Thursday, 4 September 2025

जीएसटी में राहत अर्थव्यवस्था की मज़बूती का प्रमाण


15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  जीएसटी  में सुधार करते हुए जनता को दीपावली उपहार देने का जो वायदा किया था वह  पूरा हो गया। गत दिवस जीएसटी काउंसिल की बैठक में  12 और 28 फीसदी वाली दर खत्म करते हुए केवल 18 और 5 दो दरें तय हो गईं। विलासिता की वस्तुओं के साथ ही  तंबाखू उत्पाद तथा महंगे दो और चार पहिया वाहनों के लिए 40 प्रतिशत की दर निर्धारित की गई। दरों के अलावा अन्य  बदलाव आगामी 22 सितंबर से लागू होंगे । इसी तिथि से शारदेय नवरात्रि के साथ दीपावली सीजन शुरू होने से बाजारों में रौनक आ जाती है। दीपावली के बाद विवाहों का सिलसिला प्रारंभ होता है जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस साल अच्छे मानसून के कारण फसल  भी अच्छी आने की उम्मीद बाजार लगाए बैठा है। जीएसटी दरों में किये गए परिवर्तनों का सीधा असर उपभोक्ता बाजार पर होना सुनिश्चित है। हालांकि इस बारे में  काफी समय से विमर्श चल रहा था। जीएसटी  में हर माह हो रही वृद्धि से सरकार का हौसला भी मजबूत था। लेकिन अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाकर भारतीय उद्योग - व्यापार जगत को जो झटका दिया उससे उबरने के लिए भी ये फैसला लेने में तत्परता दिखाई गई। चूंकि हमारे देश में आर्थिक नीतियों पर चुनावों का दबाव रहता है इसलिए ये कहना भी गलत नहीं है कि प्रधानमंत्री ने दीपावली के बाद होने जा रहे बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जीएसटी सुधार रूपी अस्त्र छोड़ दिया।  सोशल मीडिया पर इस तरह की टिप्पणियां भी देखने मिल रही हैं कि इस फैसले से सरकार ने खुद स्वीकार  कर लिया कि जनता पर जीएसटी का भार ज्यादा था। लोगों को ये आशंका  भी है कि कंपनियां घटे हुए जीएसटी का लाभ उपभोक्ता को नहीं मिलने देंगी और मूल्य बढ़ाकर अपनी तिजोरी भरेंगी। हालांकि ऐसा सोचना निराधार नहीं है किंतु सरकार ने जो राहत दी है उसका स्वागत होना ही चाहिए क्योंकि यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही परिस्थियों में जरूरी हो गई थी। रोजमर्रे की अनेक वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त रखना और ज्यादातर को 5 फीसदी के दायरे में ले आना निश्चित तौर पर आम जनता की  क्रय शक्ति को बढ़ायेगा। 28 फीसदी वाली अनेक चीजों पर 18 फीसदी जीएसटी भी उपभोक्ता और उत्पादक दोनों के लिए मददगार होगा। कैंसर सहित जीवन रक्षक अनेक दवाओं के अलावा चिकित्सा सामग्री को 5 प्रतिशत की सूची में लाने का फैसला भी उत्साहजनक है। गत वर्ष परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने स्वास्थ्य बीमा को जीएसटी मुक्त करने संबंधी पत्र लिखकर सार्वजनिक कर दिया था।  उसका संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य के साथ ही जीवन बीमा पर जीएसटी पूरी तरह समाप्त करने का फैसला वाकई संवेदनशीलता की कसौटी पर  खरा है। इसी साल बजट में  आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख करने के अलावा 70 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी वरिष्ट नागरिकों को 5 लाख तक कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ देकर केंद्र सरकार ने जनकल्याण की दिशा में जो कदम बढ़ाये उसी का विस्तार जीएसटी में किये गए ताजा बदलाव हैं। इनके प्रभावस्वरूप आम उपभोक्ता  को जो  लाभ होगा  वह या तो बचत के रूप में राष्ट्रीय विकास में सहायक होगा या फिर बाजार में आयेगा। अनेक राज्यों ने जीएसटी घटने से राजस्व हानि की आशंका व्यक्त करते हुए केंद्र से मुआवजे की जो मांग रखी वह औचित्यपूर्ण है। लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों की मानें तो दाम गिरने  से बढ़ने वाली मांग आने वाले कुछ महीनों बाद जीएसटी की मासिक वसूली के आंकड़े को फिर उसी स्तर पर पहुँचा देगी। यद्यपि सरकार को इस बात के लिए सजग रहना होगा कि कंपनियां कीमतों में वृद्धि कर जनता को इस राहत से वंचित न कर सकें । प्रधानमंत्री मोदी वर्तमान में मजबूत वैश्विक नेता के तौर पर स्थापित हो चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ रूपी दबाव के समक्ष झुकने के बजाय उसका मुस्तैदी से प्रतिकार कर उन्होंने भारत के महाशक्ति बन जाने का परिचय दिया। ट्रम्प द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत बताकर जो घमंड दिखाया उसका माकूल जवाब है जीएसटी में किया गया बदलाव। वरना कमजोर आर्थिक स्थिति वाला देश जनता को राहत देने का खतरा कतई मोल नहीं लेता।  इस फैसले के पीछे आर्थिक, राजनीतिक या कूटनीतिक जो भी कारण हो किंतु ये जनहित में उठाया गया बहुप्रतीक्षित कदम है जिसके जरिये दुनिया को आर्थिक क्षेत्र में भारत की मजबूती का संदेश दिया गया है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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