Tuesday, 3 June 2025

यूक्रेन और रूस का युद्ध खतरनाक स्थिति में



दो दिन पहले यूक्रेन द्वारा रूस पर किये गए ड्रोन हमले दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए। रूस के भीतर घुसकर उसके लड़ाकू विमानों को नष्ट करने के लिए जो तरीका उसने अपनाया वह युद्ध तकनीक में एक नये अध्याय का प्रारंभ कहा जा सकता है। सुनने में आया है कि जिन ट्रकों में ड्रोन छुपाकर ले जाए गए उनको चलाने वालों ने खुद को भी उड़ा दिया। इस तरह के आत्मघाती हमलों के अनेक उदाहरण इतिहास में भरे पड़े हैं। लेकिन आज, की दुनिया में आतंकवादियों द्वारा ही ऐसा किया जाता है। अमेरिका में हुए 9/11 हमले में भी ओसामा बिन लादेन के इशारों पर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जिन दो इमारतों को विमान टकराकर जमींदोज किया गया उन्हें चलाने वाले भी मारे गए। लेकिन यूक्रेन ने जो किया वह उसका नतीजा वह जानता है।  उल्लेखनीय है कि जब कुछ महीनों पहले व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिलने गए तब उन्होंने इकतरफा युद्धविराम का जो दबाव डाला उसे जब यूक्रेनी  राष्ट्रपति ने मंजूर नहीं किया तब ट्रम्प ने उन्हें बेहद अपमानजनक तरीके से बाहर निकाल दिया। उस समय ऐसा लगा था कि वे रूसी राष्ट्रपति पुतिन की तरफदारी कर रहे थे। ये बात भी सामने आई कि उनकी नजर  यूक्रेन के बहुमूल्य खनिजों पर थी। जेलेंस्की के बारे में काफी ऊलजलूल बातें भी ट्रम्प सार्वजनिक तौर पर कहते रहे। लेकिन हाल ही में उन्होंने पुतिन की भी तीखी आलोचना कर डाली जिस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने उन्हें चेतावनी दी कि वे आग से न खेलें। इस  बयान से ये लगा कि ट्रम्प और पुतिन के बीच तालमेल की संभावनाएं खत्म हो चली हैं। इसी बीच जब बीते सप्ताह यूक्रेन ने अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला कर रूस की सैन्य क्षमता को ललकारा तब दुनिया चौंक गई क्योंकि इतनी तबाही झेलने के बाद  उसमें इतना भीषण हमला करने का साहस कहाँ से आया ये बड़ा सवाल है। लेकिन जल्द ही यूक्रेन ने ये खुलासा किया कि उसने इस हमले के पहले अमेरिका को उसकी जानकारी दे दी थी। इसके बाद ये संदेह पैदा हुआ कि  इसके पीछे अमेरिका का हाथ था। उसके बाद रूस की प्रतिक्रिया बड़ी ही शांत रही क्योंकि उसने अभी भी जो नुकसान हुआ उसकी पुष्टि तो नहीं की किंतु इतना संकेत अवश्य दे दिया कि इसका जवाब बहुत भयानक होगा। जाहिर है लगातार युद्ध की विभीषिका झेल रहा यूक्रेन अपने से कई गुना ताकतवर रूस पर इतना बड़ा हमला किसी बड़ी शक्ति की मदद के बिना नहीं कर सकता था। एक संभावना ये भी है कि यूरोप के कुछ देश इसके प्रायोजक हों क्योंकि पुतिन अनेक देशों की जमीन पर कब्जा करने की धमकी दे चुके हैं। दरअसल अमेरिका द्वारा यूक्रेन का साथ छोड़ दिये जाने के बाद यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के प्रति चिंतित हो उठे थे। हालांकि अभी तक यूक्रेन के इस कदम का उद्देश्य समझ नहीं आ रहा क्योंकि इससे रूस को कितना भी बड़ा नुकसान हो जाए किंतु यूक्रेन  जीत हासिल करने में कामयाब हो जायेगा ये उम्मीद करना सपने देखने जैसा है। ऐसा लगता है कुछ अदृश्य ताकतें इस लड़ाई को खतरनाक मोड पर ले जाना चाह रही हैं और यूक्रेन उनके लिये मोहरा बन गया है। वैसे भी  यूक्रेन रूस से टकराने की जुर्रत कभी नहीं करता यदि अमेरिका और उसके समर्थक यूरोपीय देश उसकी मदद न करते। इतनी लंबी लड़ाई के बाद भी यदि रूस उसे  पूरी तरह परास्त नहीं कर सका तो यह उसके हौसले को तो दर्शाता है किंतु उसकी अपनी क्षमता इतनी नहीं थी कि वह इतना लंबा युद्ध लड़ पाता। इसीलिए उसने रूस पर जो ताजा वार किया वह चौंकाने वाला है। कुछ दिनों बाद पुतिन, ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच फोन पर बातचीत होने वाली है।  इस दौरान यूक्रेन द्वारा किये गए ताजा ड्रोन हमले पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि सही स्थिति तो पता नहीं चल सकेगी क्योंकि ऐसे मामलों पर सदैव परदा पड़ा रहता है किंतु रूस इसका जवाब जरूर देगा। राष्ट्रपति पुतिन के स्वभाव को देखते हुए पूरी दुनिया इस बात के प्रति भयभीत है कि वे यूक्रेन की कमर तोड़ने जैसा कदम उठा सकते हैं। अमेरिका उनको रोक पाने की स्थिति में नहीं है और चीन रूस के साथ खड़ा है। ये देखते हुए रूस - यूक्रेन के बीच की जंग खतरनाक स्थिति में आ गई  है। चूंकि पुतिन  किसी भी स्थिति में  शांत नहीं बैठेंगे इसलिए दुनिया को किसी बड़ी घटना के लिए तैयार रहना होगा। 

- रवीन्द्र वाजपेयी

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