Friday, 7 November 2025

बिहार में रिकार्ड तोड़ मतदान चुनाव आयोग की बड़ी सफलता


बिहार विधानसभा के बहुप्रतीक्षित चुनाव में पहले चरण का मतदान कल जिस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ वह स्वागत योग्य है। यद्यपि कुछ जगहों पर हिंसा हुई किंतु वह इस राज्य के इतिहास को देखते हुए नगण्य ही कही जाएगी। लेकिन जिस बात के लिए इस चरण की चर्चा देश भर में हो रही है वह है मतदान का प्रतिशत 64 प्रतिशत से भी आगे निकल जाना। 2020 के विधानसभा चुनाव में 57 और पिछले लोकसभा चुनाव में 56 फीसदी मतदाताओं द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग किया गया था। ऐसे में 7 - 8 फीसदी की वृद्धि निश्चित रूप से सुखद आश्चर्य है और वह भी तब, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी दल  मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण पर आसमान सिर पर उठाकर घूमते हुए आरोप लगाते रहे कि चुनाव आयोग ने भाजपा के दबाव में बड़ी संख्या में उन मतदाताओं के नाम सूची से अलग कर दिये जिन्हें विपक्ष का समर्थक माना जाता है। वैसे तो सभी चुनाव महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन बिहार विधानसभा के  इस चुनाव पर अनेक कारणों से पूरे देश की निगाह लगी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से विपक्ष काफी उत्साहित था। लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार सफलता हासिल कर ये दिखा दिया कि अभी उनका आकर्षण बना हुआ है। उसी के बाद राहुल ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का शिगूफा छेड़कर देश भर में आंदोलन खड़ा करने का प्रयास किया किंतु उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में जब चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूचियों से विदेशी घुसपैठियों को अलग करने के लिए उनका  गहन पुनरीक्षण करने का फैसला किया तो श्री गाँधी और अन्य विपक्षी दलों ने उसे रुकवाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया । वहाँ भी जब निराशा हाथ लगी तब श्री गाँधी ने राजद नेता तेजस्वी यादव के साथ  मिलकर पूरे बिहार में वोट अधिकार यात्रा भी निकाली। विपक्ष का यही आरोप था कि चुनाव आयोग  बड़ी संख्या में वोट काटकर भाजपा की आसान कर रहा  है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर काटे गए 65 लाख नामों का विवरण सार्वजनिक भी किया गया और लोगों को  नाम जुड़वाने का पर्याप्त अवसर भी मिला। ऐसा माना जा रहा है कि उस प्रक्रिया में ज्यादातर  उन बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के नाम अलग किये गए जो अवैध तरीकों से मतदाता बन गए थे जबकि उनके पास भारत की नागरिकता नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा चुनाव आयोग के अधिकार  क्षेत्र में हस्तक्षेप से इंकार के बाद मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन हो गया जिसके कारण विपक्ष के पास करने के लिए कुछ नहीं बचा तो उसने वोट चोरी - वोट चोरी चिल्लाकर लोगों को भड़काने की कोशिश की । लेकिन जिस उत्साह के साथ बिहार के मतदाताओं ने मतदान का नया कीर्तिमान स्थापित किया उसने ये साबित कर दिया कि चुनाव आयोग आम मतदाता का विश्वास अर्जित करने में सफल रहा। कौन जीतेगा, कौन नहीं इसका अनुमान  लगाने वाले अपने काम में लगे हैं। एनडीए और महागठबंधन के अलावा जनसुराज के भी अपने - अपने दावे हैं। सट्टा बाजार के धन्धेबाज भी हमेशा की तरह रोज नये अनुमान लेकर आ रहे हैं। लेकिन जिस शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से प्रथम चरण का मतदान पूरा हुआ उसके लिए चुनाव आयोग प्रशंसा का पात्र है। मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और गलत तरीके से नाम काटे जाने की शिकायतें भी उंगली पर गिनने लायक ही आईं। महागठबंधन द्वारा प्रथम चरण में बढ़त हासिल करने का दावा चुनाव प्रक्रिया के निष्पक्ष और पारदर्शी होने का सबसे बड़ा प्रमाण पत्र है। भले ही राहुल , दिल्ली में बिहार चुनाव को चोरी किये जाने की आशंका जताते रहे हों। कल के अनुभव के आधार पर 11 नवम्बर को होने वाले द्वितीय चरण के मतदान की प्रक्रिया भी शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित संपन्न होने की उम्मीद बढ़ गई है। बिहार में इसके पहले कभी भी इतना अधिक मतदान नहीं हुआ जिससे पता चलता है कि वोट चोरी के दुष्प्रचार का कोई असर नहीं हुआ। बेहतर होगा ममता बैनर्जी भी मतदाता सूचियों के सघन, पुनरीक्षण में सहयोग दें क्योंकि मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने के साथ ही चुनाव प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बनाये रखने में कितना सहायक है ये बिहार में गत दिवस हुए मतदान से स्पष्ट हो गया। हर देशप्रेमी ये मानेगा कि मतदाता सूचियों में विदेशी नागरिकों का नाम होना पूरी तरह गलत  है । और जो नेता या पार्टी उनके नाम काटे जाने का विरोध करती है उसकी नीयत पर संदेह होना स्वाभाविक है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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