Monday, 13 January 2025

महाकुंभ : सनातन धर्म रूपी वट वृक्ष का विराट स्वरूप

  ्

प्रयागराज में गंगा - यमुना के पवित्र संगम पर आयोजित महाकुंभ आज से प्रारंभ हो गया। पहले दिन ही 1 करोड़ श्रद्धालु पुण्य लाभ हेतु पहुँचे जिनमें अनेक देशों से आये लोग भी हैं। खगोलीय दृष्टिकोण से  ग्रहों की वर्तमान  स्थिति 144 वर्षों बाद बनी जिसकी वजह से इस बार का कुम्भ विशेष माना जा रहा है। उ.प्र सरकार द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार लगभग सवा महीने चलने वाले इस आयोजन में 60 करोड़ लोगों के प्रयागराज पहुँचने की उम्मीद है। ठहरने के इंतजाम हर आर्थिक स्थिति के श्रद्धालुओं की क्षमतानुसार किये गए हैं। साधु, संन्यासियों और धर्मगुरुओं द्वारा संचालित अन्न क्षेत्र में प्रतिदिन लाखों लोगों को निःशुल्क भोजन प्रदान किया जावेगा । अनेक धार्मिक संस्थाएं एवं दानदाता भी श्रद्धालुओं के भोजन और आवास की व्यवस्था कर रहे हैं। समूचे मेला क्षेत्र की व्यवस्था इस तरह की गई है जिससे विशेष स्नान वाले दिनों में   करोड़ों लोगों के जमा होने पर भी किसी प्रकार की समस्या न खड़ी हो। उ.प्र की पुलिस और प्रशासन के लिए महाकुंभ बड़ी चुनौती है। देश से ही नहीं अपितु पूरी दुनिया से सनातन धर्म में आस्था रखने वाले  प्रयागराज में पुण्य स्नान हेतु आयेंगे । लेकिन उनके अलावा विभिन्न देशों के लाखों लोग महाकुंभ की भव्यता, भारत की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता का प्रत्यक्ष दर्शन करने पहुंचेंगे।   दुनियाँ भर के प्रबंधन संस्थानों के शोधार्थी महाकुंभ की व्यवस्था का अध्ययन करने आ चुके हैं। पूरे विश्व के समाचार माध्यम प्रयागराज में डेरा जमाए हुए हैं। महाकुंभ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके साथ जुड़े पौराणिक प्रसंग से अलग हटकर देखें तो भी यह आयोजन भारत की एकता और सनातन धर्म के प्रति जनमानस में आस्था का जीवंत प्रमाण है।  भाषा, प्रांत और जीवन शैली की विभिन्नताएं यहाँ आकर  वैसे ही विलुप्त हो जाती हैं जैसे गंगा - यमुना में आकर मिलने वाली  सरस्वती नदी अदृश्य है। यद्यपि कुछ लोग महाकुंभ को लेकर भी अपनी नकारात्मक सोच का परिचय देने से बाज नहीं आ रहे। भीम आर्मी के संस्थापक सांसद चंद्रशेखर आजाद का कहना है जिसने पाप किये हों वे महाकुंभ में डुबकी लगाने जाएं। कुंठित प्रवृत्ति के कुछ सनातन विरोधियों ने साधु - संतों के बारे में अनर्गल बातें प्रचारित करने की मुहिम छेड़ रखी है। भारत की प्राचीनता और आध्यात्मिक विचारधारा को कपोल -  कल्पित मानने वाले पूर्वाग्रही भी अपनी कुंठा निकालने में जुटे हुए हैं। जिन लोगों को हिन्दू और हिंदुत्व शब्द से ही चिढ़ है वे महाकुंभ के चलते चैन से नहीं सो सकेंगे क्योंकि बीते कुछ वर्षों में सनातन संस्कृति के प्रति आस्था में जो वृद्धि हुई उसके परिणामस्वरूप हिंदुत्व  केंद्र में आ गया है। ये कहना भी गलत नहीं है कि राजनीति हिंदुत्व समर्थक और विरोधी नामक दो ध्रुवों में बंट गई है। हालांकि सनातन और हिंदुत्व भारत की आत्मा हैं किंतु विगत तीन दशकों में जो स्वस्फूर्त उत्साह हिंदुत्व को लेकर देखने मिला वह 21 वीं सदी में भारत के स्वर्णिम भविष्य का शंखनाद है। हिन्दू समाज को जातियों के नाम पर विभाजित कर अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने वाली ताकतों को महाकुंभ आकर देखना  चाहिए कि सनातन संस्कृति हिन्दू समाज को किस तरह एकजुट रखने में सक्षम है। इस विराट समागम में  ऊंच - नीच, अगड़ा - पिछड़ा, अमीर - गरीब जैसे संबोधन गुम होकर रह जाते हैं। देश के कोने - कोने में भारत की आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत रखने में जुटे असंख्य साधु, संत, पंडित, पुरोहित, महंत, महामंडलेश्वर और जगद्गुरु के पद पर विराजमान विभूतियों का महाकुंभ में एकत्रीकरण सनातन धर्म रूपी वट वृक्ष के विराट स्वरूप को समूचे विश्व के समक्ष प्रस्तुत करता है। धर्म संसद के जरिये सनातन धर्म के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने की कार्य योजना भी महाकुंभ में तय की जाती है। इस वर्ष का महाकुंभ अनेक विशिष्टताओं को अपने आप में समेटे हुए है। वैश्विक परिस्थितियों में आ रहे तेज बदलाव और उनमें भारत की सक्रिय भूमिका के कारण पूरे विश्व में भारत के प्रति सम्मान बढ़ा है। दुनिया के हर हिस्से में भारतीय समुदाय की प्रभावशाली उपस्थिति उत्साहित करने वाली है। महाकुंभ में अप्रवासी भारतवंशी बड़ी संख्या में आने वाले हैं। उनके साथ वे बच्चे भी इसकी भव्यता का दर्शन करेंगे जिनका जन्म और परवरिश वहीं के माहौल में हुई। भारत को सपेरों और मदारियों का देश प्रचारित किये जाने वाले दिन अतीत की गर्त में समा चुके हैं। यह महाकुंभ 21 वीं सदी के उस भारत  से साक्षात्कार करवाएगा जो आधुनिक ज्ञान - विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलने के साथ ही अपनी मौलिकता से जुड़ा हुआ है और जिसको अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर गर्व है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

No comments:

Post a Comment