कांग्रेस , सपा, तृणमूल कांग्रेस, राजद और एनसीपी पर भाजपा सदैव ये आरोप लगाती आई है कि वे मुसलमानों का तुष्टीकरण करती हैं। हाल ही में कर्नाटक सरकार द्वारा ठेकों में मुस्लिमों के लिए आरक्षण किये जाने का भाजपा खुलकर विरोध कर रही है। तीन तलाक़ , सी.ए.ए, समान नागरिक संहिता ,वक़्फ़ बोर्ड संशोधन, ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि जैसे मसलों पर भाजपा और मुस्लिम संगठनों के बीच खुला टकराव चल रहा है। पिछ्ले दिनों होली और जुमा एक ही तारीख़ पर पड़ने के कारण देश के अनेक हिस्सों में टकराव देखने मिले। उसके साथ ही छावा नामक फिल्म प्रदर्शित होने के बाद मुगल बादशाह औरंगजेब के प्रति हिन्दू समुदाय में उत्पन्न गुस्से के कारण बात औरंगजेब की कब्र हटाने तक जा पहुंची। मुस्लिम समाज मोदी - योगी की जोड़ी के कारण परेशान था ही ऊपर से भाजपा की तमाम राज्य सरकारों ने भी योगी फार्मूला अपनाते हुए दंगाइयों के अवैध निर्माण ढहाने का कदम उठाना शुरू कर दिया । नागपुर के हालिया दंगे के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भी बुलडोजर के जरिये मुस्लिम उपद्रवकारियों पर कारवाई शुरू कर दी। उधर वक़्फ़ संशोधन के विरोध में देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि मुस्लिम समुदाय और भाजपा के बीच 36 का आंकड़ा कायम है। हालांकि पार्टी ने अल्पसंख्यक मोर्चा बना रखा है। अनेक मुस्लिम नेताओं को सांसद और मंत्री भी बनाया किंतु उसके बाद भी बात नहीं बनी। जनसंघ के दौर में बनी दूरी आज भी कायम है। स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की उदारवादी छवि के चलते कुछ अविश्वास कम होता लगा किंतु उसके पहले ही राम मंदिर आंदोलन शुरू हो गया जिसके बाद रिश्ते और तल्ख हो गए। बाबरी ढांचा ढहाए जाने के बाद जहाँ हिन्दू समुदाय भाजपा के पक्ष में झुकना शुरू हुआ तो मुसलमान हर उस पार्टी या प्रत्याशी के साथ खड़े होते दिखे जो भाजपा को हराने में सक्षम हो। 2014 में केन्द्र की सत्ता नरेंद्र मोदी के हाथ आ गई जो गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ही मुसलमानों के लिए असहनीय हो चुके थे। उनके प्रधानमंत्री बन जाने के बाद भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे पर ज्यों - ज्यों आगे बढ़ती गई मुसलमानों में उसके प्रति खुन्नस और बढ़ने लगी। तीन तलाक़ पर रोक और राम मंदिर के निर्माण ने नाराजगी और बढ़ा दी। वक़्फ़ बोर्ड संशोधन के कारण भी समूचा मुस्लिम समुदाय भन्नाया हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में उसने भाजपा को हरवाने के लिए जो रणनीतिक मतदान किया वह बेहद कारगर रहा। दूसरी तरफ भाजपा द्वारा 400 पार का ढोल पीटे जाने से उसके समर्थक अति आत्मविश्वास का शिकार होकर मतदान के प्रति उदासीन रहे जिसके कारण उसे उ.प्र में ही जबरदस्त झटका लगा। फैजाबाद की सीट तक वह हार गई जिसमें अयोध्या विधानसभा आती है। वाराणसी में श्री मोदी की जीत का अंतर बेहद कम होना भी मामूली बात नहीं थी। भाजपा को 240 सीटों पर रोकने में मुस्लिम मतदाताओं की गोलबंदी किसी से छिपी नहीं रही। लेकिन उसके बाद महज 6 महीने में भाजपा ने हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के विधानसभा चुनाव जीतकर मुस्लिम ध्रुवीकरण के साथ ही विपक्षी एकता की भी हवा निकाल दी। बंटेंगे तो कटेंगे और एक हैं तो सेफ हैं का नारा काम कर गया। हिंदुत्व राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में मजबूती से खड़ा हो गया। लेकिन अचानक आई इस खबर ने सभी को चौंका दिया कि भाजपा इस बार ईद पर मुस्लिम महिलाओं को एक किट भेंट करेगी। अल्पसंख्यक मोर्चे के कार्यकर्ताओं के जरिये देश भर में 32 लाख मुस्लिम महिलाओं तक सौगात - ए - मोदी किट पहुंचाई जाएगी। इसमें गरीब महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी। दिल्ली से इसकी शुरुआत हो चुकी है। इस किट में कपड़े, मेवे , सेवई और चीनी आदि हैं। पार्टी इसे सबका साथ, सबका विकास नारे से जोड़ते हुए मुस्लिम समुदाय में अपनी पैठ बनाने की कोशिश में है। उसका मानना है तीन तलाक़ पर रोक से मुस्लिम महिलाओं में उसके प्रति झुकाव बढ़ा है। यद्यपि अब तक के चुनावों में इसका कोई असर नजर नहीं आया। अनुभव बताते हैं कि मुस्लिम महिलाओं में पुरुषों के विरुद्ध खड़े होने का साहस नहीं है। धर्मगुरुओं के दबाव के अलावा कमजोर आर्थिक स्थिति भी इसका कारण है। लेकिन भाजपा विरोधियों को जरूर इस कदम से परेशानी हो सकती है। छवि सुधारने के इस प्रयास का लाभ तो भावी चुनाव परिणाम ही बता सकेंगे किंतु मुफ्त राशन, उज्ज्वला, प्रधानमंत्री आवास और पांच लाख रु. तक के इलाज की आयुष्मान भारत योजना का भरपूर लाभ लेने के बाद भी जब मुस्लिम समुदाय ने भाजपा के प्रति लेशमात्र भी झुकाव नहीं दिखाया तब निशान - ए - मोदी से उसमें कोई परिवर्तन आयेगा ये सोचना सतही तौर पर तो बेमानी लगता है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
No comments:
Post a Comment