Thursday, 23 January 2025

एक साथ सारे मोर्चे खोलना ट्रम्प के लिए नुकसानदेह


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पदभार ग्रहण करते ही ताबड़तोड़ फैसले लेना शुरू कर दिया। चूंकि वे पूर्व में भी राष्ट्रपति रह चुके हैं अतः उन्हें अपने देश और दुनिया के मामलों की पर्याप्त जानकारी है। यही कारण है कि उन्होंने चुनाव जीतने के तत्काल बाद अपने इरादे स्पष्ट कर दिये थे। ट्रम्प की चिंताओं में अवैध रूप से आकर बस गए विदेशी नागरिक प्रमुख है। उनकी जो संतानें अमेरिका में पैदा हुईं उन्हें नागरिकता देने पर रोक लगाने की उनकी घोषणा से वहाँ हड़कंप मचा है। गर्भवती महिलाएं 20 फरवरी के पहले ही  समय पूर्व प्रसव के लिए अस्पतालों में जुटी हैं। ट्रम्प इस बात से भी परेशान हैं कि कैनेडा और  मेक्सिको आदि से बड़ी मात्रा में ड्रग्स तस्करी के जरिये लाये जाते हैं। उल्लेखनीय है दक्षिण अमेरिका के अनेक देश ड्रग्स के कारोबार के लिए कुख्यात हैं।  अमेरिका आकर काम करने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को H1b वीजा देने के संबंध में उनके द्वारा पूर्व में दिये गए संकेतों से भारत सहित तमाम उन देशों में चिंता थी जिनके लाखों लोग अमेरिका में कार्यरत हैं  वहीं बड़ी संख्या में नये लोग भी  वीजा प्राप्त करने प्रयासरत हैं। लेकिन कल उन्होंने स्पष्ट किया कि  अमेरिका की प्रगति के लिए प्रतिभाओं के आने की मौजूदा व्यवस्था यथावत रहेगी। कुछ और मामलों में भी उन्होंने कड़े कदम उठाने में जल्दबाजी से परहेज किया है किंतु जलवायु संरक्षण हेतु किये गए पेरिस समझौते से अलग होने का उनका निर्णय बेहद गैर जिम्मेदारना है। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि दुनिया भर में पर्यावरण को क्षति पहुंचाने में सबसे बड़ा हाथ विकसित देशों का ही है किंतु ये विकासशील देशों पर तो कार्बन उत्सर्जन घटाने हेतु दबाव डालते हैं किंतु खुद उस पर अमल करने से बचते हैं। उस दृष्टि से ट्रम्प का उक्त निर्णय विश्व जनमत की अवहेलना करने जैसा है और इस मुद्दे पर अमेरिका पूरी दुनिया के निशाने पर आ जाएगा। इसी तरह पनामा नहर का नियंत्रण वापस लेने के उनके इरादे ने भी तनाव की आशंका बढ़ा दी है। 1999 में अमेरिका ने इस समुद्री मार्ग का नियंत्रण पनामा नामक देश को ही सौंप दिया था किंतु ट्रम्प का कहना है कि इसकी वजह से अमेरिकी हित प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि इसके पीछे असली कारण इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियां हैं। लेकिन यदि ट्रम्प ने पनामा नहर पर कब्जे की जिद नहीं छोड़ी तो यह यूक्रेन और रूस जैसी जंग का कारण बन जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। स्मरणीय है नहर का संचालन मिलने के बाद से पनामा और अमेरिका के रिश्ते बड़े ही मधुर हो चले थे। लेकिन चीन जिस तरह से इस अंचल में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है उससे अमेरिका सशंकित है। पनामा नहर सामरिक और आर्थिक दृष्टि से स्वेज नहर जैसी ही महत्वपूर्ण है। वैसे भी ज्यादातर दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ उसके रिश्ते अच्छे नहीं हैं। ऐसे में ट्रम्प का सख्त रवैया विश्व शान्ति के लिए खतरा बन सकता है। इसी तरह उनका ब्रिक्स देशों के सामान पर ड्यूटी बढ़ाने का फैसला अमेरिका के लिए भी उतनी ही समस्या बनेगा क्योंकि उसके उत्पाद भी इन देशों में निर्यात होते हैं। ध्यान देने वाली बात है कि जिस तरह अमेरिका द्वारा  चीन और रूस के प्रभाव के विरुद्ध मोर्चेबंदी की जाती है वैसी ही ये दोनों भी करते हैं। रूस के साथ तो ट्रम्प भले ही अच्छे रिश्ते बना लें किंतु चीन को दबाना उतना आसान नहीं होगा। l अमेरिका अपने हितों के बारे में सोचे ये उसका अधिकार है किंतु आज के विश्व में आत्मकेंद्रित होकर रहना किसी के लिए संभव नहीं रहा। चीन ने भी जब माओ युग के लौह आवरण को हटाकर दुनिया से रिश्ते बनाये तभी उसे विश्व शक्ति के रूप में मान्यता मिली। और ये भी कि अब यूरोप के देशों में भी अमेरिकी प्रभुत्व से मुक्ति की भावना तेजी से बढ़ रही है। ट्रम्प की आक्रामक नीतियों ने नव अमेरिकी राष्ट्रवाद को बढ़ावा तो दे दिया किंतु चुनाव के दौरान पैदा किया गया उन्माद सत्ता में आने के बाद ठंडा पड़ना स्वाभाविक है। ट्रम्प ने नागरिकता संबंधी जो बंदिश लगाई उसका अमेरिका के 20 राज्यों में ही विरोध शुरू हो गया। असल में अब उनके सामने अगला चुनाव हारने का भय नहीं है क्योंकि अमेरिका में दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बना जा सकता। लेकिन वे ज्यादा उड़ेंगे तो जल्द ही उनकी पार्टी में ही विरोध के स्वर उठे बिना नहीं रहेंगे। ट्रम्प को पड़ोसी कैनेडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के अंजाम से सबक लेना चाहिए जो अपने अड़ियलपन की वजह से अपनी ही पार्टी द्वारा तिरस्कृत कर दिये गए। ट्रम्प को ये नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका में पूरी दुनिया के लोग आकर नागरिक बन चुके हैं जिनका राजनीति और अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त नियंत्रण है। इसीलिए उनकी प्रारंभिक अकड़ ज्यादा दिनों तक जारी रहेगी इसमें संदेह है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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