Wednesday, 10 September 2025

राधाकृष्णन की जीत से कांग्रेस की वजनदारी घटी : राहुल की क्षमता सवालों के घेरे में

पराष्ट्रपति के चुनाव में आखिर वही हुआ जिसकी उम्मीद थी। भाजपा से जुड़े  एनडीए प्रत्याशी सी.पी राधाकृष्णन ने इंडिया गठबंधन उम्मीदवार पूर्व न्यायाधीश सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के भारी अंतर से पटकनी दे दी। सत्ता पक्ष ने  मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए कुछ विपक्षी दलों को साथ आने  के लिए भी मना लिया वहीं कुछ ने मतदान में अनुपस्थित रहकर परोक्ष समर्थन दिया। नतीजे के बाद विपक्ष इस बात से भौचक रह गया कि 15 मत जहाँ अवैध हो गए वहीं कुछ विपक्षी सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की। कांग्रेस की ओर से ये कहा जा रहा है कि इस बार विपक्षी प्रत्याशी को पिछले चुनाव से ज्यादा मत मिले जो विपक्ष की नैतिक विजय है। लेकिन वह भूल रही हैं कि तब तृणमूल कांग्रेस अनुपस्थित रही थी। वहीं लोकसभा में भाजपा के 300 से ज्यादा सदस्य थे जो आज घटकर 240 रह गए। यद्यपि इंडिया गठबंधन ने अपनी एकजुटता काफी हद तक बनाये रखी जिसके बल पर वह अंतिम क्षणों तक हवा उड़ाता रहा कि श्री रेड्डी के तेलुगु  भाषी होने से  चंद्राबाबू नायडू उनकी तरफ झुक सकते हैं। जदयू की भी  भाजपा से नाराजगी का प्रचार किया गया। बिहार चुनाव को लेकर चिराग पासवान और भाजपा के बीच मतभेदों को लेकर भी विपक्ष को काफी उम्मीद थी। श्री धनखड़ द्वारा पर्दे के पीछे रहकर एनडीए उम्मीदवार का खेल बिगाड़ने की अटकलें भी लगाई गईं।  मोदी विरोधी कुछ यू ट्यूबर तो केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी द्वारा भीतरघात की खबर भी चलाते रहे। लेकिन जब परिणाम आये तो पूरा विमर्श विपक्ष की कमजोरी पर केंद्रित हो गया। भाजपा ने जहाँ तयशुदा जीत को और वजनदार बनाने के लिये सार्थक प्रयास किये वहीं इंडिया गठबंधन की अगुआई करने वाली कांग्रेस जो कि संसद के दोनों सदनों में मुख्य विपक्षी दल है, हवाबाजी करती रही। भाजपा ने अपने सांसदों को दिल्ली में एकत्र कर उन्हें मतदान प्रक्रिया का समुचित प्रशिक्षण देने के साथ ही पार्टी की एकता को सुनिश्चित किया। दूसरी तरफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी बिहार में निकाली गई यात्रा के बाद थकान उतारने गोपनीय तरीके से मलेशिया जा पहुंचे और  मतदान की पूर्व संध्या पर ही वापस आये जिससे विपक्ष की कोई  रणनीति नहीं बन पायी। जिन पार्टियों ने  मतदान से दूर रहने का फैसला किया उन्हें मनाने के प्रयास हुए हों , ऐसा भी नजर नहीं आया जबकि बीजद, बीआरएस और अकाली दल की भाजपा से दूरियाँ जगजाहिर हैं। हालांकि श्री राधाकृष्णन के तमिल होने के बाद भी सत्तारूढ़ द्रमुक ने उन्हें समर्थन नहीं दिया क्योंकि वे भाजपा और रास्वसंघ से सीधे जुड़े रहे । विपक्ष का सोचना था कि श्री रेड्डी पूर्व न्यायाधीश होने से गैर राजनीतिक शख्सियत हैं लिहाजा चंद्रबाबू नायडू, जगन मोहन रेड्डी और के .सी रेड्डी तेलुगू होने से उनके पक्ष में खड़े हो जाएंगे किंतु श्री नायडू  एनडीए के साथ बने रहे जबकि तेलुगु देशम  के साथ खुले मतभेद के बाद भी जगन मोहन ने श्री राधाकृष्णन के साथ जाने का फैसला किया । वहीं केसीआर ने मतदान में हिस्सा नहीं लेकर विपक्ष को झटका दे दिया। इसके बाद भी  भाजपा ने अतिविश्वास से बचते हुए अतिरिक्त मत जुटाने के प्रयास जारी रखे जिससे विपक्ष के लगभग 15 सांसदों ने श्री रेड्डी के विरोध में मतदान किया वहीं 15  मत रद्द होने से श्री राधाकृष्णन की जीत का अंतर  बढ़ गया। इस प्रकार श्री धनखड़ के अचानक त्यागपत्र देने से उत्पन्न राजनीतिक संकट से एनडीए सफलतापूर्वक बाहर आ गया। वहीं महीने भर से भाजपा पर दबाव बना रहे राहुल गाँधी बुरी तरह विफल साबित हुए। उनकी नेतृत्व क्षमता और रणनीति बनाने की काबलियत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई। सत्ता पक्ष के पास  पर्याप्त संख्याबल होने के बाद भी उसके रणनीतिकार खुशफहमी में नहीं रहे। लेकिन श्री गाँधी  व्यूह रचना बनाने की बजाय छुट्टियां मनाने विदेश चले गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर तंज कसने वाले विपक्षी नेता श्री गाँधी की रहस्यमयी विदेश यात्राओं पर चुप क्यों रहते हैं ये भी बड़ा सवाल है।  बिहार विधानसभा चुनाव के एन पहले अपनी ताकत से ज्यादा मत हासिल होने से एनडीए का हौसला जहाँ बुलंद हुआ वहीं कांग्रेस के साथ जुड़े विपक्षी दलों में निराशा आई है। भाजपा ने विपक्ष में जो सेंध लगाई उससे इंडिया गठबंधन में आपसी अविश्वास बढ़ेगा।  जिसका प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से ही सही बिहार में देखने मिलेगा। श्री राधाकृष्णन को मिली बड़ी जीत ने कांग्रेस की वजनदारी भी कम कर दी जिसके लिए राहुल गाँधी की लापरवाही को पूरी तरह से जिम्मेदार माना जाएगा। 

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