Friday, 28 March 2025

घुसपैठियों का समर्थन देशहित के विरुद्ध


लोकसभा में गत दिवस आव्रजन एवं विदेशी विधेयक ( इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल) 2025 पारित हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक के प्रावधानों पर विस्तार से जवाब देते हुए  कहा कि  वैध पासपोर्ट और वीजा के बिना  भारत में प्रवेश करने पर कानून सम्मत तरीके से सख्त कार्रवाई की जाएगी।विधेयक में जाली दस्तावेजों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वीजा की अवधि खत्म होने पर भी देश में रहने वालों को तलाश  किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष द्वारा पेश संशोधनों का विरोध करते हुए कहा कि हमारा देश कोई धर्मशाला नहीं है। देश की सीमा में कौन आता है, कब आता है, कितनी अवधि तक आता है और किस उद्देश्य से आता है, यह जानने का अधिकार  सरकार के पास है। ऐसा करना सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प. बंगाल की  450 किलोमीटर की सीमा ममता बेनर्जी  सरकार के कारण अभी तक असुरक्षित है क्योंकि बांग्ला देशी तथा रोहिंग्या घुसपैठिये यहीं से आते हैं। केंद्र सरकार इस सीमा पर कटीले तार लगाना चाहती है जिसके लिए  वे खुद 10 बार पत्र भेजकर राज्य सरकार से भूमि हेतु अपील कर चुके हैं, लेकिन सहयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तृणमूल  सरकार घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या और बांग्लादेशी लोगों को संरक्षण प्रदान करती है। उन्हें आधार कार्ड दिए जाते हैं । इन कारणों से देश की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।  1970 में बांग्लादेश से शरणार्थियों के रूप में जब लोगों का आना शुरू हुआ तब मानवीयता के आधार पर भारत ने उनको पनाह दी। 1971 के अंत तक जब बांग्लादेश बन गया तब स्व. इंदिरा गाँधी ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि शरणार्थियों को वापिस जाना होगा किंतु 1971 में आये शरणार्थियों का वापिस जाना तो दूर रहा , अब तो उनकी तीसरी पीढ़ी भी भारत में रह रही है  क्योंकि राजनीति के सौदागरों ने उनको देश का नागरिक बनाने का पूरा इंतजाम कर दिया। उनके  राशन कार्ड बनाने के बाद उनको मतदाता बनाया गया और जब आधार कार्ड शुरू हुए तब वे भी उन्हें मिल गए। आज भारत के हर हिस्से में बांग्ला देशी फैल चुके हैं। लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में तो उनकी जनसंख्या राजनीतिक संतुलन बनाने - बिगाड़ने की क्षमता अर्जित कर चुकी है। बिहार, असम, प. बंगाल में अनेक लोकसभा और विधानसभा सीटों में गैर मुस्लिम प्रत्याशी के जीतने की गुंजाइश खत्म हो चुकी है। इसके अलावा बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के जरिये तस्करी तो होती ही है लेकिन आतंकवादी घटनाओं में भी उनका हाथ प्रमाणित हो चुका है। पाकिस्तान द्वारा प्रवर्तित अनेक भारत विरोधी संगठन बांग्लादेश में कार्यरत हैं। अभी हाल ही में नागपुर में हुए सांप्रदायिक दंगे में भी बांग्लादेशी संगठनों की भूमिका सामने आई है। प. बंगाल में पहले वामपंथी सरकार ने इन घुसपैठियों को बसाने में पूरी मदद की और जब ममता बेनर्जी सत्ता में आईं तो उन्होंने और भी तेजी से घुसपैठियों को मतदाता बनाने में उदारता दिखाई। यही वजह है कि नागरिकता संशोधन विधेयक और नागरिकता रजिस्टर को मुस्लिम विरोधी बताकर ममता सहित ज्यादातर विपक्षी दल घुसपैठियों के बचाव में जुट गए। यहाँ तक कि इंदिरा जी की विरासत थामने वाली कांग्रेस भी उनके साथ खड़ी नजर आती है। उस दृष्टि से आव्रजन और विदेशी विधेयक 2025 देर से उठाया गया सही कदम है। इसका सार गृह मंत्री श्री शाह के इस कथन में निहित है कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है। उल्लेखनीय है प. एशिया में उत्पन्न संकट के दौरान जब लाखों लोगों ने अपने देश छोड़े तब मानवता के नाम पर यूरोपीय देशों ने उन्हें शरण दी। लेकिन कुछ ही वर्षों के भीतर  ये मुस्लिम शरणार्थी उनके लिए मुसीबत बन गए। ब्रिटेन , फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क सभी उनसे त्रस्त हैं। भारत में तो बांग्लादेशी और रोहिंग्या मिलाकर करोड़ों की संख्या है। इसलिए नया विधेयक जल्द कानून बने और घुसपैठियों की पहिचान कर जितनी जल्दी हो सके उनको वापिस भेजा जाना  आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से देश हित में होगा। जो नेता और राजनीतिक दल वोटों की लालच में  इन घुसपैठियों की तरफदारी कर रहे हैं उनकी देशभक्ति पर सवाल उठना स्वाभाविक ही है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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