आगामी 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू हो जाएंगी। इस बारे में संदेह जताया जा रहा था कि कंपनियां इसका लाभ ग्राहकों को देने के बजाय मूल्य वृद्धि कर अपनी कमाई बढ़ा लेंगी। लेकिन अभी तक जो देखने मिला उसके मुताबिक उपभोक्ता बाजार में मौजूद लगभग सभी कंपनियों ने नई दरों के अनुसार अपने उत्पादों के मूल्य घटा दिये। स्मरणीय है भारत के बड़े हिस्से में पितृ (श्राद्ध) पक्ष के दौरान नई चीजें नहीं खरीदी जातीं। इसीलिये जीएसटी की संशोधित दरें 22 तारीख अर्थात शारदेय नवरात्रि के प्रारंभ से लागू होंगी क्योंकि नवरात्रि से दीपावली तक देश भर में बाजार गुलजार रहते हैं। इस अवधि में मामूली हैसियत वाले से लेकर संपन्न वर्ग तक खरीदी करता ही है। दीपावली के उपरांत शादियों का दौर शुरू होने के कारण भी उपभोक्ता बाजार में जमकर खरीदी होती है। दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस को तो सोना - चांदी, वाहन, जमीन - जायजाद, कपड़े, इलेक्ट्रानिक उपकरण आदि की खूब बिक्री होती है। इस साल उम्मीद है कि उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी घटने से दीपावली सीजन में बाजार खरीददारों से भरे रहेंगे। अमेरिका द्वारा 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय व्यापार और उद्योग जगत में चिंता व्याप्त थी जो निर्यात घटने से और बढ़ गई । विदेशी निवेशकों की बिकवाली से शेयर बाजार में गिरावट आने लगी। लेकिन भारतीय निवेशकों ने उस चुनौती का करारा जवाब देते हुए शेयर बाजार को जबरदस्त सहारा दिया जिसके कारण वह रोज नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इस वर्ष मानसून में पर्याप्त वर्षा के कारण कृषि पैदावार अच्छी होने की उम्मीद से उपभोक्ता बाजार में उत्साह स्पष्ट नज़र आ रहा है। आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख किये जाने से मध्यमवर्गीय व्यवसायी और नौकरपेशा वर्ग की क्रयशक्ति में भी वृद्धि हुई है। बचत योजनाओं में बीते कुछ सालों की तुलना में ज्यादा निवेश भी शुभ संकेत है। जीएसटी की दरों में हुए बदलावों से आम जनता को सीधा लाभ मिलने से घरेलू बचत के अलावा बाजार में खरीदी के आंकड़ों में वृद्धि अवश्यम्भावी मानी जा रही है। इस प्रकार अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि के खौफ से देश उबरता जा रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते हेतु वार्ताओं का क्रम जारी है । वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना दोस्त बताते हुए उनके जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी । लेकिन दूसरी तरफ वे यूरोपीय यूनियन पर दबाव बनाने में जुटे हैं कि वह भारत पर 100 प्रतिशत की दर से टैरिफ लगाए। उल्लेखनीय है भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार समझौते की बातचीत अंतिम चरण में है। वहीं ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार संधि पहले ही हो चुकी है। ट्रम्प को डर है कि इन नये बाजारों के बल पर भारत उनके द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ का दबाव झेल जायेगा जिससे उनकी जबरदस्त किरकिरी होगी। इस प्रकार भारत ने आर्थिक मोर्चे पर जिस आत्मविश्वास, का प्रदर्शन किया उसकी वजह से वैश्विक स्तर पर हमारी धाक बढ़ी है। अमेरिका में बैठीं दुनिया की तमाम रेटिंग एजेंसियां लगातार कह रही हैं कि ट्रम्प टैरिफ के बाद भी भारत की विकास दर 6 फीसदी से ज्यादा ही रहेगी। इस आकलन के बाद विदेशी निवेशकों द्वारा फिर से भारत का रुख किये जाने के संकेत मिल रहे हैं। बाजार में नई कंपनियों के साथ ही स्थापित उद्योगों के आईपीओ आने से निवेशकों के लिए अच्छे अवसर उपलब्ध हैं। कुछ निवेश प्रस्तावों को उम्मीद से कई गुना ज्यादा प्रतिसाद मिलने से नगदी की कमी का शोर भी धीमा पड़ गया है। इस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत बताये जाने संबंधी ट्रम्प की टिप्पणी का जवाब जीएसटी दरों में कमी करने के रूप में श्री मोदी ने दे दिया। जिस तत्परता के साथ भारत ने वैकल्पिक बाजारों की तलाश की उसने टैरिफ पीड़ित अन्य देशों को भी राह दिखाई है। इसीलिये शुरुआत में ऐंठ दिखा रहा अमेरिका अब भारत से व्यापार समझौते के लिए आतुर है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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