Friday, 12 September 2025

सुरक्षा एजेंसियों की शिकायत को गंभीरता से लें राहुल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की विदेश यात्राएँ राजनीतिक जगत में चर्चा के साथ ही बहस का मुद्दा बनती रही हैं। अनेक बार वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए भी  विदेश जाते हैं जो सामान्य बात है। लेकिन जब वे इन यात्राओं को गोपनीय रखते हैं तब जो सवाल उठते हैं वे स्वाभाविक हैं। वैसे किसी व्यक्ति की निजता में दखलंदाजी अनुचित है किंतु  ये बात भी विचारणीय है कि श्री गाँधी अति विशिष्ट श्रेणी में आते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष तो वे 2024 के चुनाव उपरांत बने किंतु उसके पहले वे कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे । सबसे महत्वपूर्ण ये है कि उनके पिता स्व. राजीव गाँधी की हत्या के बाद से पूरे गाँधी परिवार को उच्चस्तरीय सुरक्षा प्रदान की गई। नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होने से वे वैसे भी वीआईपी हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन केवल विशिष्ट व्यक्ति के नाते ही नहीं बल्कि उनके परिवार को आतंकवादियों से खतरे के परिप्रेक्ष्य में सुरक्षा घेरा दिया गया है। सर्वविदित है राहुल की दादी इंदिरा गाँधी और पिता राजीव गाँधी  आतंकवाद का शिकार होकर प्राणों से हाथ धो बैठे। इंदिरा जी को तो उनके सुरक्षा कर्मियों ने ही गोलियों से भून दिया था। उल्लेखनीय है अमृतसर के सुप्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद सिख समुदाय की नाराजगी के चलते श्रीमती गाँधी को सलाह दी गई थी कि वे सिख अंगरक्षकों की सेवाएं न लें किंतु उन्होंने उसे हल्के में लिया जिसका दुष्परिणाम उनकी नृशंस हत्या के रूप में देखने मिला। इसी तरह राजीव गाँधी की सरकार द्वारा श्रीलंका में सेना भेजने के निर्णय से नाराज लिट्टे नामक संगठन ने एक महिला आतंकवादी के जरिये आत्मघाती हमले में उनको विस्फोट का शिकार बनाया । उसके बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूरे गाँधी परिवार को अति विशिष्ट श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करवाई गई । उन घटनाओं के बाद से केंद्र में सरकारें बदलती गईं किंतु गाँधी परिवार की सुरक्षा यथावत रही। यद्यपि श्रेणी में कुछ बदलाव हुए किंतु श्री गाँधी ,उनकी माँ सोनिया गाँधी और बहन प्रियंका वाड्रा के परिजनों को सुरक्षा घेरा उपलब्ध  है। सुरक्षा कर्मी तो अपने कर्तव्य का निर्वहन करते ही हैं किंतु  सुरक्षा प्राप्त हस्तियों का भी फर्ज है कि वे सुरक्षा एजेंसियों की व्यवस्था में पूर्ण सहयोग दें। श्री गाँधी देश के मुख्य विपक्षी दल के शीर्ष नेता हैं। उन्हें आये दिन जनता के बीच जाना पड़ता है। विशेष रूप से चुनाव प्रचार के दौरान ऐसा करना  जरूरी होता है किंतु ऐसे अवसरों पर सुरक्षा कर्मियों को जो दिक्कत आती है उसका ध्यान भी नेताओं को रखना चाहिए। वर्तमान संदर्भ श्री गाँधी की विदेश यात्राओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उठाई गई आपत्ति का  है। उल्लेखनीय है वे हाल ही में मलेशिया की यात्रा पर गए थे जिसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं  थी। लेकिन अचानक सोशल मीडिया पर उनका एक चित्र प्रसारित हो गया जिसमें वे  एक पर्यटन स्थल पर दिखाई दिये। उसके बाद भाजपा ने उनकी विदेश यात्राओं पर तंज कसना शुरू कर दिया। श्री गाँधी के समर्थन में  ये कहा गया कि उन्हें भी  छुट्टी मनाने का अधिकार है। इस बात से कोई असहमत नहीं हो सकता कि उनको अपनी निजता बनाए रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ ही श्री गाँधी को भी पत्र लिखकर शिकायत की है कि वे उन्हें सूचित किये बिना विदेश चले जाते हैं जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि श्री खरगे और श्री गाँधी ने उन पत्रों का क्या जवाब दिया किंतु उनमें व्यक्त चिन्ता पूरी तरह वाजिब है क्योंकि श्री गाँधी की सुरक्षा में किसी भी चूक का ठीकरा तो आखिर एजेंसियों  पर ही फूटेगा। बेहतर हो श्री गाँधी उनकी शिकायत पर सकारात्मक दृष्टिकोण का परिचय दें। उन्हें  निजी कार्य से विदेश जाने का पूरा अधिकार है किंतु उसकी जानकारी रहे तो सुरक्षा एजेंसियां विदेशों में भी उनकी हिफ़ाजत का जिम्मा उठा  सकेंगी। श्री गाँधी को ये याद रखना चाहिए कि आतंकवादियों का जाल देश ही नहीं अपितु अन्य देशों में भी फैला हुआ है।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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