आजकल कुछ लोग यह कहते फिरते हैं कि भारत में लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा। लोकसभा चुनाव के पहले ये दुष्प्रचार भी किया गया कि नरेंद्र मोदी सत्ता में लौटे तो आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। वहीं मुसलमानों को ये कहकर भयभीत किया गया कि भारत हिन्दू राष्ट्र बन जावेगा। राम मंदिर में हुई प्राण - प्रतिष्ठा से भी समाज के उस वर्ग का रक्तचाप बढ़ा हुआ था जिसने कभी देश का हित नहीं चाहा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस को हिटलर का दलाल प्रचारित करने वाला यह वर्ग आजादी के बाद से ही आयातित विचारधारा को जनमानस पर थोपने में जुटा रहा लेकिन जब जनसमर्थन नहीं मिला तब मुख्य धारा की राजनीति से जुड़कर उसने अपनी कार्ययोजना लागू करने की चाल चली। सर्वविदित है भारत का अस्तित्व उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है जिसे कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास किया गया । विदेशी ताकतों के इशारे पर कतिपय बुद्धिजीवी देश का मनोबल तोड़ने में जुट गए और वह भी सरकारी संरक्षण में। धर्म , संस्कृति ,कला - साहित्य जैसे क्षेत्रों में भारतीयता के भाव को कमजोर करने का प्रयास पूरी ताकत से चलता रहा। लेकिन जैसे हर रात के बाद सुबह होती है , ठीक वैसे ही 2014 में जनता ने राष्ट्रवादी विचार के नेतृत्व को सत्ता सौंप दी। जिसके सुपरिणाम स्वरूप देश नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने लगा। राजनीतिक नेतृत्व से प्राप्त प्रोत्साहन से पश्चिमी चकाचौंध से मुक्त युवा पीढी़ भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा करने में जुट गई। और देखते - देखते भारत एक संभावनाओं से भरे देश के तौर पर उभरने लगा। विश्व की सबसे सक्षम युवा शक्ति हमारी ताकत है। बीते एक दशक में भारतीयता के प्रति हर वर्ग में आकर्षण बढ़ा है। विश्व शक्ति कहे जाने वाले देशों के पिछलग्गू होने वाला जमाना इतिहास बन गया। जिसका श्रेय राष्ट्रवादी नेतृत्व को ही है । और यही बात उन शक्तियों को नागवार गुजर रही है जिनका ध्येय भारतीयता के भाव को नष्ट करना था । 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने जो साहसिक निर्णय लिए उनके कारण उक्त ताकतें हाशिए पर खिसकती जा रही हैं। इसीलिए वे समय - समय पर जनता को भड़काकर अपनी कुंठा निकालती हैं किंतु अब जनता इनके दुष्प्रचार में नहीं फंसती। राम मंदिर में हुई प्राण - प्रतिष्ठा के अवसर पर भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रमाण पूरे विश्व को मिल गया। उसके कुछ महीनों बाद हुए आम चुनाव पर पूरे विश्व की नजरें टिकी थीं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को कमजोर करने में जुटी ताकतों ने उस दौरान राष्ट्रवादी विचारधारा वाली मोदी सरकार को अपदस्थ करने का हरसंभव प्रयास किया किंतु उनका दुष्प्रचार कारगर नहीं हो सका। दरअसल लोगों को ये भरोसा हो चुका था कि देश और लोकतंत्र भारतीयता के प्रति समर्पित नेतृत्व के हाथों में ही सुरक्षित रह सकता है। विगत एक दशक में देश ने अनेक ऊंची छलांगें लगाई हैं किंतु अभी बहुत कुछ करना बाकी है। सबसे बड़ी जरूरत उन तत्वों से सावधान रहने की है जो भारत को भीतर से कमजोर करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। यहाँ तक कि प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ की जहाँ पूरे विश्व में प्रशंसा हो रही है वहीं कुंठित लोगों की जमात उसमें खामियां निकालकर लोगों को भ्रमित करने में लगी है जिससे वे उसमें शामिल न हों। देश में निराशावादी माहौल बनाकर व्यवस्था के विरुद्ध भावनाएं भड़काने का जो षडयंत्र एक वर्ग रच रहा है उसका पर्दाफाश भारत के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए नितांत जरूरी है।
गणतंत्र हमारी संवैधानिक व्यवस्था के प्रति विश्वास का पर्व है। इस अवसर पर देश पर मंडरा रहे भीतरी और बाहरी संकटों के बारे में भी सोचा जाना चाहिए ताकि उन गलतियों को दोहराने से बचा जा सके जिनके कारण हमें सदियों तक गुलाम रहना पड़ा।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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