Sunday, 30 March 2025

मोदी की नागपुर यात्रा ने बहुत कुछ कह दिया





        प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर में रा.स्व.संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की समाधि पर जाकर श्रृद्धा सुमन अर्पित करना यूँ तो सामान्य बात है क्योंकि वे भाजपा में आने से पहले संघ के प्रचारक रहे हैं। और फिर संयोगवश आज डॉ. साहब का जन्मदिन भी है। प्रधानमंत्री आज संघ के वर्ष प्रतिपदा उत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के साथ सम्मिलित हो रहे हैं। उनका संघ मुख्यालय में प्रवास ऐसे समय हुआ जब हाल ही में नागपुर ने  सांप्रदायिक दंगे का कड़वा स्वाद चखा। अन्यथा ये नगर आमतौर शांत  माना जाता था। 

       महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने दंगाइयों के विरुद्ध कठोर कारवाई की जिसकी देश भर के मुसलमानों और उनकी तरफदारी करने वाले तबके में रोषपूर्ण प्रतिक्रिया हुई। नागपुर में हुए दंगे के लिए मुसलमानों ने जिन कारणों को बताया उनकी पुष्टि तो नहीं हो सकी जबकि उनको बहाना बनाकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जो तांडव मचाया उसके लिए न तो उनके किसी धर्मगुरु ने अफसोस व्यक्त किया और न ही राजनेता ने। उल्टे ये धमकियाँ सोशल मीडिया पर सुनने  मिलीं कि ये तो शुरुआत है, आगे भी ऐसी ही घटनाएं होती रहेंगी। 
      हालांकि राज्य सरकार ने उपद्रवियों की धरपकड़ करते हुए दंगे के सरगना के अवैध निर्माण पर भी बुलडोजर चला दिया किंतु उस दंगे के बाद देश भर के हिन्दू समुदाय में भय और चिंता व्याप्त हो गई। महाराष्ट्र सरकार पर भी सवाल उठे क्योंकि नागपुर मुख्यमंत्री श्री फड़नवीस का गृहनगर है। 

     ऐसे में प्रधानमंत्री श्री मोदी का हिन्दू नव वर्ष पर संघ मुख्यालय पहुँचकर संघ संस्थापक की समाधि पर पुष्प अर्पित करना केवल औपचारिकता नहीं बल्कि इसका निहितार्थ ये है कि संघ और भाजपा के बीच समन्वय यथावत  है। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के उस बयान ने काफी सनसनी फैलाई  कि भाजपा को संघ की आवश्यकता नहीं रह गई है।  चुनाव के परिणामों के बाद संघ और भाजपा के  रिश्तों में तल्खी को लेकर भी काफी कहानियाँ गढ़ी गईं। लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के चुनाव में भाजपा की प्रचंड विजय के बाद उक्त अवधारणा निर्मूल साबित हो गई। संघ विरोधियों ने भी माना कि  उक्त तीनों राज्यों में संघ की संगठनात्मक जमावट ने भाजपा को  जीत ही नहीं दिलाई अपितु लोकसभा चुनाव के बाद उसके मनोबल में आई गिरावट को भी रोक दिया। 

     देश में हिंदुत्व का जो उभार देखने में आ रहा है वह तभी कायम रह सकेगा जब भाजपा और संघ के बीच तालमेल पूरी तरह बना रहे। प्रधानमंत्री की कार्यशैली को लेकर ये प्रचार भी होता आया है कि उनके और सरसंघचालक डॉ. भागवत के बीच मतभेद हैं। भाजपा के नये अध्यक्ष के चयन में विलम्ब के लिए भी यही कारण बताया जा रहा है। लेकिन वर्ष प्रतिपदा के दिन जब महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा की धूम है और औरंगजेब सम्बन्धी विवाद के चलते हिंदुत्व की भावना खुलकर सामने आई है तब श्री मोदी का नागपुर प्रवास बिना कहे ही उन प्रश्नों का जवाब है जो लम्बे समय से उठाये जा रहे थे। 

    राजनीति में टाइमिंग का बड़ा महत्व होता है और श्री मोदी इसमें बेहद माहिर हैं। इसीलिए उनका आज का नागपुर दौरा केवल प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि एक स्वयंसेवक का प्रवास है। इस दौरे का संदेश बहुत ही व्यापक है। भाजपा और संघ में मतभेद का शिगूफा छोड़ने वालों को इस यात्रा ने निराश कर दिया। सच बात तो ये है कि यू ट्यूब पर देश के मिजाज को अपनी मर्जी के मुताबिक बदलने का ख्वाब देखने वाली कुंठित लोगों की जमात अब तक न मोदी को समझ सकी और न ही संघ को। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


     

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