क्रिकेट का एशिया कप शुरू होने पर भारत और पाकिस्तान के लीग मैच के पहले बड़ी संख्या में लोगों ने गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पहलगाम में शहीद हुए लोगों के परिजनों को दुख होगा। पानी और खून एक साथ नहीं बहने की बात भी याद दिलाई गई। क्रिकेट नियंत्रण मंडल में गृह मंत्री अमित शाह के बेटे की मौजूदगी का हवाला देते हुए कटाक्ष किये गए कि पैसे की लालच में भारतीय टीम को पाकिस्तान से खेलने की शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। लेकिन इन सभी प्रतिक्रियाओं के कारण जब दोनों के बीच पहला मैच खेला गया तब दुबई के स्टेडियम में भारतीय दर्शक भी नाममात्र के थे। देश में भी टीवी पर लोगों ने मैच देखने से परहेज किया । और तो और भारतीय टीम के जीतने के बाद सड़कों पर उतरकर जश्न मनाने वाले मंजर भी नहीं दिखे। लेकिन ये खबर आने पर क्रिकेट प्रेमियों को संतोष हुआ कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानी कप्तान से हाथ नहीं मिलाया। दूसरी खबर जिसने इस प्रतियोगिता के प्रति रुचि बढ़ाई वह थी उस मैच के दौरान एक पाकिस्तानी खिलाड़ी द्वारा विमान गिरने का इशारा कर भारतीयों को चिढ़ाने का काम किया। उसका आशय ऑपरेशन सिंदूर में भारत के लड़ाकू विमान गिराए जाने से था। उस दृश्य को देखने के बाद भारत में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के विरुद्ध परंपरागत प्रतिद्वंदिता की भावना जागृत हो गई। कुछ लोगों ने ये भी कहा कि यदि मैच नहीं खेलते तो ये न देखना पड़ता। लेकिन बात यहीं नहीं रुकी और आखिर में प्रतियोगिता के फ़ायनल में भी दोनों टीमें पहुँच गईं। ऐसे में ये तंज भी सुनाई देने लगे कि यदि हमारी टीम एशिया कप जीत भी गई तब उसे पाकिस्तान क्रिकेट नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्राफी लेना पड़ेगी जो वहाँ के गृह मंत्री भी हैं और एशिया क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष भी। लेकिन भारतीय टीम ने इस बारे में पहले ही कह दिया था कि वह नकवी से विजेता ट्राफी नहीं लेगी। इसीलिए कल हुए फायनल मुकाबले को लेकर भारत में पहले जैसा रोमांच लौटने लगा। इसमें दो राय नहीं कि मुकाबला काफी कड़ा और नजदीकी था। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अच्छी शुरुआत की लेकिन एक बार जो विकेट गिरना शुरु हुआ तो भारतीय गेंदबाज हावी होते चले गए और 146 रनों पर पारी समेट दी। जवाब में भारत की शुरुआत बेहद खराब थी। प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने अभिषेक शर्मा के साथ ही शुभमन गिल और कप्तान सूर्यकुमार सस्ते में चलते बने किंतु उसके बाद तिलक वर्मा , संजू सैमसन और शिवम दुबे की साझेदारियों ने भारत को जीत के करीब पहुंचा दिया । जिसे तिलक की नाबाद पारी ने संभव बना दिया। इसके बाद भारतीय टीम ने नकवी से ट्राफी लेने से इंकार कर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपजी राष्ट्रीय भावना को उभार दिया। उधर नकवी भी अड़ गए कि विजेता टीम को वही एशिया कप सौंपेंगे। घंटे भर गतिरोध रहने के बाद भी जब भारतीय टीम नहीं मानी तब खिसियाए नकवी ट्राफी के अलावा भारतीय खिलाड़ियों को दिये जाने वाले मेडल लेकर चलते बने। उधर सूर्यकुमार ने टीम के साथ मैदान में आकर जीत का उत्सव मनाते हुए भारतीय दर्शकों को हर्षित किया जो इस मैच को देखने बड़ी संख्या में पहुंचे थे। इधर देश में भी मैच को लेकर उत्सुकता बढ़ चली थी और जब आधी रात के समय रिंकू सिंह ने विजयी चौका लगाया तो वाकई ऑपरेशन सिंदूर वाला जोश छा गया। मैच के बाद सूर्यकुमार ने सधे शब्दों में पत्रकारों से बात की और प्रतियोगिता में मिली अपनी पूरी राशि भारतीय सेना को देने की घोषणा की जिसे सुनकर लोग भावुक हो उठे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी बधाई में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर पाकिस्तान के जले पर नमक छिड़क दिया। हालांकि पुरस्कार समारोह का बहिष्कार करने पर पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भारतीय टीम के विरुद्ध अनुशासन तोड़ने की शिकायत आईसीसी में कर सकता है किंतु उसके अध्यक्ष भी भारत के जय शाह ही हैं। और फिर भारत के बिना आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कल्पना उसी तरह नहीं की जा सकती जैसे कभी वेस्ट इंडीज के साथ था। खेल में हार जीत चला करती है किंतु पाकिस्तान टीम चूंकि सदैव विद्वेष का भाव रखती है लिहाजा उसके साथ ऐसा व्यवहार ही उचित है। नकवी से ट्राफी नहीं लेकर सूर्यकुमार ने जो साहस दिखाया उससे पूरे देश में खुशी है। इस जीत ने ऑपरेशन सिंदूर के जारी रहने का एहसास करवा दिया।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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