Monday, 9 June 2025

कोई कुछ भी कहे किंतु मोदी देश की जरूरत हैं


1989 के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता का एक लंबा दौर चला।  जल्दी - जल्दी सरकारों के बदलने से प्रधानमंत्री पद पर भी नvaajpeyiये चेहरे देखने मिले जिनमें विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, पी. वी नरसिम्हा राव, एच. डी. देवगौड़ा, इंदर कुमार गुजराल और  अटल बिहारी वाजपेयी  थे। अटल जी के पहले दो कार्यकाल क्रमशः 13 दिन और 13 महीने के रहे लेकिन  तीसरे कार्यकाल में वे  कार्यकाल लगभग पूरा कर सके। उनके पहले श्री राव ने भी 5 साल सरकार चलाई ।   डाॅ.मनमोहन सिंह भी 10 साल प्रधानमंत्री रहे । लेकिन उक्त सभी को  स्पष्ट बहुमत नहीं होने से  सहयोगी दलों का दबाव झेलना पड़ा। डाॅ. सिंह  गाँधी परिवार के शिकंजे के कारण  अपनी प्रतिभा का उपयोग नहीं कर सके। यही कारण रहा कि  वे  अपना असर नहीं छोड़ सके और इसीलिए जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को 2014 में प्रधानमंत्री का चेहरा बनाया तो 1984 के बाद पहली बार किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला। भाजपा ने 283 और उसके गठबंधन एनडीए को 336 सीटें मिलीं। इसी वजह से भाजपा अपना एजेंडा लागू करने का साहस बटोर सकी । पहला कार्यकाल पूरा करने के बाद 2019 के चुनाव में मोदी सरकार और भी बड़े बहुमत से लौटी और भाजपा अकेले 300 का आंकड़ा पार गई।और श्री मोदी न सिर्फ राष्ट्रीय अपितु वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूत राजनेता के तौर पर स्थापित हुए।नीतीश कुमार ने जरूर दो बार एनडीए छोड़कर  प्रधानमंत्री से टकराने का दुस्साहस किया और 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले विपक्षी गठबंधन को अस्तित्व में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई किंतु अचानक वे वापस एनडीए में लौट आये। हालांकि  तीन तलाक, धारा 370 और राम मंदिर जैसे बड़े काम करने के बाद भी 2024 में भाजपा 240 पर रुक गई किंतु चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार ने बिना देर लगाए श्री मोदी के तीसरे शपथ ग्रहण का रास्ता साफ कर दिया। सवाल ये उठा कि जबरदस्त छवि , प्रभावशाली कार्यशैली और जनहित की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के बाद भी श्री मोदी बहुमत से वंचित कैसे रह गए जबकि  10 वर्ष  में भारत हर दृष्टि से आगे बढ़ा। अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। कोरोना जैसी महामारी का जिस तरह मुकाबला किया गया उसकी पूरी दुनिया में प्रशंसा हुई। 140 करोड़ लोगों का टीकाकरण , 80 करोड़ जनता को मुफ्त खाद्यान्न और गरीबों को 5 लाख रु. तक मुफ्त इलाज जैसी सौग़ातें कम नहीं थीं किंतु नागरिकता संशोधन जैसे फैसलों को लेकर विपक्षी दलों के दुष्प्रचार से  मुस्लिम ध्रुवीकरण को गति मिली। ऐसा ही हुआ दलित मतदाताओं के साथ जिन्हें आरक्षण खत्म होने का भय दिखाकर भाजपा के विरुद्ध लामबंद किया गया। दूसरी तरफ भाजपा के  प्रतिबद्ध समर्थक अबकी बार 400 पार  की खुशफहमी का शिकार हो गए। निश्चित रूप से वह परिणाम राष्ट्रवादी राजनीति के लिए बड़ा झटका था ।  हालांकि  श्री मोदी सरकार बनाने में सफल रहे।किंतु तीसरे कार्यकाल के बारे में ये कयास लगने लगा कि वे दबाव में आकर भाजपा के एजेंडे पर अमल नहीं कर पाएंगे किंतु वक्फ संशोधन को संसद से पारित करवाकर उन्होंने दिखा दिया कि वे विषम परिस्थितियों में भी कार्य करने में सक्षम हैं। लोकसभा चुनाव  के बाद ये कहा जाने लगा कि मोदी का जादू खत्म हो चला  है किंतु हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जिस धमाकेदार अंदाज में जीत दर्ज की उसने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया और जिस विपक्षी एकता के बल पर राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने लगे थे वह ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी। शरद पवार, उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल का नूर उतर गया। इस सबके पीछे श्री मोदी का जबरदस्त आत्मविश्वास और अथक परिश्रम है। पहलगाम हादसे के बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिये उन्होंने अपनी दृढ़ता से पूरे विश्व को अवगत करवा दिया। भले ही विपक्ष कुछ भी कहे किंतु श्री मोदी आज देश की जरूरत हैं। आधारभूत संरचना में भारत को वैश्विक स्तर पर खड़ा करने में उनकी सरकार का ऐतिहासिक योगदान है। दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बनने की हैसियत हासिल करना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है। देश को रक्षा क्षेत्र में शक्तिशाली बनाने में इस सरकार की भूमिका सराहनीय रही है। सबसे बड़ी बात ये है कि  श्री मोदी ने भारत और भारतीयों की प्रतिष्ठा को अकल्पनीय ऊंचाई प्रदान की।  11 वर्ष का कार्यकाल पूरा करना निःसंदेह बड़ी उपलब्धि है। हालांकि अभी अनेक चुनौतियाँ हैं। पाकिस्तान के अलावा बांग्लादेश भी नई समस्या के रूप में सामने आया है। मणिपुर की आग बुझने का नाम नहीं ले रही। वक़्फ़ संशोधन को लेकर एक बार फिर मुस्लिम ध्रुवीकरण का प्रयास हो रहा है। विपक्ष को श्री मोदी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं हो रहे लेकिन देश की जनता आज भी उनमें अपना भविष्य देखती है। आलोचनाओं से विचलित हुए बिना वे जिस तन्मयता से अपने काम में  जुटे रहते हैं वह अन्य किसी में नजर नहीं आता। देश के हर हिस्से में बिना भेदभाव के विकास की रोशनी पहुंचना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है । 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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