Wednesday, 1 January 2025

हर हाल में साथ रहे मध्यम वर्ग की उपेक्षा उचित नहीं


21 वीं सदी का 25 वां साल आज से शुरू हो रहा है। बीते 24 वर्षों का सफर बेहद उतार -  चढ़ाव भरा रहा। देश नये - नये अनुभवों से गुजरा। जिनमें सुखद और दुखद दोनों रहे। कोरोना जैसी महामारी के सामने समूची  मानवता असहाय खड़ी नजर आई।  बड़ी आर्थिक महाशक्तियाँ भी उस संकट का सामना करने में विफल नजर आईं। जिन देशों की स्वास्थ्य सेवाएं वैश्विक स्तर पर श्रेष्ठतम मानी जाती थीं उनमें लाशों के ढेर लग गए। लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। ऐसे में भारत ने  एक अभूतपूर्व ऊर्जा के साथ उस संकट का मुकाबला सफलतापूर्वक किया। 140 करोड़ लोगों का निःशुल्क टीकाकरण  साधारण कार्य नहीं था । यही नहीं तो  दुनिया भर ने हमारे यहाँ बने टीके हासिल किये। अनेक गरीब देशों को करोड़ों टीके मुफ़्त देकर भारत ने उनकी सद्भावना अर्जित की। घरेलू मोर्चे पर 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न देकर अराजकता की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी। जरूरतमंदों के खाते में नकद राशि पहुँचाई गई। जब सब कुछ बंद था तब भारत के किसानों ने रिकार्ड उत्पादन कर देश को  मुसीबत में फंसने से बचाया। औद्योगिक उत्पादन भी  होता रहा जिससे जरूरी चीजों की आपूर्ति नहीं रुकी। हालांकि सब कुछ अच्छा हुआ, ऐसा नहीं है। कुछ विफलताएं भी देखने मिलीं किंतु कोरोना संकट  में एक नये भारत का उदय हुआ जो आत्मविश्वास से भरा है और जिसमें आत्मनिर्भर होने की लगन हिलोरें मार रही है। विश्व की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने का गौरव  हमारे साथ जुड़ा है। संकट के समय भी जनता ने अनुशासन का परिचय देते हुए दायित्वबोध  प्रदर्शित किया। चुनाव प्रक्रिया के जरिये प्रजातंत्र में  अखंड विश्वास व्यक्त  करते हुए भारत की जनता ने विश्व के समक्ष उदाहरण पेश किया। इन्हीं सबसे हमारी प्रतिष्ठा विश्व मंचों पर बढ़ी है। कोरोना के बाद रूस -  यूक्रेन और इजरायल - फिलीस्तीन संघर्ष में भारत की भूमिका ने कूटनीतिक जगत में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। देश के भीतर राजनीतिक स्थिरता होने से आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े फैसले हो रहे हैं। भारत दुनिया भर के निवेशकों  को आकर्षित करने में सफल हो रहा है। लोगों का जीवन स्तर निरंतर उठ रहा है। आयुष्मान योजना का विस्तार होने से सभी वर्गों के बुजुर्गों को निःशुल्क चिकित्सा का लाभ मिलना एक क्रांतिकारी कदम है। राजमार्गों सहित अधो - संरचना के अन्य प्रकल्पों पर तेजी से हो रहे काम विकास के जीवंत प्रतीक हैं। बड़े उद्योगों के अलावा लाखों स्टार्ट अप देश में उद्यमशीलता और स्व - रोजगार की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रमाण हैं। देश रक्षा सामग्री का आयात करने के साथ ही निर्यात भी कर रहा है। उच्च शिक्षा के नये केंद्र खुल रहे हैं। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम वैश्विक  प्रतिस्पर्धा में मुस्तैदी से खड़ा है। लेकिन अभी  बड़े - बड़े लक्ष्य हमें प्राप्त करना है। अनेक क्षेत्रों में अभी विकास की जरूरत है। भ्रष्टाचार लाइलाज  होता जा रहा है। चुनाव जीतने के लिए सरकारी खजाने को लुटाने की जो होड़ राजनीतिक दलों में मची है वह आर्थिक नियोजन पर भारी पड़े बिना नहीं रहेगी। इस पर चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय को ही बंदिश लगानी होगी क्योंकि राजनीतिक दलों से कोई अपेक्षा  फिजूल है। लेकिन एक बात और जिस पर आगामी बजट के पहले विमर्श होना चाहिए  वह है देश के विशाल मध्यम वर्ग के हितों का संरक्षण। ये वह तबका है जो समूची अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाये रखता है। यदि दुनिया भर के लिए भारत  एक बड़े बाजार के तौर पर उभरा है तो उसका श्रेय इसी वर्ग को है। विदेशों में बसे ज्यादातर  भारतीय मध्यम वर्ग के ही हैं जिनका  भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। लेकिन इस वर्ग को बजट में  कोई खास रियायत नहीं दी जाती। आयकर की व्यवस्था में बेशक उल्लेखनीय सुधार हुआ है किंतु उसके बोझ में जितनी कमी होनी चाहिए थी उतनी नहीं होने से मध्यम वर्ग में असंतोष है। उसके मन में ये भावना  घर बना चुकी है कि उद्योगपतियों के लिए तो केंद्र और राज्य सरकारें लाल कालीन बिछाती हैं वहीं गरीबों पर सौगातों की बरसात रुकने का नाम नहीं ले रही। लेकिन मध्यमवर्ग कर चुकाते - चुकाते परेशान है। ये देखते हुए केंद्र सरकार से अपेक्षा है आगामी बजट में आयकर छूट की सीमा में वृद्धि के साथ ही जीएसटी की दरें घटाई जाएं। इस बारे में ये बात समझने वाली है कि करों की कम दरें लोगों की क्रय शक्ति में जो वृद्धि करती हैं उसका लाभ अंततः सरकारी खजाने को ही होता है। मौजूदा केंद्र सरकार जिस भाजपा के नेतृत्व में चल रही है उसका जनाधार आज भले सभी वर्गों में फैल गया हो किंतु शुरुआत में  मध्यम वर्ग  ही उसका समर्थक रहा है। ऐसे में जब भाजपा के अच्छे दिन आये तब उसे चाहिए उस मध्यम वर्ग को उपेक्षित न करे  जिसने हर हाल में उसका साथ दिया।


-रवीन्द्र वाजपेयी

No comments:

Post a Comment