी उछाला कि ये संशोधन भाजपा द्वारा महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण करने के उद्देश्य से लाया जा गया है। विपक्षी बेंचों से ये भी कहा गया कि विधेयक की प्रति विपक्षी सांसदों को देर से दी गई जिसके कारण वे उसे पढ़ नहीं सके। सर्वदलीय बैठक बुलाकर विधेयक के मसौदे पर चर्चा नहीं किये जाने की शिकायत के साथ उसे वापस लेने का दबाव भी बनाया गया। लेकिन सरकार ने चतुराई दिखाते हुए उसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया। पहले ये आशंका थी कि जनता दल (यू) और तेलुगू देशम विधेयक का समर्थन नहीं करेंगी और उस स्थिति में भाजपा उन्हें नाराज करने का जोखिम नहीं उठायेगी। लेकिन उक्त दोनों दलों द्वारा विधेयक का समर्थन करने से लोकसभा में उसका पारित होना सुनिश्चित हो गया। राज्यसभा में अवश्य सत्ता पक्ष को परेशानी हो सकती है क्योंकि बीजू जनता दल और वाई.एस.आर कांग्रेस अब भाजपा से दूरी बनाने का ऐलान कर चुके हैं। लेकिन बीते 10 वर्षों की तरह आगे भी भाजपा नेतृत्व उच्च सदन में बहुमत का प्रबंध कर लेगा ऐसा लगता है। हो सकता है अभी विधेयक समिति के पास विचाराधीन ही रहे किंतु राजनीतिक मंचों पर तो वह विमर्श का विषय बन ही गया। दरअसल विपक्ष भाजपा को हिन्दू कार्ड खेलने से रोकना चाहता है। लेकिन उसने जिस तरह से विधेयक का विरोध किया उसकी हिन्दू समाज में विपरीत प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है जो बांग्ला देश में हिंदुओं के उत्पीड़न से गुस्से में है। लेकिन राजनीति से हटकर देखें तो वक़्फ़ की अपार सम्पत्ति का सही उपयोग मुस्लिम समाज के शैक्षणिक और सामाजिक उत्थान के लिए होने का रास्ता साफ करने में गलत क्या है ? दुर्भाग्य इस बात का है कि मुसलमानों के बीच एक भी ऐसा नेता या बुद्धिजीवी नहीं है जो सुधारवादी सोच रखता हो। और यदि हैं भी तो उनकी स्थिति दांतों के भीतर जीभ जैसी है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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