9 नवम्बर 1989 को मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस का पहला अंक सम्माननीय पाठकों के हाथ आया था । वह अभूतपूर्व राजनीतिक गतिविधियों का दौर था। नये सियासी समीकरण आकार ले रहे थे । बेमेल गठबंधन और अवसरवाद समूचे राजनीतिक विमर्श पर हावी होने से जनमानस भ्रमित था । स्थापित प्रतिमाएं ध्वस्त हो रही थीं । अविश्वास और अनिश्चितता के कारण सर्वत्र भ्रम के साथ भय का माहौल बन गया । उस दौर में महाकोशल की चेतनास्थली जबलपुर में नए सांध्य दैनिक के लिए पाँव जमाना आसान नहीं था । लेकिन देखते - देखते मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस पाठकों की पसंद बन गया । अपनी निर्भीकता और सटीकता के कारण पाठकों का पुरजोर समर्थन मिलने से हमारा उत्साह बढ़ा। जिससे हम साहस के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में समर्थ हो सके । तीन दशक से ज्यादा बीत चुके हैं । देश के साथ दुनिया भी पूरी तरह से बदल चुकी है । राजनीति के अलावा अर्थव्यवस्था , साहित्य, कला और संस्कृति के साथ ही समाचार जगत के स्वरूप में भी आमूल परिवर्तन हुआ है । राजनीति ने अपनी दिशा पूरी तरह बदल ली है | 1989 में तेजी से उभरी हिंदुत्व की लहर राष्ट्रीय मुख्यधारा का रूप ले चुकी है । वहीं देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अपनी प्रतिष्ठा बचाने संघर्षरत है । आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भारत दुनिया के बड़े देशों के साथ बराबरी करने की स्थिति में है । कोरोना महामारी का मुकाबला कुशलता के साथ करने के कारण आम देशवासी का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है । भारतीय समुदाय पेशेवर दक्षता और पौरुष के बलबूते विश्व भर में सम्मानित और समृद्ध हो रहा है । 36 साल की इस यात्रा में मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस जागरूकता और जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर पाठकों के साथ बना रहा । स्वस्थ पत्रकारिता की प्रतिबद्धता से हम सदैव जुड़े रहे। और इसी वजह से विश्वास के संकट के बाद भी इस समाचार पत्र ने अपनी साख बरकरार रखी । हालांकि इसके लिए हमें असंख्य कठिनाइयों , अवरोधों और मुखालफत का सामना करना पड़ा । तेजी से हो रहे तकनीकी उन्नयन के कारण छोटे और मझोले समाचार पत्रों के सामने पूंजी का जबरदस्त संकट उत्पन्न होता जा रहा है । डिजिटल माध्यम के उद्भव से समाचार पत्रों के समक्ष एक सबल प्रतिद्वंदी खड़ा हो गया है। लेकिन इस सबसे अविचलित रहते हुए मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस निरंतर आगे बढ़ता जा रहा है । सम्माननीय पाठकों का विश्वास ही हमारी ऊर्जा का अक्षत स्रोत है । इसी तरह निःस्वार्थ भाव से सदैव सहयोग देने वाले उदार विज्ञापनदाता हमारा संबल हैं । इसी कारण पत्रकारिता के आदर्शों के अनुरूप संघर्षपथ पर निर्बाध चलते रहने के लिए हम कटिबद्ध हैं । प्रारंभ से ही जिसे पढ़े बिना शाम अधूरी है का जो विशेषण हमारे साथ जुड़ा , उसे कायम रखने हम पूरी ईमानदारी से समर्पित रहेंगे । भविष्य में और भी बड़ी चुनौतियां आने वाली हैं । राजनीतिक घटनाचक्र भी अपनी गति से घूम रहा है। हर समय चुनावों में उलझे देश में समाचार माध्यमों के लिए अपनी विश्वसनीयता बनाये रखना कठिन होता जा रहा है। उनकी छवि पर चौतरफा हमले हो रहे हैं। यद्यपि इस स्थिति के लिए वे स्वयं भी कुछ हद तक जिम्मेदार हैं | लेकिन मध्यप्रदेश हिन्दी एक्सप्रेस अपने पाठकों को आश्वस्त करता है कि वह उनके भरोसे को बनाये रखने प्रतिबद्ध रहेगा। दबावों के सामने झुकने का स्वभाव न होने से ही हम पाठकों का विश्वास अर्जित कर सके। और आने वाले समय में भी उसी अंदाज में ये सफर चलता रहेगा क्योंकि जब पाठकों का साथ हो तब फिर हमें किसी से भयभीत होने की जरूरत ही नहीं है।
विनम्र आभार एवं अनंत शुभकामनाओं सहित।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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