Friday, 13 June 2025

इंसानी ज़िंदगी की क्षतिपूर्ति मुआवजा और बीमा राशि से होना असंभव



गत दिवस अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ा एयर इंडिया का बोइंग विमान  2 मिनिट बाद ही  सिटी सिविल अस्पताल और बीजे मेडिकल कालेज के छात्रावास पर गिर गया। उसमें सवार 242 यात्रियों और 12 क्रू सदस्यों सहित 50 अन्य लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों घायल हैं। दोपहर तक 265 शव अस्पताल पहुँच चुके थे।  एयर इंडिया ने मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रु. का मुआवजा, घायलों का संपूर्ण इलाज एवं जिन इमारतों से विमान टकराया उनके पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया है। विमान में सवार केवल एक यात्री जीवित बच सका है। विमान चालक द्वारा भेजे गए सांकेतिक संदेश के फ़ौरन बाद ही विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसलिए ब्लैक बॉक्स में हुई रिकार्डिंग से स्पष्ट निष्कर्ष निकालना मुश्किल होगा। वैसे भी ऐसे  विमान का तकनीकी पक्ष  बेहद  जटिल होने से दुर्घटना का कारण पता न चल सके तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। बोइंग अमेरिका की प्रतिष्ठित कंपनी है जिसके बनाये यात्री विमान पूरी दुनिया में उपयोग आ रहे हैं। उनकी कुछ खामियों को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही थी किंतु ऐसा कोई कारण अब तक सामने नहीं आया था जिससे उनका परिचालन पूरी तरह से रोक दिया जाए। ये भी उल्लेखनीय है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान के पायलट काफी अनुभवी थे। ऐसे में एक वजह उड़ान के पहले विमान की सुरक्षा जाँच में लापरवाही भी मानी जा रही है। लेकिन सबसे अधिक टिप्पणियां एयर इंडिया को टाटा को बेच दिये जाने पर हो रही है। सोशल मीडिया पर बहुतेरे लोगों का मानना है टाटा भले ही अपनी कार्य कुशलता के लिए प्रतिष्ठित हो किंतु  है तो निजी कंपनी ही जिसका प्रमुख उद्देश्य लाभ अर्जित करना है। लेकिन ऐसा कहने वालों में बड़ी संख्या उन लोगों की भी है जो एयर इंडिया के सरकार के हाथ में रहते हुए उसकी गैर पेशेवर कार्यशैली के कारण उसे बंद करने अथवा निजी हाथों में देने की सलाह दिया करते थे। उसके लगातार बढ़ते घाटे के कारण उसे बेच देने का निर्णय किसी भी लिहाज से ग़लत नहीं था। और फिर  एयर इंडिया खरीदने के पहले ही टाटा समूह ने  उड्ड्यन व्यवसाय में कदम रखते हुए कुछ विदेशी विमानन कंपनियों से करार कर लिए थे।  स्मरणीय है  आजादी के पहले देश की पहली हवाई सेवा टाटा एयरलाइंस थी जिसे 1946 में एयर इंडिया नाम दे दिया गया। 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया । एक दौर था जब एयर इंडिया का प्रतीक चिन्ह महाराजा बेहद लोकप्रिय था। एकाधिकार होने से उसकी आर्थिक स्थिति भी ठीक - ठाक रही किंतु ज्योंही उड्ड्यन के क्षेत्र में निजी कंपनियों को अनुमति मिली त्योंही एयर इंडिया और उसकी सहयोगी इंडियन एयर लाइंस की ठसक कम होने लगी। हालांकि बीते कुछ सालों में अनेक निजी उड्ड्यन कंपनियां विभिन्न कारणों से बंद हो गईं । ऐसे में जब टाटा समूह ने एयर इंडिया को खरीदा तब ये उम्मीद जागी कि वह अपनी  प्रतिष्ठा के अनुरूप उसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी साबित करेगा। टाटा समूह ने नये विमानों का जो सौदा बोइंग के अलावा फ्रांस और ब्रिटिश विमान  कंपनियों के साथ किया उसकी चर्चा पूरे विश्व में हुई। लेकिन घरेलू उड़ानों में एयर इंडिया की सहयोगी कंपनियों की सेवाएं ग्राहकों को संतुष्ट करने  में विफल रही हैं। यद्यपि ये मान लेना गलत नहीं होगा कि कोई भी एयर लाइंस  कभी नहीं चाहेगी कि उसके विमान दुर्घटना का शिकार हों क्योंकि उसमें चालक दल के साथ ही यात्रियों की ज़िंदगी जाने की आशंका रहती है। पेशेवर पायलट  कभी भी  खतरा उठाने का पक्षधर नहीं होता। ऐसे में इस दुर्घटना के कारणों का पता लगे  बिना कुछ भी कहना सही नहीं है।  लेकिन अहमदाबाद की घटना इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि विमान मात्र 600 फुट ही ऊपर जाने के बाद नीचे आ गिरा। निश्चित रूप से ये घटना जितनी दुखद है उतनी ही चिंताजनक भी क्योंकि इससे न सिर्फ एयर इंडिया और टाटा समूह बल्कि उड्ड्यन के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा को भी धक्का लगा वहीं बोइंग कंपनी की साख भी  गिरी है। इसलिए वह  इस हादसे की तह में जाए बिना नहीं रहेगी किंतु सरकार को देखना होगा कि हवाई अड्डों पर विमानों की उड़ान पूर्व जाँच के बारे में अचूक व्यवस्था हो। ये बात भी ध्यान देने योग्य है कि भारत में हवाई यात्रा केवल संपन्न वर्ग तक सीमित नहीं रही बल्कि मध्यम वर्ग में भी इसका आकर्षण बढ़ा है। ऐसे में सरकार ने भले ही उड्ड्यन व्यवसाय से हाथ खींच लिया किंतु वह इसके व्यवस्थित संचालन में अपनी भूमिका से पीछे नहीं हट सकती। रही बात टाटा समूह की तो ये दुर्घटना उसकी प्रतिष्ठा के लिए बड़ा  धक्का है। इससे वह कैसे उबरती है ये देखने वाली बात होगी। अन्य विमानन कंपनियों को भी सावधानी रखनी होगी क्योंकि एक विमान के दुर्घटना ग्रस्त होने पर आर्थिक से बड़ा नुकसान उससे होने वाली मानवीय क्षति है जिसकी भरपाई न कोई मुआवजा कर सकता है और न ही बीमा से मिलने वाली राशि। ज्यादा लाभ कमाने। के फेर में एयर लाइंस द्वारा सेवा और सुविधाओं के स्तर में लालगातार गिरावट भी आलोचना का विषय बना हुआ है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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