Wednesday, 17 September 2025

भाजपा के साथ ही भारत की भी जरूरत हैं मोदी



राजनीति के अपने तौर - तरीके हैं जिनमें चुनावी जीत ही सब कुछ मानी जाती है। विचारधारा के नाम पर ढोंग नेताओं की पहचान और अपना हित साधना  सिद्धांत बन गया है। लोकतंत्र के कंधों पर नव सामंतवादी सवार  हैं। आदर्शों की राजनीति करने वाले मजाक का पात्र बन रहे हैं। आजादी के बाद का एक दशक छोड़  दें किंतु उसके बाद राजनीति में गंदगी बढ़ती गई जिसका विकृत रूप सामने है। ऐसे में एक शख्स ने  सबका साथ, सबका विकास  जैसे संकल्प के साथ  बागडोर संभाली और 11 वर्षों में भारत को एक मजबूत आर्थिक और सैन्य शक्ति के तौर पर स्थापित कर दिया। इस व्यक्ति का नाम है नरेंद्र मोदी जिनका आज 75 वां जन्मदिन है। गुजरात के  मुख्यमंत्री रहते हुए विकास पुरुष के रूप में  छाप छोड़ने वाले श्री मोदी को जब भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर प्रस्तुत किया तब आम भारतीय के मन में भी उत्साह नजर आया जिसके कारण भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला। 1984 के बाद पहली बार किसी पार्टी को स्पष्ट जनादेश मिलने का कारण मतदाताओं के मन में श्री मोदी के प्रति जबरदस्त विश्वास था। 11 वर्षों के कार्यकाल में एक भी अवकाश नहीं लेने वाले प्रधानमंत्री ने जन आकांक्षाओं  को पूरा करने का अभियान पहले दिन से ही प्रारंभ कर दिया था। जनहित की योजनाओं में घुसे बिचौलियों और दलालों को हटाने के लिए जब जनधन खाते खुलवाये तब उनकी उपयोगिता पर खूब सवाल उठे।  स्वच्छता अभियान और शौचालय योजना का भी मजाक उड़ाया गया। उज्ज्वला तथा  प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता पर भी संदेह व्यक्त किये गए। लेकिन इन सबसे आम जन के जीवन स्तर में जो सुधार हुआ वह एक तरह की  सामाजिक क्रांति ही है। इसीलिये 2019 के लोकसभा चुनाव में श्री मोदी को और ज्यादा जन समर्थन मिला। उसके बाद के पाँच वर्ष बेहद कठिनाइयों से भरे रहे। कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया।  बड़ी - बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश अपने नागरिकों की रक्षा करने में असमर्थ साबित हुए। तब भारत में कोरोना का टीकाकरण अभियान जिस तरह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ उसने  देश की क्षमता से  विश्व को परिचित करवाया। संकट के उस दौर में करोड़ों लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न  के साथ ही गरीबों के खातों में नगदी  ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं ने देश को अराजकता से बचा लिया। वरना भूख के वशीभूत लोग श्रीलंका और नेपाल जैसे हालात उत्पन्न कर  सकते थे। लॉक डाउन के  दौरान अधो संरचना के बड़े - बड़े काम संचालित कर विकास के पहियों को चलायमान रखने की सोच श्री मोदी की दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण है। विश्व के अनेक छोटे  देशों को भी उपहार में वैक्सीन देने के निर्णय ने उनकी छवि वैश्विक नेता की बना दी। वहीं आपदा में अवसर खोजने की सोच ने देश को दवा उत्पादन में अग्रणी बना दिया। सैन्य सामग्री के मामले में आत्मनिर्भर बनने उठाये गए कदमों का ही सुपरिणाम है कि भारत इस क्षेत्र में निर्यातक के तौर पर उभर सका। 2024 में भले ही उन्हें स्पष्ट बहुमत न मिला हो किंतु जनता की भावनाएं  पक्ष में होने से वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। खास बात ये है कि सत्ता में आने के बाद भी वे  सैद्धांतिक प्रतिबद्धता नहीं भूले और भाजपा की मूलभूत नीतियों को लगातार लागू करते जा रहे हैं। राम मंदिर, तीन तलाक़, धारा 370 , वक्फ संशोधन , और शिक्षा नीति के बारे में लिए   फैसले प्रधानमंत्री की दृढ़ता का प्रमाण हैं। एक देश एक चुनाव और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर भी सरकार आगे बढ़ रही है। उत्तर पूर्वी राज्यों में विकास की गंगा बहाने से वे मुख्य धारा से जुड़ने लगे हैं। कश्मीर घाटी तक भी रेल पहुँच गई है। सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने देखी। आज का भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यस्थाओं को टक्कर देने में समर्थ है। अमेरिका द्वारा थोपे गए टैरिफ का जिस मजबूती से जवाब दिया गया वह प्रधानमंत्री के कूटनीतिक कौशल को दर्शाता है। उनके कार्यकाल में देश ने जो अर्जित किया उसकी सूची बहुत लंबी है। कुछ विफलताएं भी इस दौरान देखने मिलीं किंतु ये कहना गलत नहीं है कि श्री मोदी  ने हर भारतीय में अभूतपूर्व आत्मविश्वास भर दिया। दुनिया में भारत का जो सम्मान है उसमें उनके योगदान को नकारना असंभव है। हालांकि आज भी गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं हैं और  देश के अनेक इलाके पिछड़ेपन का शिकार हैं। लेकिन प्रधानमंत्री  जिस ईमानदारी और समर्पण भाव से जुटे हुए हैं उससे लगता है सबका विकास रूपी  नारा हकीकत में बदलकर रहेगा। 75 बरस की उम्र में उनमें किसी युवक से ज्यादा ऊर्जा है । उनके नेतृत्व में भाजपा का जो विस्तार हुआ वह बड़ी उपलब्धि है। लेकिन आज श्री मोदी भाजपा के साथ ही भारत की जरूरत बन गए हैं। वे दीर्घायु हों और देश को विकास के उच्चतम शिखर तक ले जाएं यही शुभकामना है। 

- रवीन्द्र वाजपेयी

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