Friday, 3 October 2025

देश की छवि खराब कर अपना नुकसान कर रहे राहुल



अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जब भारत की अर्थव्यवस्था को मरा हुआ बताया तब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने उनकी बात का समर्थन किया था। ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ पर भी श्री गाँधी केन्द्र सरकार पर हमलावर रहे। लेकिन गत दिवस कोलंबिया दौरे में अपने एक भाषण में उन्होंने भारत में लोकतंत्र को खतरे में बताकर एक बार फिर अपने पद की गरिमा गिराई। यही नहीं तो  एक बार फिर दोहराया कि नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के परिणामस्वरूप भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। वे इतने पर ही नहीं रुके अपितु रास्वसंघ और भाजपा की भी आलोचना कर बैठे। श्री गाँधी ने ऐसा पहली बार नहीं किया। अपनी गोपनीय विदेश यात्राओं को छोड़कर अन्य सभी में वे इसी तरह भारत की छवि खराब करते आये हैं। लेकिन ऐसा करने से उनकी अपनी प्रतिष्ठा पर भी आंच आती है। देश में लोकतंत्र कमजोर होता तब श्री गाँधी इतना बोलने का साहस नहीं जुटा पाते। ये बात अलग है कि देश में उनकी बातों को लोग गंभीरता से नहीं लेते। इसका कारण उनके बयानों में हलकापन होना है। भाजपा विरोधी चंद यू ट्यूबर पत्रकार उनकी राजनीतिक जड़ें मजबूत  करने का प्रायोजित कार्यक्रम कितना भी चलाएं किंतु श्री गाँधी में आयु का अर्धशतक पार करने के बाद भी  नेता प्रतिपक्ष लायक परिपक्वता का अभाव होने से वे अपने प्रति विश्वास अर्जित नहीं कर पा रहे। नशीली दवाओं के कारोबार के लिए कुख्यात कोलंबिया जैसे देश में वे किस उद्देश्य से गए ये भी बड़ा सवाल है क्योंकि वहाँ की सत्ता तक  माफिया के दबाव में रहती है। ऐसे देश में जहाँ लंबे समय तक तानाशाही रही और आज भी  लोकतंत्र की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, वहाँ जाकर श्री गाँधी द्वारा भारत में लोकतंत्र के लिए खतरे की बात कहना उनकी राजनीतिक समझ पर संदेह को और पुख्ता करने के लिए पर्याप्त है। एक लैटिन अमेरिकी देश में बैठकर रास्वसंघ की आलोचना करने का क्या औचित्य था ये भी समझ से परे है। भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में भी उन्होंने जो कहा वह विरोधाभासी था। मसलन उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में आर्थिक विकास हुआ है किंतु नोटबंदी और जीएसटी से उद्योग - व्यापार को नुकसान हुआ जबकि सच्चाई ये है कि उन दोनों के लागू होने के बाद थोड़े समय तक आर्थिक जगत में अनिश्चितता का माहौल जरूर दिखा किंतु आज भारत  दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के साथ ही अपनी शर्तों पर काम करने का माद्दा रखता है। ट्रम्प द्वारा बनाये गये दबाव का जिस साहस के साथ सामना किया गया उसने भारत की छवि एक मजबूत देश की बना दी है। अमेरिका सोचता था कि वे नरेंद्र मोदी को झुका लेंगे किंतु अब उसके उलट भारत ने दुनिया भर में व्यापार की संभावनाएं तलाशकर नये समझौते करते हुए अमेरिका को ठेंगा दिखा दिया। ऐसे में  श्री गाँधी विदेश जाकर अपने देश की आलोचना कर कुछ सुर्खियां भले  बटोर लें किंतु देश के भीतर उसकी विपरीत  प्रतिक्रिया होती है। उनके सलाहकारों की क्षमता पर भी संदेह होता है जो श्री गाँधी की विदेश यात्राओं का आयोजन करते हैं । प्रधानमंत्री श्री मोदी आज दुनिया भर में एक प्रभावशाली नेता के तौर पर प्रतिष्ठित हैं। देश के भीतर भी उनकी लोकप्रियता कायम है। उनकी कार्यक्षमता उदाहरण बन गई है। विश्व राजनीति में भारत की अग्रणी भूमिका की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। देश में राजनीतिक स्थिरता है। सरकार ठोस निर्णय ले रही है। जीएसटी दरों में कमी इसका उदाहरण है जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में भारी उछाल आया। शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती संख्या मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत है। ये सब इसीलिए संभव है क्योंकि देश में लोकतंत्र सुचारु रूप से चल रहा है। ये देखते हुए विदेशों में जाकर देश की नकारात्मक छवि बनाना बेहद गैर जिम्मेदाराना है। इससे उनको और कांग्रेस दोनों को नुकसान होता है। लेकिन पता नहीं क्यों वे इसे समझ नहीं पाते।

- रवीन्द्र वाजपेयी


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