ब्रिटेन के साथ ही ईरान में भी राष्ट्रपति का चुनाव हुआ जिसमें सुधारवादी उम्मीदवार मसूद पेजेशकियान ने जीत हासिल करते हुए कट्टरवादी सईद जलीली को बड़े अंतर से हराया। कुरान के शिक्षक और पेशे से चिकित्सक श्री पेजेशकियान की छवि एक ऐसे नेता के तौर पर है, जो सुधारों में यकीन रखता है। वे अमेरिका के घोर विरोधी होने के बाद भी वे पश्चिमी मुल्कों के साथ संबंधों को सुधारने पर यकीन रखने वाले नेता हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि वे हिजाब का ऐलनिया विरोध कर चुके हैं तथा शरीया लागू करने के लिए लागू की गई मॉरल पुलुसिंग से भी सहमत नहीं हैं। यही वजह है उन्हें युवाओं का भरपूर समर्थन मिला। श्री पेजेशकियान ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को शिथिल करवाने के लिए परमाणु अप्रसार संधि मानने के लिए भी राजी हैं। यद्यपि देश के सत्ता संचालन पर हावी कट्टरपंथी उनकी सुधारवादी नीतियों को किस हद तक लागू होने देंगे ये कह पाना अभी कठिन है किंतु यदि वे युवा शक्ति को संगठित कर उनमें सफल हो सके तब वह भारत के लिए काफी अनुकूल होगा। उदाहरण के लिए पश्चिमी मुल्कों के साथ ईरान के रिश्ते सुधर जाते हैं तब भारत और ईरान के बीच सस्ते कच्चे तेल सम्बन्धी समझौता पूरी तरह से अमल में आ जायेगा जिसके चलते हमारी अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा। ईरान के रिश्ते पाकिस्तान से चूँकि बेहद खराब हैं इसलिए भी यह देश हमारे लिए उपयोगी है। देखने वाली बात ये होगी कि हमारा विदेश मंत्रालय ब्रिटेन और ईरान के नये शासकों को भारतीय हितों के अनुकूल किस तरह ढाल पाता है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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