Wednesday, 12 November 2025

बिहार के नतीजों का दूरगामी असर होगा : सर्वे एजेंसियों की साख भी दाँव पर


बिहार में दूसरे चरण का मतदान समाप्त होते ही एग्जिट पोल की दूकानें सज गईं। हालाँकि इनकी विश्वसनीयता पहले जैसी नहीं रही। इसका कारण नौसिखियों का इस क्षेत्र में कूदना ही है। हालांकि चुनाव पूर्व सर्वे और एग्जिट पोल जिस सैंपलिंग विधि पर आधारित हैं उसको  इस आधार पर नकारा नहीं जा सकता कि वे गलत भी निकले क्योंकि अनेक सर्वे और एग्जिट पोल सत्य या उसके बेहद करीब भी रहे। शुरुआत में कुछ पेशेवर एजेंसियां ही इस कार्य से जुड़ी हुईं थीं किंतु जबसे राजनीतिक दल और कुछ प्रत्याशी भी चुनाव सर्वेक्षण का सहारा लेने लगे तबसे ये एक संगठित व्यवसाय बन गया। आजकल राजनीतिक दल प्रत्याशी चयन करने के लिए भी सर्वे एजेंसियों की सेवाएं लेते हैं जिनको इस काम के लिए अच्छे पैसे मिलते हैं। चुनाव बाद होने वाले एग्जिट पोल को टीवी समाचार चैनलों द्वारा भी प्रायोजित किया जाने लगा। ज्यों - ज्यों  चैनलों की संख्या बढ़ती गई एग्जिट पोल  का भी फैलाव होने लगा। इसीलिए 11 तारीख की शाम  से तमाम टीवी चैनल एग्जिट पोल दिखाने लगे। साथ ही विभिन्न दलों के प्रवक्ताओं, राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ट पत्रकारों को बिठाकर उन पर बहस आयोजित की गई। जाहिर है इसका उद्देश्य  दर्शक संख्या बढ़ाकर विज्ञापन बटोरना होता है जो कि व्यवसायिक रणनीति  है। पिछले लोकसभा चुनाव में एक सुप्रसिद्ध सर्वे एजेंसी का एग्जिट पोल गलत निकलने पर उसके मुखिया को विपक्षी दलों ने टीवी चैनलों पर इतना जलील किया कि वे रोने लगे। हालाँकि उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपनी विश्वसनीयता बनाये रखी। और मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल जारी करने की बजाय एक दिन बाद अपने निष्कर्ष प्रसारित करने लगे ।  वैसे लगभग डेढ़  दर्जन एग्जिट पोल में एकाध अपवाद छोड़  सभी नीतीश कुमार की वापसी का संकेत दे रहे हैं। कुछ का कहना है कि कड़े मुकाबले के बाद भी एनडीए सत्ता में लौटेगा वहीं कुछ ने उसकी छप्परफ़ाड़ जीत का अनुमान लगाया है। लेकिन गत रात्रि जो एग्जिट पोल जारी  हुआ उसमें विभिन्न  जातियों , आयु वर्ग  और महिला - पुरुष के रुझान के आधार पर एनडीए की मामूली बढ़त का संकेत तो है किंतु  कुछ सर्वे महागठबंधन की विजय की भविष्यवाणी करने में भी जुटे हैं। इनके अतिरिक्त सट्टा बाजार भी चुनाव परिणामों के बारे में अपने अनुमान लगाता है। सट्टा बाजार में सबसे अग्रणी राजस्थान के फलोदी ने एनडीए की 150 से अधिक सीटें मिलने की भविष्यवाणी कर सबको चौंका दिया। हालांकि सट्टा गैर कानूनी है किंतु चुनावों के दौरान सभी की नजर उसके अनुमानों पर रहती है जो कि ज्यादातर सही निकलते रहे हैं।  कुल मिलाकर यदि सभी एग्जिट पोल का औसत निकालें तो 14 नवंबर को बिहार की सत्ता फिर नीतीश कुमार के हाथ आ  जाएगी। हालांकि लोकसभा चुनाव में हुए उलटफेर को लोग भूले नहीं हैं। इसीलिए महागठबंधन की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज करने के प्रति भी हिचकिचाहट है। अनिश्चितता की एक वजह प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी है जिसके प्रदर्शन को यद्यपि अधिकतर एग्जिट पोल में निराशाजनक बताया गया है किंतु  एनडीटीवी के पूर्व मालिक प्रणय रॉय के मुताबिक बिहार में एनडीए आगे रहकर भी बहुमत से पीछे रहेगा और  जनसुराज को मिलने वाली 24 सीटें संतुलन बनाने - बिगाड़ने का काम करेंगी। हालांकि ऐसा कहने वाले वे अकेले व्यक्ति हैं । बिहार के चुनावी नतीजे केवल इस राज्य ही नहीं अपितु राष्ट्रीय  राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव डालेंगे। साधारण तौर से देखें तो लालू प्रसाद यादव का युग समाप्ति की ओर है। वहीं इसका असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी पड़ सकता है जो नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के समर्थन से कायम है। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की चुनाव जिताऊ क्षमता भी बिहार में दाँव पर है। महागठबंधन की हार से उनकी साख और गिरने के अलावा पार्टी भी भविष्य में कमजोर होगी । बड़ी बात नहीं कर्नाटक की सरकार उसके हाथ से निकल जाए। वहीं इंडिया गठबंधन की एकजुटता भी  खतरे में पड़ सकती है । जबकि एनडीए के जीतने पर प. बंगाल के चुनाव में भाजपा दोगुने उत्साह से उतरेगी। राजनीतिक दलों के अलावा चुनाव पूर्व सर्वे और एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता का फैसला भी कल दोपहर तक हो जाएगा। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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