अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा की गई टैरिफ वृद्धि के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने की आशंका उत्पन्न हो गई थी। इसका असर शेयर बाजार पर भी नजर आने लगा। विदेशी निवेशक भी अपना धन निकालने लगे जिससे उद्योग - व्यापार जगत में घबराहट फैलने लगी। निर्यातकों को अपना भविष्य अंधकारमय दिखने लगा। रूस से तेल एवं अन्य चीजें न खरीदने के अमेरिकी दबाव को भारत द्वारा नजरंदाज करने से भन्नाये ट्रम्प नई - नई धमकी देने लगे। लेकिन भारत सरकार ने नये - नये बाजार खोजकर निर्यातकों को राहत देने का जो प्रयास किया उसके अनुकूल परिणाम देखने मिले। जब ट्रम्प को ये लगा कि भारत व्यापार संधि में अमेरिका द्वारा लगाई जा रही शर्तों को मानने राजी नहीं हो रहा तब उन्होंने कुछ चीजों पर टैरिफ का बोझ कम करने की चाल चली किंतु डेरी उत्पादों सहित अनेक अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर भारत के साफ इंकार के कारण अभी तक नया समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका। हालांकि जैसी खबर है अमेरिकी दबाव में रिलायंस सहित कुछ निजी कंपनियों ने रूसी तेल की खरीदी में कमी कर दी किंतु सरकारी स्तर पर यथास्थिति बनी हुई है। इस सबके बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत आ रहे हैं। इस दौरान वे रक्षा सौदों के अलावा अन्य व्यापार समझौते भी करेंगे जिसमें तेल भी शामिल है। साथ ही भारतीय उपभोक्ता वस्तुओं के लिए रूसी बाजार खोलने सहित भारतीय प्रतिभाओं के लिए रूस के दरवाजे खोलने का ऐलान भी करेंगे। पिछले कुछ दिनों से भारत के शेयर बाजार में रिकार्ड उछाल का कारण भारत - अमेरिका व्यापार समझौते और यूक्रेन - रूस के बीच युद्ध विराम की संभावनाओं के अलावा पुतिन के भारत आने की पुष्टि होना भी है। लेकिन गत दिवस अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति की खबर आने के बाद ये स्पष्ट हो गया कि अमेरिकी दबाव का सफलतापूर्वक सामना करने में भारत सफल हो गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ( सकल घरेलू उत्पादन) की दर ने 8.2 प्रतिशत का आंकड़ा छूकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। इस वर्ष भारत की जीडीपी के जो अनुमान लगाए जा रहे हैं उनमें वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर उतार - चढ़ाव की आशंका व्यक्त की जा रही थी। अमेरिकी दबाव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका भी जताई जाने लगी थी। लेकिन भारत सरकार ने जीएसटी सुधारों को लागू कर तमाम प्रतिकूलताओं को अनुकूलताओं में बदलने की जो बुद्धिमत्ता दिखाई उसके चमत्कारिक परिणाम देखने मिले। हालांकि नई जीएसटी दरें दशहरा - दीपावली के पहले लागू होने का लाभ उपभोक्ताओं को तो मिला ही, उद्योग - व्यापार जगत भी उससे लाभान्वित हुआ। इसके अलावा निर्यातकों को भी इस सुधार से राहत मिली। इन सबका समन्वित परिणाम ही जीडीपी में आई जबरदस्त उछाल के रूप में देखने मिला। हालांकि इस दर को बनाये रखना बड़ी चुनौती होगी क्योंकि आने वाले कुछ महीनों में वैश्विक समीकरण तेजी से बदलेंगे। रूस - यूक्रेन युद्ध रुकने के बाद यदि पुतिन और ट्रम्प करीब आये तब शीतयुद्ध के जो हालात बीते दो - तीन सालों में बने उनसे उत्पन्न तनाव कम होना संभव है और तब भारत को अपनी महत्वपूर्ण स्थिति बनाये रखने के बारे में सतर्क रहना होगा। ट्रम्प द्वारा शुरू किये गए टैरिफ युद्ध के कारण भारत, रूस, चीन, ब्राज़ील और द. अफ्रीका ने ब्रिक्स जैसे मंच को ताकतवर बनाकर अमेरिकी प्रभुत्व को कमजोर करने की जो रणनीति बनाई वह अब तक कारगर साबित हुई है। लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि की रफ्तार इन सभी में अधिक होने से पूरी दुनिया की नजरें हम पर लगी हैं। लगभग सभी बड़े देश भारत के साथ व्यापार बढ़ाने उत्सुक हैं। वहीं प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपनी उत्पादन इकाइयाँ यहाँ लगाने को इच्छुक हैं। वित्तीय वर्ष 2025 - 26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी का आंकड़ा उत्साह बढ़ाने वाला है। यदि केंद्र सरकार जीएसटी की तरह से ही अन्य करों के बोझ में भी कमी करे तो विकास की गति 10 फीसदी तक पहुँच सकती है जो 2047 में भारत को विकसित देश बनाने में सहायक साबित होगी।
- रवीन्द्र वाजपेयी