म.प्र की मोहन यादव सरकार का पहला बजट गत दिवस पेश हुआ। चूँकि सरकार ने कोई नया करारोपण नहीं किया इसलिए आम जनता की नजर में वह अच्छा है। हालांकि बजट में लोक लुभावन घोषणाओं से भी परहेज किया गया है। यहाँ तक कि पिछली शिवराज सरकार द्वारा प्रारंभ की गई लाड़ली बहना योजना की मौजूदा राशि 1250 रु. प्रतिमाह को भी यथावत रखा गया है जबकि 1000 रु. से शुरू की गई इस योजना में शिवराज सरकार ने 250 रु. बढ़ा दिये थे और इसे 3 हजार तक ले जाने का वायदा किया था। विधानसभा चुनाव में भाजपा की जबरदस्त जीत में यही योजना तुरुप का पत्ता साबित हुई थी। हालांकि शिवराज यदि प्रदेश की सत्ता में वापस आते तब शायद वे बजट में इस योजना की राशि में उत्तरोत्तर वृद्धि का प्रावधान अवश्य करते किंतु मोहन यादव के सामने खजाने के खाली होने की भी समस्या है। इसीलिए उन्होंने लोक लुभावन घोषणाओं और कार्यक्रमों से परहेज किया। फिलहाल चुनाव रूपी कोई चुनौती भी सामने नहीं है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट में अधो संरचना, महिलाओं और आदिवासियों पर काफी ध्यान दिया गया है। तीन नये मेडिकल कालेज खोलने का प्रावधान भी किया गया है। इसी तरह बड़े शहरों में ई बसें चलाने की योजना भी घोषित की गई है। धार्मिक पर्यटन पर भी मोहन सरकार शुरू से काफी जोर दे रही है। इसके लाभ भी मिलने लगे हैं। उज्जैन में महाकाल लोक और ओंकारेश्वर में आद्य शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा खड़ी हो जाने के बाद इन स्थानों पर पर्यटकों की रिकार्ड संख्या आने लगी है। इसीलिए नर्मदा पथ के निर्माण को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है। प्रदेश में संरक्षित वन भी बहुत हैं जो बड़ी संख्या में देशी - विदेशी वन्य प्रेमी सैलानियों को आकर्षित करते हैं। शेरों के मामले में तो म.प्र सबसे अग्रणी है। 2014 के बाद से पूरे देश में राजमार्गों का जो विकास हुआ उससे म.प्र को जबरदस्त लाभ हुआ क्योंकि हृदय प्रदेश होने से सभी दिशाओं को जोड़ने वाले राजमार्गों का कुछ हिस्सा प्रदेश से होकर गुजरता है। इससे सड़क परिवहन में भी काफी वृद्धि हुई है। वहीं प्रदेश में हवाई सेवाओं का जिस तरह विस्तार हुआ वह विकास को प्रमाणित करता है। यद्यपि उद्योगों को लेकर अभी भी बहुत कुछ करना शेष है किंतु ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। बीते वर्षों में हुए निवेशक सम्मेलनों से अच्छा प्रतिसाद मिला। यदि सरकार नियोजित ढंग से प्रयास करे तो आने वाले वर्षो में औद्योगिक दृष्टि से प्रदेश विकसित राज्य की श्रेणी में आ खड़ा होगा। म.प्र को बीमारू राज्य की शर्मनाक स्थिति से निकालने में कृषि क्षेत्र ने भी शानदार योगदान दिया है। गेंहूँ की पैदावार में तो प्रदेश पंजाब और हरियाणा से आगे आ चुका है। वन संपदा प्रदेश की बड़ी दौलत है जिसकी वजह से यहाँ का पर्यावरण संतुलन बना हुआ है। नर्मदा जैसी सदानीरा नदी यहाँ की जीवन रेखा है। लोक लुभावन घोषणाओं से बचने के बावजूद शवों को घर पहुंचाने के लिए वाहन व्यवस्था इस बजट के मानवीय पक्ष को उजागर करती है। शिक्षकों और पुलिस में भर्ती की घोषणा भी बेरोजगारों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम करेगी। किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण अच्छी सोच का परिचायक है। प्रदेश में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के लिए 3 नये मेडिकल कालेज खोलने का फैसला स्वागत योग्य है किंतु इनमें पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की कमी कैसे दूर होगी ये बड़ा सवाल है। राज्य सरकार को ये तो पता ही होगा कि जो मेडिकल कालेज पहले से चले आ रहे हैं जब वे ही बीमार हों तब नये खोलने का क्या औचित्य है? लड़कियों की शिक्षा हेतु सरकार काफी कोशिशें कर रही है किंतु निजी क्षेत्र की तुलना में शासकीय शिक्षण संस्थानों की दशा बेहद खराब हैं। मोहन सरकार की कार्ययोजनाओं के लिए चूँकि काफी आर्थिक संसाधन चाहिए इसलिए उनमें से बहुत सी बजट का हिस्सा नहीं बन सकीं। विधानसभा चुनाव के पहले पिछली सरकार ने जो दरियादिली दिखाई उसके कारण मौजूदा मुख्यमंत्री के हाथ काफी बंधे हुए थे जिसका असर बजट पर दिख रहा है। लोकसभा चुनाव बीच में आने से संसाधनों का समुचित प्रबंध भी नहीं हो सका। ये देखते हुए श्री देवड़ा ने जो बजट पेश किया वह प्रशंसनीय है। अगले साल जो बजट आयेगा उसमें इस सरकार का आर्थिक दर्शन और स्पष्ट होगा ये उम्मीद की जा सकती है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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