Thursday, 27 November 2025

केवल दिल्ली ही नहीं अपितु पूरे देश की हवा प्रदूषित है


देश  के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा दिल्ली में वायु प्रदूषण पर की गई यह टिप्पणी समाचार पत्रों में प्रथम पेज की खबर बन गई कि उन्हें शाम 55 मिनिट की सैर (वॉक) करने में तकलीफ होने लगी।  दिल्ली की हवा में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुँचने का हवाला देते हुए अदालत की कार्रवाई में ऑनलाइन भाग लेने की अनुमति मांगे जाने पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा अपनी आपबीती बताते हुए अधिवक्ता की बात से सहमति व्यक्त की। वरिष्ट अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी वैसी ही मांग रखी तब श्री सूर्यकांत ने कहा कि राजधानी में वायु प्रदूषण से लोगों को सांस लेने में जो दिक्कत हो रही है उसके मद्देनजर वे बार एसोसियेशनों और न्यायाधीशों से चर्चा उपरांत अदालत की कार्रवाई ऑनलाइन मोड पर करने के बारे में जल्द निर्णय लेंगे। उल्लेखनीय है राष्ट्रीय राजधानी प्रतिवर्ष की तरह सर्दियाँ आते ही वायु प्रदूषण की गिरफ्त में आ जाती है। इस कारण एयर क्वालिटी का स्तर बहुत नीचे चला जाता है जिससे बाहर निकलने वालों को तो समस्या होती ही है घर में भी एयर प्यूरीफायर उपकरण लगाने पड़ते हैं। मुख्य न्यायाधीश भले ही सर्वोच्च और उच्च न्यायालय में अधिवक्ताओं को ऑनलाइन शामिल होने की सुविधा प्रदान कर दें किंतु निचली अदालतों में ऐसा करना संभव नहीं होगा। और उससे भी बड़ी बात ये है कि दिल्ली में रह रहे लोग क्या केवल अदालती कार्य के लिए घरों से बाहर निकलते हैं ? लाखों शासकीय और अशासकीय कर्मचारियों के अलावा बड़ी संख्या में प्रतिदिन बाहर से लोग सरकारी या निजी कार्य से दिल्ली आते हैं। यह महानगर व्यापार का भी बड़ा केंद्र है। उद्योग और निर्माण कार्यों में मजदूरी करने वाले तो रहते ही बेहद प्रदूषित जगहों पर हैं। उनके लिए घर पर बैठकर पेट पालन सम्भव नहीं। फिर स्कूल -  कालेज जाने वाले छोटे -  बड़े बच्चों के लिए भी बाहर निकलना मजबूरी है। कुल मिलाकर मुद्दा ये है कि हर साल उठने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान खोजे बिना सभी तात्कालिक उपायों में उलझकर रह जाते हैं। दिल्ली चूँकि देश की राजधानी है इसलिए वहाँ होने वाली हर छोटी - बड़ी घटना सुर्खियां बन जाती है। जबकि वायु प्रदूषण  राष्ट्रीय समस्या में बन चुका है। छोटे  शहर तक इसकी चपेट में आ चुके हैं। इसका एक कारण किसानों द्वारा खेतों में फसल कटाई के बाद पराली जलाने से उत्पन्न धुएँ को बताया जाता है। अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली के मुख्यमंत्री बने तब उन्होंने पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली के वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बताया। उनके राज में ऑड - ईवन नामक प्रयोग करके भी देखा गया जिसके अंतर्गत एक दिन सम और एक  दिन विषम नम्बर के वाहन चले। लोगों से पूल बनाकर एक ही वाहन से आने - जाने की अपील भी की गई। लेकिन वह सफल नहीं हुआ।  पंजाब में भी आम आदमी की सरकार बन जाने के बाद अब श्री केजरीवाल पराली की चर्चा नहीं करते।  दिल्ली विधानसभा के पिछले चुनाव में यमुना की स्वच्छता एक बड़े मुद्दे के बतौर पर चर्चा में रही ।  भाजपा ने केजरीवाल सरकार को इस बात के लिए कठघरे में खड़ा किया कि वह 10 साल में यमुना को स्वच्छ करने का वायदा पूरा नहीं कर सकी। चूंकि राजधानी में बड़ी संख्या में बसे उ.प्र और बिहार के लोग यमुना के बेहद दूषित जल में छठ पूजा करते थे इसलिए उन्होंने भाजपा के आरोप का संज्ञान लिया। सत्ता में आने के बाद भाजपा ने यमुना को स्वच्छ बनाने का अभियान शुरू किया जिसके परिणामस्वरूप इस बार छठ पर यमुना में झाग की बजाय साफ जल दिखाई दिया। लेकिन ले - देकर बात वही है कि राजधानी होने से सारा ध्यान दिल्ली तक ही सीमित रह जाता है जबकि कमोबेश, पूरे देश में पर्यावरण और प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को बाहर टहलने पर वायु प्रदूषण ने परेशान किया और अधिवक्ताओं को अदालत आते - जाते साँस लेने में तकलीफ होने लगी तो अदालत की कार्रवाई ऑन लाइन किये जाने पर विचार होने लगा किंतु इतने बड़े देश के बारे में सोचें तब इस तरह की व्यवस्थाओं से समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सकता। दिल्ली में सीएनजी वाहन और मेट्रो ट्रेन चलने के बाद वाहनों से निकलने वाले धुएं से होने वाला प्रदूषण कुछ कम होने की जो उम्मीद थी वह वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण धूमिल हो गई। एक विशेषज्ञ के अनुसार राजधानी में बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्य भी वायु प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। ताजा खबरों के अनुसार मुंबई में भी ये समस्या दस्तक देने लगी है। ऐसे में इस बात की आवश्यकता है कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए किये जाने वाले उपायों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लागू किया जाए। राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन जैसा कोई अभियान देश भर में प्रारंभ करते हुए जनता की भागीदारी से प्रदूषण मुक्त भारत का संकल्प लेना होगा। भले ही ये काम कठिन लगता हो किंतु एक बार लोगों को इसका लाभ समझ में आ गया तो बड़ी बात नहीं आगामी कुछ वर्षों के भीतर ही भारत में हर नागरिक को जहरीली हवा में सांस लेने से मुक्ति मिल सकेगी। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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