Wednesday, 19 March 2025

अंतरिक्ष को मनोरंजन और पर्यटन स्थल बनाना खतरे से खाली नहीं


5 जून 2024 को अमेरिका की सुप्रसिद्ध बोइंग कंपनी द्वारा बनाये स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान से 10 दिन के लिए  सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को अंतरिक्ष में स्थापित स्पेस स्टेशन भेजा गया था। उक्त मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष की संक्षिप्त व्यवसायिक उड़ानों के अलावा कुछ वैज्ञानिक परीक्षण करना भी था। लेकिन जिस यान में उक्त दोनों को भेजा गया था उसमें तकनीकी गड़बड़ी के कारण वह निर्धारित समय पर उनको वापस नहीं ला सका और खाली लौट आ गया। जिसके बाद पूरी दुनिया उनकी कुशलता के प्रति चिंतित हो उठी।  चिंता का कारण उस अभियान पर हुए खर्च से ज्यादा दो अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन की रक्षा थी। बीते 10 महीने से उनकी वापसी का कार्यक्रम लगातार टलता जा रहा था। अनेक अवसर ऐसे भी आये जब उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीदें धूमिल होने लगी थीं। उल्लेखनीय है अमेरिका में एलन मस्क नामक उद्योगपति ने भी अंतरिक्ष यात्रा को हवाई यात्रा की तरह सुलभ बनाने के क्षेत्र में कदम बढ़ा दिये हैं और उनकी स्पेस एक्स नामक एजेंसी नासा को टक्कर दे रही है । अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में वे  डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में खुलकर  आ गए थे। जिन्होंने पदभार ग्रहण करने के बाद मस्क को अपना सलाहकार बना लिया । लेकिन उनका महत्व तब और बढ़ गया जब ट्रम्प ने उन्हें दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की जिम्मेदारी सौंपी। उनकी कंपनी ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया और स्पेस स्टेशन तक अपना ड्रेगन नामक यान भेजा। उसके बाद भी अनिश्चितता बनी रही। अंततः वापसी का कार्यक्रम तय हुआ और भारतीय समय के अनुसार आज प्रातः 3.27 बजे सुनीता, विल्मोर और स्पेस स्टेशन के दो अन्य अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित लौट आये। ड्रेगन नामक यान में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में प्रवेश करते समय तापमान बढ़ने से आग लगने के खतरे से वैज्ञानिक आशंकित थे। पैराशूटों के समय पर नहीं खुलने को लेकर भी आशंका थी किंतु अंततः सब कुछ निर्विघ्न संपन्न हो गया। इस अभियान की सफलता ने नासा नामक एजेंसी की साख और धाक को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया।  लेकिन स्पेस स्टेशन में फंसे अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी में बोइंग की विफलता के बाद मस्क की स्पेस एक्स ने जो चुनौती स्वीकार की उससे उनकी कंपनी  नासा को पीछे छोड़ सिरमौर बन गई है। इसी के साथ अंतरिक्ष में पर्यटन नामक नये व्यवसाय के दरवाजे भी खुल गए हैं क्योंकि मस्क की रुचि किसी शोध  कार्य में न होकर केवल धन कमाने में है। ऐसे में अंतरिक्ष में अनावश्यक मानवीय  हस्तक्षेप बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। दूसरे विश्वयुद्ध  के बाद अमेरिका और सोवियत संघ में अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे निकलने की होड़ शीतयुद्ध से प्रभावित थी। यूरी गागरिन नामक अंतरिक्ष यात्री को भेजकर उसकी सफल वापसी से सोवियत संघ ने अपना दबदबा कायम किया किंतु चंद्रमा पर पहला अंतरिक्ष यात्री उतारकर अमेरिका ने अपनी बादशाहत कायम कर ली। उस प्रतिस्पर्धा में सोवियत संघ को भारी नुकसान हुआ। उसके विघटन के बाद रूस उस भूमिका में आया किंतु तब तक अमेरिका बहुत आगे बढ़ गया। धीरे - धीरे भारत भी अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ी ताकत बनकर उभरा और अब नासा की तरह अनेक देशों के यान प्रक्षेपित कर रहा है। लेकिन इस क्षेत्र की उपयोगिता और महत्व का विश्लेषण करें तो मौसम की जानकारी और संचार जैसे कार्यों में अंतरिक्ष अभियानों से हुए लाभ मायने रखते हैं। वैज्ञानिक शोध हेतु भी उनकी उपयोगिता साबित हुई है किंतु चंद्रमा , मंगल और शुक्र जैसे ग्रहों में जीवन की संभावनाएं तलाशने जैसे अभियानों पर बेतहाशा संसाधन खर्च करने से हासिल उपलब्धियों का मूल्यांकन करें तो हासिल आई शून्य वाली स्थिति नजर आती है। जिस तरह एवरेस्ट शिखर पर पर्वतारोहण से वहाँ गंदगी नजर आने लगी है वही स्थिति अंतरिक्ष की भी होने लगी है जहाँ अनुपयोगी हो चुके उपग्रह त्रिशंकु की तरह भटक रहे हैं। जासूसी के लिए भी उपग्रह छोड़े जाते हैं। लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान की भी कोई सीमा तय होनी चाहिए। विज्ञान और तरक्की एक दूसरे के पर्याय हैं। इसमें शोध कभी बंद नहीं होते। उस दृष्टि से अंतरिक्ष में मानव की बढ़ती चहलकदमी उसके अबूझे  रहस्यों को तो उद्घाटित करती है किंतु उसकी शांति को भंग करने का अपराध भी अपने सिर पर लेती है। ब्रह्मांड की जो रचना है उसमें अंतरिक्ष और पृथ्वी दोनों का अपना स्थान है। जितने भी ग्रह - नक्षत्र हैं उनका वैज्ञानिक प्रभाव हमारे इस ग्रह पर पड़ता है। इसलिए अंतरिक्ष में केवल एक हद तक हस्तक्षेप स्वीकार्य होना चाहिए। उसे मनोरंजन का अड्डा और पर्यटन स्थल स्थान बनाया जाना पृथ्वी के लिए नये खतरे उत्पन्न किये बिना नहीं रहेगा। और फिर मस्क जैसे व्यवसायी इस क्षेत्र को भी बाजार बनाये बिना नहीं मानेंगे। 

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 रवीन्द्र वाजपेयी

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