भारत की महान पर्व परंपरा में दीपावली का सर्वोच्च स्थान है । इसका सीधा संबंध सुख - समृद्धि से है इसीलिए यह पर्व धन - संपदा की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी जी को समर्पित है। वैसे तो प्रत्येक दीपावली पर देश ही नहीं अपितु दुनिया के विभिन्न देशों में बसे सनातनी संस्कृति के अनुयायी उत्साहित होकर खुशियाँ मनाते हैं किंतु इस वर्ष की दीपावली पर देश नये आत्मविश्वास से भरा हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के रूप में हमारे राजनीतिक नेतृत्व और देश की रक्षा के लिए समर्पित सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान को पहलगाम की आतंकी घटना के लिए जो दंड दिया उसने पूरी दुनिया में भारत के सैन्य बल का डंका बजा दिया।
रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदमों से अमेरिका जैसी महाशक्ति तक चिंतित हो उठी जिसका प्रमाण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा जबरन थोपे गए टैरिफ हैं। लेकिन भारत ने जबर्दस्त दृढ़ता दिखाते हुए उस दबाव के सामने झुकने से इंकार कर दिया। भारतीय अर्थव्यवस्था को मरा हुआ बताने वाले ट्रम्प अब अपनी मुद्रा डॉलर के प्रभुत्व को बचाने चिंतित हैं। अमेरिका में लाखों कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा। दूसरी ओर भारत सरकार ने जीएसटी की दरों को घटाकर उपभोक्ताओं के साथ ही उद्योग - व्यापार जगत की खुशियों को भी दोगुना कर दिया।
देश आर्थिक मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ा है। पाकिस्तान के साथ हाल ही में हुए युद्ध में अपनी सैन्य शक्ति के अभूतपूर्व प्रदर्शन के जरिये भारत ने रक्षा क्षेत्र में अपनी कुशलता के साथ ही आत्मनिर्भरता का जो परिचय दिया उसके कारण अब वह अस्त्र - शस्त्रों के निर्यात की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। कूटनीतिक मंचों पर हमारी उपस्थिति अनिवार्य होती जा रही है। दुनिया की महाशक्तियाँ भारत की उपेक्षा करने के बजाय उसके साथ तालमेल बिठाने आगे आ रही हैं। इन सबसे आम भारतीय का हौसला बुलंद हुआ है। एक तरफ जब दिग्गज अर्थव्यवस्थाएँ डाँवाडोल हो रही हैं और यूक्रेन - रूस युद्ध के लंबे खिंचने से आर्थिक अनिश्चितता ने पूरी दुनिया को हलाकान कर रखा है तब भारत के बारे में सभी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं आशाजनक अनुमान लगा रही हैं। विदेशी निवेशकों को भारत से विमुख करने के जितने भी षडयंत्र बीते एक - दो वर्षों में रचे गए , वे सब अपनी मौत मरते गए। ट्रम्प टैरिफ के कारण जो विदेशी पूंजी वापस लौटी वह फिर वापस आने लगी है। नवरात्रि से भारत के बाजारों में जो रौनक देखने मिल रही है उससे पूरा विश्व चकित है।
जहाँ तक राजनीतिक स्थिरता का सवाल है तो हमारे सभी निकटस्थ पड़ोसी आंतरिक विग्रहों से जूझ रहे हैं तब भारत मजबूत नेतृत्व के कारण अस्थिरता और अराजकता से खुद को बचा सका। देश विरोधी शक्तियों का सिर जिस मुस्तैदी से कुचला जा रहा है उसकी वजह से भारत की छवि एक मज़बूत देश के तौर पर स्थापित हुई है। नक्सलियों का सफाया बड़े पैमाने पर होने से देश का बड़ा भाग मुख्यधारा में शामिल होने को तैयार है। कश्मीर घाटी में आतंकवाद भी दम तोड़ रहा है। पूर्वोत्तर के राज्य अलगाववाद के शिकंजे से निकलकर तेजी से विकास के मार्ग पर अग्रसर हैं। आधारभूत ढांचा वैश्विक स्तर को छूने लगा है। ऊर्जा के मामले में देश अपने पैरों पर खड़ा हो चुका है। सौर ऊर्जा के अलावा अन्य विकल्पों की तलाश भी तेजी से हो रही है। हालांकि अभी हर हाथ को काम और हर खेत को पानी का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका किंतु समस्याओं से जूझने में लाचार नजर आने वाला भारत आज नई संभावनाओं का वैश्विक केंद्र है जो विज्ञान और तकनीक को अपनाने के साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हुआ है। पूरी दुनिया में फैले भारतीय मूल के अप्रवासियों के प्रति सम्मान बढ़ा है। भारत की प्रतिभाशाली युवा शक्ति महर्षि अरविंद और स्वामी विवेकानंद की भविष्यवाणी को सत्य साबित करते हुए 21 वीं सदी के भारत को विश्व का सिरमौर बनाने के प्रति कटिबद्ध है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस दीपावली पर देश उम्मीदों और आत्मविश्वास से भरपूर सुखद और सुरक्षित भविष्य के प्रति आश्वस्त है। लेकिन इसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयासों की पराकाष्ठा करनी होगी। आइये संकल्प लें कि हम भारत माता को परम वैभव के उच्चतम शिखर पर ले जाने के लिए अपना योगदान देने में सबसे आगे रहेंगे ,इस भाव के साथ कि:-
देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।
दीप पर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आये, यही मंगलकामना है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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