Friday, 22 November 2024

राहुल को भाजपा के सवालों का जवाब भी देना चाहिए


देश के सबसे चर्चित उद्योगपति गौतम अदाणी फिर विवाद में हैं।  इस बार भी  शुरुआत अमेरिका से  हुई। हिंडनबर्ग द्वारा किये  खुलासों के बाद अदाणी समूह संकट में आ गया था। उसके शेयर जमीन पर आ गिरे थे। देश में राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी तो अदाणी को घेरने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। जेपीसी  (संयुक्त संसदीय समिति ) गठित करने की मांग को लेकर संसद ठप कर दी गई। दरअसल अदाणी के जरिये श्री गाँधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हैं। लेकिन  वह मुहिम फुस्स होकर रह गई जब शरद पवार और ममता बैनर्जी ने उस मांग से किनारा कर लिया। उसी दौरान अदाणी और श्री पवार के बीच हुई मुलाकात भी चर्चा का विषय बन गई। धीरे - धीरे अदाणी समूह  उस झटके से उबर गया। कुछ समय पूर्व सेबी अध्यक्ष को लेकर अमेरिका में हुए खुलासे का असर भी  समूह के व्यवसाय पर हुआ किंतु वह हिंडनबर्ग जितना गम्भीर न होने से ज्यादा असर न डाल सका। बावजूद श्री गाँधी उस पर हमलावर बने हुए हैं। महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में श्री मोदी द्वारा एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे के नारे के जवाब में राहुल ने प्रधानमंत्री और अदाणी का एक पोस्टर जारी कर कटाक्ष किया कि उक्त नारे के जरिये श्री मोदी ने अदाणी को साथ रहने का संदेश दिया। मतदान के बाद कल अमेरिका में अदाणी और उनसे जुड़े कुछ लोगों के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज होने के साथ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की खबर आ गई। आरोप ये है कि भारत में ऊर्जा आपूर्ति सम्बन्धी व्यवसाय हासिल करने  दी गई घूस के लिए अदाणी समूह ने  सरकारी  अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए अमेरिका के पूंजी बाजार से निवेश प्राप्त किया जिसके लिए निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई। खबर आते ही श्री गाँधी ने अदाणी  की गिरफ्तारी की मांग  के साथ ये भी जोड़ दिया कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि श्री मोदी उन्हें बचाते हैं। साथ ही इस मामले में भी जेपीसी गठन की बात छेड़ दी। 25 तारीख से संसद का सत्र शुरू होने वाला है। इसलिए कांग्रेस नेता को सरकार की घेराबंदी का बड़ा मुद्दा हाथ लग गया। उधर शेयर बाजार में अदाणी की कंपनियों के शेयर गोता खाने लगे।  दूसरी तरफ अदाणी समूह ने आरोपों से इंकार करते हुए कानूनी स्तर पर स्थिति से निबटने की बात कही। आगे क्या होगा ये कहना कठिन है किंतु ये बात ध्यान देने योग्य है कि अदाणी समूह के विरुद्ध अमेरिका से ही हमले क्यों हो रहे हैं? भारत के अन्य उद्योगपति भी विदेशों में बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। उनके बारे में इस कभी कोई विदेशी एजेंसी इतनी गहराई में नहीं जाती जिससे ये संदेह होता है कि अदाणी  के विरुद्ध योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है। यद्यपि इसके पीछे व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा है या राजनीतिक खुन्नस, ये निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता किंतु श्री गाँधी जिस तरह अदाणी को लेकर आक्रामक रहते हैं वह साधारण बात नहीं है। उनको इस बात की नाराजगी है कि अदाणी और प्रधानमंत्री बेहद करीब हैं और उन्हीं के संरक्षण में गौतम अदाणी का औद्योगिक साम्राज्य बीते दस सालों में आश्चर्यजनक रूप से बढ़ा। वैसे श्री गाँधी के निशाने पर अंबानी समूह भी रहता है। अक्सर वे एक साथ दोनों का नाम लेते हैं किंतु उनकी तोप का मुँह ज्यादातर अदाणी की ओर ही रहता है। लेकिन श्री गाँधी द्वारा अमेरिका में गौतम अदाणी और सहित अन्य लोगों के विरुद्ध गिरफतारी वारंट जारी होने के बाद जब प्रधानमंत्री को लपेटने का दांव चला गया तब भाजपा ने भी उन पर मिसाइलों की बौछार करते हुए कांग्रेस सहित उन गैर भाजपा शासित राज्यों के नाम गिना दिये जिनके संदर्भ में घूसखोरी का आरोप अदाणी समूह पर लगा है। अब तक भाजपा श्री गाँधी द्वारा अदाणी पर लगाए जाने वाले आरोपों पर जवाब देने से बचती रही है। खुद प्रधानमंत्री ने भी कभी मुँह नहीं खोला। हालांकि वे अंबानी और अदाणी से अपने रिश्तों को छिपाते भी नहीं हैं। हाल ही में मुकेश अंबानी के बेटे की शादी में भी वे शामिल हुए जबकि गाँधी परिवार को मुकेश द्वारा व्यक्तिगत रूप से न्यौता दिये जाने के बाद भी वह नहीं गया जबकि अंबानी समूह का उत्थान स्व.इंदिरा गाँधी के जमाने में हुआ था। इसीलिए  कांग्रेस के तमाम नेता अंबानी की दावत में नजर आये जिनमें सत्ता और संगठन दोनों से जुड़े दिग्गज थे। भाजपा ने कल जो सवाल पूछे उसका आधार भी यही दोहरा रवैया है। श्री गाँधी को भाजपा द्वारा उठाये गए उन सवालों का जवाब देना चाहिए कि अदाणी यदि गलत व्यक्ति हैं तो कांग्रेस के अलावा इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियों की राज्य सरकारों ने उन पर मेहरबानियों की बरसात क्यों की? और क्या श्री गाँधी में इतना साहस है कि वे श्री पवार और ममता से पूछें कि वे अदाणी के प्रति नर्म क्यों हैं ? हाल ही में अजीत पवार ने ये खुलासा किया कि भाजपा के साथ जाने का निर्णय जिस बैठक में लिया गया उसमें चाचा शरद पवार और गौतम अदाणी भी थे। क्या कांग्रेस उस बैठक के लिए श्री पवार से स्पष्टीकरण मांग सकती है? इस सबसे साफ होता है कि राहुल अभी भी परिपक्वता के उस स्तर से बहुत नीचे हैं जो देश लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष में अपेक्षित भी है और आवश्यक भी। शायद इसीलिए ऐसे मामलों में वे अकेले पड़ जाते हैं। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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