दिल्ली विधानसभा चुनाव दिन ब दिन जटिल होता जा रहा है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच तो सांप और नेवले जैसा रिश्ता शुरू से रहा है किंतु इस बार कांग्रेस जिस तरह केजरीवाल एंड कं. पर चढ़ बैठ रही है , वह अभूतपूर्व है क्योंकि ज्यादा वक्त नहीं बीता जब कांग्रेस की शिकायत पर उजागर हुए शराब घोटाले में गिरफ्तार मनीष सिसौदिया और अरविंद केजरीवाल के बचाव में कांग्रेस से जुड़े वरिष्ट अधिवक्ता अदालत में पैरवी करते देखे जा सकते थे। इसी तरह जो अरविंद केजरीवाल कभी सोनिया गाँधी और राहुल को जेल पहुंचाने का दंभ भरते थे , वे नेशनल हेराल्ड प्रकरण में उनको पूछताछ हेतु बुलाये जाने पर केंद्र सरकार को घेरने में लगे रहे। जब श्री केजरीवाल जेल में बंद हुए तब राजधानी में आयोजित विपक्ष की साझा रैली में सोनिया जी के साथ मंच पर उनकी पत्नी सुनीता बैठी नजर आईं। इसीलिए इस चुनाव में कांग्रेस द्वारा आम आदमी पार्टी पर आरोपों की जो बौछार हो रही है उससे भाजपा के खेमे में जबरदस्त राहत का माहौल है। आम आदमी पार्टी के तीन बड़े नेता श्री केजरीवाल, श्री सिसौदिया और मुख्यमंत्री आतिशी अपने - अपने निर्वाचन क्षेत्र में फंसे होने से अन्य सीटों पर ज्यादा प्रचार नहीं कर पा रहे। दलित और मुस्लिम मतों में जहाँ कांग्रेस सेंध लगाने में जुटी है वहीं भाजपा अपने परंपरागत मध्यमवर्गीय समर्थकों को अपने साथ खींचने के लिए रणनीति बना रही है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि केजरीवाल सरकार की योजनाओं से उपकृत लाभार्थी वर्ग भी इस बार उनसे दूर खिसकता दिखाई दे रहा है। वहीं भाजपा हिंदुत्व की भावना समाज के निचले तबके में फैलाने में कामयाब होती लग रही है। मुल्ला - मौलवियों को प्रति माह वित्तीय सहायता दिये जाने से हिन्दू मंदिरों के पुजारी केजरीवाल सरकार से नाराज थे। उनको खुश करने के लिए आम आदमी पार्टी ने 18 हजार रु.हर माह देने का वायदा कर दिया। गुरुद्वारों के ग्रंथी भी इस योजना में शामिल होंगे। लेकिन दिल्ली के हजारों पुजारी उनके संपर्क में आने वाले श्रद्धालुओं को सनातन का वास्ता देकर भाजपा का समर्थन करने हेतु प्रेरित कर रहे हैं। इस सबसे आम आदमी पार्टी परेशान है। ईमानदारी का उसका दावा असर खो चुका है। यमुना की गंदगी और खराब सड़कें बड़ा मुद्दा बन गया है। हाल ही में श्री केजरीवाल ने करों के बोझ (टैक्स टैररिज्म ) पर भाजपा को घेरने का दाँव चला । राजधानी में रहने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए आयकर बड़ी समस्या है। श्री केजरीवाल की नई दिल्ली सीट में बड़ी संख्या मतदाता केंद्रीय कर्मचारियों की होने से यह निश्चित रूप से बड़ा मुद्दा है। खबर है भाजपा ने इससे निपटने की पूरी तैयारी कर ली है। आगामी 1 फरवरी को केंद्रीय बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रु. किये जाने की अटकलें उच्च स्तरीय राजनीतिक क्षेत्रों में तेजी से लगाई जा रही हैं। यदि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वाकई ऐसा कर दिया तब उसका असर 5 फरवरी को होने वाले मतदान पर पड़ना अवश्यंभावी है। आम आदमी पार्टी इस खबर से भयभीत है क्योंकि आयकर छूट की सीमा में वृद्धि से नौकरपेशा के साथ मध्यम वर्गीय व्यवसायी भी फायदे में होंगे और चुनाव भाजपा के पक्ष में काफी हद तक घूम जायेगा। काँग्रेस के लिए तो और बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। यद्यपि पुख्ता भविष्यवाणी करना तो किसी के लिए संभव नहीं रहा किंतु इतना जरूर कहा जा सकता है कि अगर ताजा स्थिति कायम रही तब तो आम आदमी पार्टी के हाथ से सत्ता खिसकने पर आश्चर्य नहीं होगा। कांग्रेस का लक्ष्य तो हरियाणा के चुनाव में आम आदमी पार्टी द्वारा अपने प्रत्याशी उतारे जाने से हुए नुकसान का बदला लेना है किंतु भाजपा इस चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति के सभी अस्त्र - शस्त्र उपयोग कर रही है। यदि केंद्रीय बजट में आयकर छूट की सीमा 10 लाख रु. सालाना हो गई तब दिल्ली में भी हरियाणा और महाराष्ट्र सरीखे नतीजे आ जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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