Wednesday, 24 September 2025

12 लाख तक आयकर छूट और जीएसटी में कमी का असर दिखने लगा


जैसी उम्मीद थी वैसा ही हुआ। 22 सितंबर को जैसे ही जीएसटी की नई दरें लागू हुईं बाजार में जमकर खरीददारी हुई। चार पहिया वाहनों की बिक्री ने पिछले सभी  कीर्तिमान ध्वस्त कर दिये । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस भारतीय अर्थव्यवस्था का मृत बताकर  मजाक उड़ाया था उसने न सिर्फ अपने जीवित रहने अपितु शक्तिशाली होने का भी प्रमाण ऊँची आवाज में दे दिया। बाजार से जो खबरें आ रही हैं उनके अनुसार उपभोक्ताओं ने जीएसटी की दरों में किये गए बदलावों का खुलकर स्वागत करते हुए खरीददारी के रूप में अपना उत्साह प्रदर्शित किया। यह  उन आलोचकों को करारा जवाब है जिन्होंने  प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से किये गए वायदे के पूरा होने में संदेह व्यक्त किया था। इस साल के केंद्रीय बजट में आयकर छूट की सीमा 12 लाख कर दी गई थी । लिहाजा मध्यमवर्ग के पास बचत के लिए अतिरिक्त पैसा आया। उस पर जीएसटी की दरों में किये गए सुधारों ने सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ कर दी। यही वजह है कि ट्रम्प द्वारा छोड़े  गए टैरिफ रूपी तीरों के बाद भी अर्थव्यवस्था के पाँव मजबूती से टिके हुए हैं। विदेशी निवेशकों ने जब शेयर बाजार से अपना धन वापस निकाला तब घरेलू  निवेशकों ने अपनी पूंजी से उस झटके को बेअसर कर दिया। ट्रम्प की हरकतें  लगातार जारी हैं। और वे रोजाना कुछ न कुछ ऐसा कर जाते हैं जिससे भारत हताश  होकर घुटना टेक हो जाए। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि भारत  टैरिफ के दबाव से बचने के लिए अपनी जनता के हितों को नजरंदाज नहीं करेगा। ट्रम्प अमेरिका के कृषि और दुग्ध उत्पादों के लिए भारत के बाजार खोलने के लिए टैरिफ को हथियार बना रहे थे जिसे सरकार ने कोई महत्व नहीं दिया । हालांकि  50 फीसदी टैरिफ लगने से  भारत के निर्यात पर असर हुआ है  जिससे उद्योग - व्यापार जगत के माथे पर पसीने की बूंदें झलकने लगी थीं किंतु जीएसटी में हुए  बदलाव से व्यापार जगत की चिंताएं काफी हद तक दूर हो गईं। पहले दिन ही जिस तरह की खरीददारी हुई उसने टैरिफ के दबाव को काफी हद तक घटा दिया। वह भी तब जब महीने के अंतिम सप्ताह में नौकरपेशा मध्यम वर्ग का हाथ तंग रहता है। 22 सितंबर को बाजार में जो रौनक नजर आई उसके बाद आर्थिक विशेषज्ञ भी ये मान रहे हैं कि अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में जब वेतन हाथ आएगा तब दीपावली सीजन की खरीदी और भी उत्साह से होगी। आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को विफल बताने वाले आलोचक ये जानकर हैरान होंगे  कि ट्रम्प के ही देश की अनेक प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसियों ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में भारत की विकास दर के 7 फीसदी रहने की ताजा भविष्यवाणी कर दी है। इसके जो कारण बताये गए  उनमें पहली तिमाही के उत्साहवर्धक नतीजों के अलावा, आयकर छूट की सीमा में बड़ी वृद्धि और उसके बाद जीएसटी की दरों में किया गया बदलाव हैं। इन सबका समन्वित परिणाम ही बाजार में आ रही उछाल के रूप में  नजर आया। अच्छा मानसून भी अर्थव्यवस्था में मज़बूती के संकेत दे रहा है। यदि बाजार में मांग बढ़ेगी तो निश्चित तौर पर उत्पादन इकाइयों को  भी काम मिलेगा जिसका परिणाम रोजगार के अवसर बढ़ने के रूप में सामने आयेगा। कुल मिलाकर बीते छह माह में हुए दो आर्थिक सुधारों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में गतिशीलता बने रहने की सम्भावनाएँ बढ़ा दी हैं। 12 लाख तक की आय  कर मुक्त किये जाने के बाद जीएसटी की दरों में हुए बदलाव का असर पूरी तरह आने में कुछ समय तो लगेगा । देखने वाली बात ये भी है कि दरें कम होने का प्रभाव जीएसटी की मासिक वसूली पर कितना होगा। हालांकि वित्तीय विशेषज्ञ मानकर चल रहे हैं कि बिक्री बढ़ने से जल्द ही, पुराना आंकड़ा लौट आयेगा जो बुनियादी ढांचे सहित अन्य विकास कार्यों और जन कल्याण की योजनाओं के निर्बाध संचालन के लिए अत्यावश्यक है। फिलहाल तो चारों तरफ से सकारात्मक संकेत ही मिल रहे हैं जिनसे लगता है देश का मनोबल काफी ऊंचा है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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