Monday, 17 November 2025

बिहार में लगे झटके के बाद : इंडिया गठबंधन बिखरने के कगार पर

बिहार चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन के भविष्य पर  सवाल उठने लगे हैं। 2026 में प. बंगाल, असम, तमिलनाडु , केरल तथा पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। प. बंगाल में ममता बैनर्जी ने एकला चलो की नीति के कारण ही तृणमूल कांग्रेस नामक अलग पार्टी बनाई और चार दशकों से चले आ रहे वामपंथी राज को उखाड़ फेंका। नरेंद्र मोदी के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद जब भाजपा ने वहाँ पाँव जमाना शुरू किया तब ममता विपक्षी गठबंधन की पेशकश करते हुए शरद पवार आदि से मिलीं भी। लेकिन बात इसलिए नहीं बनी क्योंकि उन्हें राहुल गाँधी से परहेज था। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वामपंथी एकजुट होकर उनके विरुद्ध लड़े किंतु उन्हें एक सीट तक नहीं मिली । बाद में इंडिया गठबंधन बनने पर ममता उसमें शामिल तो हो गईं परंतु  कांग्रेस और वाम दलों को लोकसभा की एक भी सीट देने से मना कर दिया। बीते सप्ताह  बिहार में कांग्रेस और वाम दलों की जो दुर्गति हुई उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में ममता उनको एक सीट भी नहीं देंगी । असम में जरूर कांग्रेस ही भाजपा के मुकाबले में है लेकिन ममता की पार्टी वहाँ भी अकेले लड़कर विपक्षी एकता में सेंध लगाने से बाज नहीं आयेगी। अगला राज्य है तमिलनाडु जहाँ इंडिया गठबंधन कायम है क्योंकि सत्तारूढ़ द्रमुक द्वारा कांग्रेस सहित वामदलों को भी सीटें दी जाती हैं किंतु राष्ट्रीय दल होने के बाद भी कांग्रेस  बराबरी का हिस्सा मांगने की स्थिति में नहीं है जैसा बिहार में भाजपा ने जदयू से हासिल किया और  ऐसा ही पुडुचेरी में भी है। लेकिन केरल में इंडिया गठबंधन पूरी तरह से छिन्न - भिन्न है जहाँ मुख्य मुकाबला वाम मोर्चा और कांग्रेस की अगुआई वाले गठबंधन के बीच होना है। अर्थात बिहार, प. बंगाल और तमिलनाडु में साथ - साथ लड़ने वाले वाम दल और कांग्रेस केरल में एक दूसरे के विरुद्ध खड़े होंगे जबकि दोनों ही इंडिया गठबंधन के घटक हैं । वाम दलों को नाराजगी है कि 2019 में  राहुल गाँधी केरल की वायनाड सीट से लड़ने आ गए।  वे अमेठी से भी लड़े किंतु हारने के बाद वायनाड का प्रतिनिधित्व करते रहे। 2024 में उन्होंने दोबारा  वायनाड से नामांकन भरा तब वामदलों ने माँग की कि वे उत्तर भारत की किसी सीट से लड़ें  किंतु राहुल नहीं माने तब सीपीआई नेता डी. राजा की पत्नी को वाम दलों ने वहाँ से खड़ा किया। श्री गाँधी ने उ.प्र की रायबरेली सीट से भी नामांकन भरा और दोनों  जीतने के बाद वायनाड छोड़ दी। वामदलों को लगा कि अब कांग्रेस वह सीट छोड़ देगी लेकिन उसने  राहुल की बहिन प्रियंका वाड्रा को उतारकर इंडिया गठबंधन की एकता को धता बता दिया।  इसके बाद  वाम सरकार और कांग्रेस के बीच टकराहट और बढ़ गई।  पिछली बार  वाम मोर्चे ने लगातार दूसरी बार सत्ता पर कब्जा किया था। कांग्रेस को उम्मीद है आगामी चुनाव में वहाँ सत्ता बदल सकती है इसलिए वह उत्साहित है। लेकिन वाम मोर्चा भी केरल पर कब्जा  बनाये रखना चाहेगा क्योंकि प. बंगाल और त्रिपुरा के दुर्ग ढह जाने के बाद यही उसका एकमात्र ठिकाना है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की एकता को केरल में जबरदस्त धक्का पहुंचेगा । अन्य राज्यों से भी अच्छी खबरें नहीं आ आ रहीं। बिहार के नतीजों के बाद राजद में भी चर्चा है कि अकेले लड़े होते तब शायद इतनी बुरी गति न होती। 2027 में  उ.प्र में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद अखिलेश यादव चाहते थे कि इंडिया गठबंधन में उन्हें महत्व मिले किंतु राहुल के रवैये से सपा और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ती गई। विशेष रूप से जब कुछ उपचुनावों में सीटों के बंटवारे से क्षुब्ध कांग्रेस ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया जिसके कारण भाजपा ने जोरदार वापसी की। महाराष्ट्र में भी इंडिया गठबंधन में दरार के संकेत हैं। शरद पवार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद शांत बैठे हैं। सुना है उनके और भाजपा के बीच खिचड़ी पक रही है। उधर उद्धव ठाकरे भी राहुल गाँधी से छिड़कने लगे हैं। मुंबई महानगर पालिका के चुनाव में कांग्रेस और उद्धव अलग - अलग लड़ने वाले हैं। उनकी और राज ठाकरे की संयुक्त  रैली के बाद इंडिया गठबंधन का भविष्य अधर में है। आम आदमी पार्टी पहले ही कन्नी काट चुकी है। लगता है लोकसभा चुनाव के पहले फूला इंडिया गठबंधन रूपी गुब्बारा फूटने को आ गया है। उसकी पिछली बैठक कब हुई थी ये भी किसी को याद नहीं है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी अलग रास्ते पर हैं। दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की शानदार  जीत के बाद राहुल गाँधी की क्षमता पर घटक दलों का भरोसा खत्म सा है। कांग्रेस के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है जो कभी भी सतह पर आ सकता है। प्रधानमंत्री द्वारा कांग्रेस में एक और विभाजन की संभावना जताये जाने के बाद से राजनीतिक हल्कों  में भी उत्सुकता है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन भारी उथल - पुथल के होंगे। बड़ी बात नहीं संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने के पहले ही कांग्रेस में ही कोई हाइड्रोजन बम फोड़ दे। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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