35 वर्ष पूर्व 9 नवम्बर 1989 को मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस का प्रकाशन जबलपुर से प्रारंभ हुआ था | उस दौर में मंडल और मंदिर जैसे मुद्दों के कारण राजनीतिक माहौल बेहद गर्म था। अतृप्त महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की खातिर समाज को जातियों में बाँटने के प्रयासों के साथ ही सिद्धांतविहीन गठबंधनों के जरिए नए चेहरों को स्थापित करने के प्रयास आकार ले रहे थे । अविश्वास और अस्थिरता सर्वत्र व्याप्त थी। ऐसे में संस्कारधानी जबलपुर में जब एक नए सांध्य दैनिक का प्रादुर्भाव हुआ तब उसके लिए अपनी जगह बनाना सरल नहीं था | लेकिन शीघ्र ही मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस पाठकों का प्रिय बन गया। उसकी निर्भीकता ने उसे हर वर्ग में लोकप्रिय बना दिया। पत्रकारिता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में पाठकों का समर्थन हमारा संबल बना। 35 वर्ष के इस सफ़र में मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस ने दायित्वबोध से कभी मुँह नहीं फेरा। स्वस्थ पत्रकारिता के रास्ते पर हम जिस आत्मविश्वास से चलते रहे उसने हमें जो पहिचान दी , उसे बनाए रखने के लिए हम सदैव जागरूक रहे। ये सर्वविदित है कि इसके लिए हमें न जाने कितनी मुसीबतों और विरोध का सामना करना पड़ा | बीते वर्षों में टेक्नालॉजी में हुए ताबड़तोड़ उन्नयन के कारण लघु और मध्यम श्रेणी के समाचार पत्रों के समक्ष संसाधनों का जबरदस्त संकट आ खड़ा हुआ है | इसके अलावा डिजिटल माध्यम ने गलाकाट प्रतिस्पर्धा को जन्म दे दिया । इस सबके बावजूद मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस निरंतर आगे बढ़ता गया । हमारे असंख्य पाठकों और प्रशंसकों का विश्वास हमारी शक्ति का स्रोत है । बिना किसी अतिरिक्त अपेक्षा के सहयोग देने वाले विज्ञापनदाताओं की सहयोगात्मक भावना हमारा संबल है | पत्रकारिता के जो आदर्श हमारी पितृ पीढी़ ने निर्धारित किये उनका निष्ठापूर्वक पालन करना हमारा संकल्प है। मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस को पाठकों द्वारा , जिसे पढ़े बिना शाम अधूरी है , जैसा जो विशेषण प्रदान किया गया उसे जीवंत रखने हम हर पल प्रतिबद्ध हैं | मौजूदा समय बेहद चुनौतीपूर्ण है | देश के भीतर राजनीतिक उथलपुथल है | संघीय ढांचे के साथ ही सामाजिक समरसता को कमजोर करने का षडयंत्र रचा जा रहा है। भारत के विश्व की महाशक्ति बनने जैसी उपलब्धि एक वर्ग विशेष को बर्दाश्त नहीं हो रही। व्यवस्था के प्रति विद्रोह को भड़काकर अराजक स्थितियाँ उत्पन्न करने का प्रयास चल रहा है। हमेशा से विदेशी शक्तियों के इशारे पर नाचने वाले भारत की प्राचीनता और मौलिकता पर ही सवाल खड़े करने से बाज नहीं आ रहे। इन परिस्थितियों में समाचार माध्यमों का दायित्व और बढ़ जाता है क्योंकि जन साधारण तक सही जानकारी पहुंचाना उनका कार्य है। लेकिन उनको अपनी विश्वसनीयता और छवि बचाए रखने के प्रति गंभीर रहना होगा | जिस प्रकार से उन पर आरोपों की बौछार की जा रही है वह भी प्रायोजित है जिससे उनकी आवाज बंद की जा सके। यद्यपि इसके लिए पत्रकार बने धंधेबाज किस्म के लोग भी कसूरवार हैं | हम विश्वास दिलाते हैं कि मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस पाठकों के विश्वास और पत्रकारिता की प्रतिष्ठा अक्षुण्ण रखने पूरी ईमानदारी और साहस के साथ खड़ा रहेगा | 35 साल के इस सफर में हमने हर तरह के दबावों का सामना किया किंतु उनके आगे झुके नहीं। आगे भी हमारी ये शैली जारी रहेगी । सकारात्मक पत्रकारिता के प्रसार हेतु हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ डटे रहेंगे इस आश्वासन के साथ आप सभी के अमूल्य सहयोग हेतु विनम्र आभार।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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