फरीदाबाद के एक डॉक्टर के यहाँ बड़ी मात्रा में विस्फोटक चीजों के अलावा घातक अस्त्र -शस्त्र बरामद होने के बाद से ही किसी बड़ी आतंकी वारदात की आशंका बढ़ गई थी जो कल शाम दिल्ली के लालकिले इलाके में एक वाहन में हुए विस्फोट से सही साबित हो गई। जिस वाहन में विस्फोट हुआ उसमें बैठे शख्स के अलावा 9 लोगों की मौत और 20 के घायल होने की जानकारी मिली है। अभी उक्त विस्फोट के कारण और पृष्ठभूमि के बारे में स्पष्ट रूप से अधिकृत तौर कुछ भी नहीं कहा गया किंतु जिस तरह के तार जुड़ रहे हैं उनसे यह आतंकी हमला ही लगता है । जिस वाहन में विस्फोट हुआ उसमें बैठे उमर नामक व्यक्ति की तलाश की जा रही थी। ये संभावना है कि उसने विस्फोट में खुद को भी खत्म कर लिया। हालांकि इसकी पुष्टि भी जरूरी जाँच पड़ताल के बाद ही संभव है। इस बारे में ये सोचना गलत नहीं है कि फरीदाबाद में पकड़ा गया जखीरा किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए जमा हुआ था। उससे जुड़े लोगों का संबंध कश्मीर से निकलने से संदेह और गहरा हो जाता है। आश्चर्य की बात ये है कि इनमें डॉक्टर जैसे पेशेवर लोग भी हैं। कुछ दिन पहले म.प्र के पूर्व मुख्यमंत्री वरिष्ट कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने दिल्ली दंगों के सिलसिले में बंद उमर खालिद को इस आधार पर रिहा करने की मांग की थी कि वे डॉक्टरेट कर रहे थे। लेकिन ताजा घटनाओं में डॉक्टरों का जुड़ाव होने के बाद ये कहना पड़ेगा कि किसी भी पेशे से जुड़ा इंसान आतंकवादियों के साथ मिलकर खूनी खेल रच सकता है। ऐसा लगता है ऑपरेशन सिंदूर में अपने परिवार को गँवा चुका कुख्यात आतँकवादी हाफिज सईद भारत में दहशत फैलाने के लिए नए सिरे से तैयारी कर रहा है। कल ही ये खबर भी आई थी कि वह बांग्लादेश में अपना अड्डा बनाने जा रहा है जहाँ से आतंकी हमले संचालित किये जाएंगे। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई के प्रमुख ने भी हाल ही में ढाका की यात्रा की थी। शेख हसीना का तख्ता पलटे जाने के बाद इस देश में भारत विरोधी भावनाओं को अंतरिम सरकार का संरक्षण मिलने से हिंदुओं और उनके धर्मस्थलों पर हमले बढ़े हैं। सरकार के मुखिया बने बैठे मो. युनुस का भारत विरोधी रवैया भी जगजाहिर है। बीते कुछ महीनों में पाकिस्तान की सरकार ने हाफिज सईद को बड़ी मात्रा में धन देकर उसके संगठन को दोबारा खड़ा करने में सहायता दी। ऐसे में दिल्ली में हुए विस्फोट में पाकिस्तान की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। फरीदाबाद के डॉक्टर के यहाँ पकड़ा गया सामान आतंकवादी गतिविधियों में ही उपयोग होने वाला था इससे कोई इंकार नहीं कर सकेगा। चूंकि इसमें पकड़े जा रहे लोगों की जड़ें कश्मीर घाटी से हैं लिहाजा ये सोचना गलत नहीं होगा कि घाटी से बाहर देश के भीतरी हिस्सों में मुंबई जैसे सीरियल बम धमाके करते हुए आंतरिक आंतरिक सुरक्षा तहस - नहस करने की साजिश रची जा रही है। बीते कुछ दिनों में ही गुजरात और म.प्र सहित अनेक राज्यों में आतंकवादियों की गिरफ्तारी के बाद फरीदाबाद में पकड़ा गया सामान इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी है। हालांकि खुफिया तंत्र ने किसी बड़े हादसे को टालने में तो सफलता हासिल कर ली किंतु इसी बीच लालकिले के पास धमाका हो गया जो उक्त योजना का छोटा हिस्सा कहा जा सकता है। हालांकि उसमें मारे गए लोगों के शव पर वैसे निशान नहींं मिलने की जानकारी आई है जैसे बम विस्फोट में होते हैं किंतु विस्फोट की भयावहता देखते हुए ये संदेह होना स्वाभाविक है कि वह किसी आतंकवादी योजना का ही हिस्सा है। इस बारे में ये बात भी गौरतलब है कि अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के महापौर चुनाव में ममदानी नामक मुस्लिम की जीत के बाद वहाँ अचानक इस्लामिक भावनाओं का ज्वार उठने लगा जिसमें अरबी भाषा बोलने की छूट के अलावा अमेरिका का राष्ट्रध्वज उतार फेंकने जैसी जुर्रत की जा रही है। और उसकी देखा - सीखी ब्रिटेन और इटली सहित अनेक यूरोपीय देशों में बसे मुस्लिम सड़कों पर सामूहिक नमाज पढ़ने जैसी गतिविधियों से कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने पर आमादा हैं। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के रूप में पाकिस्तान को सबक सिखाया था किंतु अमेरिका ने उसकी पीठ पर हाथ रख दिया जिसके बाद से उसकी शरारतें फिर शुरू होती दिख रही हैं। दिल्ली में हुए विस्फोट की घटना से एक बात स्पष्ट है कि सीमा पार बैठे दुश्मन के बराबर ही आस्तीन के सांप भी खतरनाक हैं जिनका फन सख्ती से कुचला जाना चाहिए। देश में बैठे घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निकाल बाहर करने की मुहिम को और तेज करना देश हित में जरूरी हो गया है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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