अनेक अरब देश हैं जहाँ लाखों भारतीय हिन्दू कार्यरत हैं। इस्लामिक कट्टरता यहाँ पूरी तरह लागू है। लेकिन वहाँ से कभी ये खबर नहीं आई कि हिंदुओं को परेशान किया जाता हो या मुस्लिम बनने का दबाव डाला जाता हो। दुबई और अबू धाबी में तो मन्दिर बनाने हेतु शासकीय भूमि भी प्राप्त हुई। अर्थात अरब देशों की कट्टर इस्लामिक व्यवस्था में भी हिन्दू आराम से अपनी रोजी - रोटी कमा रहे हैं। भारतीय निर्माण कंपनियों को भी इन देशों में बड़े - बड़े ठेके मिले हैं। लेकिन ये वातावरण पाकिस्तान और बांग्लादेश में नहीं नजर आता। कई अरबी देश ऐसे भी हैं जो कश्मीर पर भारत के रुख के विरोधी भी किन्तु उनमें कार्यरत हिंदुओं को कभी किसी भी तरह से परेशान नहीं किया गया। जबकि भारत के पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्ला देश में उन हिंदुओं को भी हर तरह से त्रस्त किया जाता है जो वहाँ के मूल निवासी हैं और पीढ़ियों से वहाँ रह रहे हैं। 1947 में देश का विभाजन धर्म के आधार पर होने के बावजूद बड़ी संख्या में मुसलमान भारत में रह गए वहीं लाखों हिंदुओं ने पाकिस्तान के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से को ही अपना वतन माना। भारत में रहने वाले मुसलमान तो पूरी तरह सुरक्षित रहे किन्तु पाकिस्तान में मुस्लिम कट्टरपंथ रंग दिखाने लगा। और उसी के साथ हिंदुओं के उत्पीड़न की खबरें भी आने लगीं। हिन्दू मंदिरों के बाहर माँस की दुकानें खोल दी गईं। हिन्दू लड़कियों से जबरन निकाह करने की घटनाएं तो बीते 76 सालों से चली आ रही हैं। जोर जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन करवाने के मामले भी बढ़ते गए। कहने को वहाँ का कानून इन सबको गलत मानता है किन्तु पुलिस से लेकर न्यायाधीश तक घोर हिन्दू विरोधी होने से कोई सुनवाई नहीं होती। कहा जाता है भारत से गए मुसलमानों को वहाँ मुहाजिर ( शरणार्थी) कहा जाता है। उनको दोयम दर्जे का भी माने जाने की जानकारी है किंतु उन्हें प्रताड़ित करने जैसी घटना अपवाद स्वरूप ही हुई होगी। 1971 में बांग्ला देश के जन्म में भारत की भूमिका पूरी दुनिया जानती है। पश्चिमी पाकिस्तान के सैनिकों ने वहाँ की मुस्लिम आबादी के साथ अमानुषिक अत्याचार किये । लाखों लड़कियाँ व्यभिचार की शिकार हुईं। करोड़ों बंगाली मुस्लिम भागकर भारत आये और वापस नहीं गए। लेकिन पाकिस्तान से मुक्त होते ही वहाँ के मुस्लिम अपने मूल स्वभाव पर लौट आये और जो स्थिति पाकिस्तान में थी वही बांग्ला देश में बना दी गई। हिंदुओं की हत्या, मंदिरों में तोडफ़ोड़ और धर्म परिवर्तन का दबाव आम हो गया। इन घटनाओं को केवल हिन्दू विरोध मान लेना अर्ध सत्य है। दरअसल इसके पीछे भारत का विरोध है जिसे ये दोनों देश अपना शत्रु मानते हैं। उल्लेखनीय है कि भारत में मुसलमानों के साथ छोटी सी घटना घट जाने पर पूरा मुस्लिम जगत छाती पीटने लगता है जबकि पाकिस्तान और बांग्ला देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर मौन साध लिया जाता है। यहाँ तक कि भारत के मुस्लिम संगठन तक शांत रहते हैं। कश्मीर घाटी में रहने वाले हिंदुओं को किन हालातों में जान बचाकर भागना पड़ा ये पूरी दुनिया को पता है किंतु किसी भी मुस्लिम नेता ने इस्लामिक आतंकवाद के विरुद्ध बोलने का साहस नहीं दिखाया। बांग्ला देश बीते काफी दिनों से जलता रहा है। आरक्षण विरोधी आंदोलन की परिणिती शेख हसीना सरकार के पतन के तौर पर हुई। लेकिन उसके बाद वहाँ हिन्दू मंदिरों को आग के हवाले करने की घटनाएं होने लगीं। आतंकित हिन्दू समुदाय जान बचाकर भारत आने की तैयारी कर रहा है। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो भारत पर शरणार्थियों का नया बोझ आने वाला है। सवाल ये है कि पाकिस्तान हो या बांग्ला देश, इन्हें अपने यहाँ रहने वाले हिन्दू बर्दाश्त क्यों नहीं होते ? उनको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि भारत में करोड़ों मुस्लिम आराम से रहते हैं। हिंदुओं से परेशान होकर भारत से शायद ही कोई मुस्लिम परिवार पाकिस्तान या बांग्ला देश गया हो। इससे ये साबित होता है कि भले ही भारत हिन्दू राष्ट्र न हो किंतु पाकिस्तान और बांग्ला देश में रह रहे हिंदुओं को वहाँ के मुसलमान भारतीय मानकर उनको आतंकित और प्रताड़ित करते हैं। उक्त दोनों पड़ोसी इस्लामिक देश भूल जाते हैं कि उनकी जनसंख्या से अधिक मुस्लिम आबादी भारत में रहती है। पाकिस्तान तो खैर बना ही भारत से नफरत की बुनियाद पर किंतु बांग्ला देश के निर्माण में तो भारत के सैनिकों ने भी अपना बलिदान दिया था। यदि भारत मैदान में न आता तो जनरल याह्या खां के दरिंदे बंगाली मुस्लिम नस्ल को ही नष्ट करने पर आमादा थे। वहाँ लाखों लड़कियों को गर्भवती करने के पीछे भी यही सोच रही। बांग्ला देश के ताजा हालात ये साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि हम कितने भी सहिष्णु हो जाएं किंतु पाकिस्तान और बांग्ला देश में बसे हिंदुओं के प्रति वहाँ के आम मुसलमान नफरत का भाव रखते हैं। ऐसे में भारत को अब बांग्ला देशियों को भगाने का अभियान छेड़ना ही होगा। यूरोप आज जिस समस्या से जूझ रहा है वह भारत में पैदा करने का जो षडयंत्र रचा जा रहा है उसे समय रहते विफल न किया गया तो देश की अखंडता के लिए खतरा और बढ़ता जायेगा।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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