प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या अनियंत्रित हो जाने से हुई धक्का - मुक्की में बीती रात लगभग डेढ़ - दो बजे 20 लोगों के मारे जाने की खबर आने के बाद लोगों के प्रयागराज आगमन पर रोक लगा दी गई। प्रारंभिक कारणों में अफवाह फैलना माना जा रहा है। गत दिवस लगभग 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। आज 10 करोड़ लोगों का अनुमान था जो उक्त हादसे के बाद कुछ कम हो सकता है किंतु अभी बसंत पंचमी का अमृत स्नान शेष है और उस दिन भी जनसैलाब उमड़ेगा। 144 साल बाद बने ग्रह - नक्षत्रों के योग के कारण यह महाकुंभ माना गया जिसकी वजह से पूरे विश्व भर से न सिर्फ सनातन धर्मी अपितु अन्य धर्मों में आस्था रखने वाले भी प्रयागराज पहुँच रहे हैं। आज की संख्या मिलाकर 20 करोड़ लोग स्नान कर चुके होंगे। महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस आयोजन में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। उ.प्र सरकार ने इस महाकुंभ के लिए जबरदस्त व्यवस्थाएं कर रखी हैं। मकर संक्रांति के प्रथम अमृत स्नान पर ही जो जनसैलाब उमड़ पड़ा उसने आगे का संकेत दे दिया था। समाचार माध्यमों के जरिये हो रहे प्रचार के कारण महाकुंभ वैश्विक आयोजन बन गया। जिस प्रकार की विस्तृत जानकारी प्रसारित की जा रही है उसने प्रयागराज आने के प्रति लोगों को प्रेरित और प्रोत्साहित किया । परिणामस्वरूप भीड़ उम्मीद से अधिक होती गई। इसीलिए दो - तीन दिन पहले से ही प्रयागराज में आने वाले वाहनों को रोक दिया गया जिसकी वजह से चारों तरफ से आने वाले रास्तों पर 10 - 15 कि.मी तक जाम की स्थिति है। महाकुंभ में इस बार अब तक की जो सबसे बड़ी और अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है उसकी सराहना भी हो रही है किंतु आस्था के अतिरेक से देश में हर वर्ष सैकड़ों लोग अपनी जान गँवा बैठते हैं। प्रयागराज में तो करोड़ों लोग जमा हैं किंतु अनेक मंदिरों में किसी बड़े त्यौहार के अवसर पर दर्शनार्थ उमड़ी भीड़ में धक्का - मुक्की से दर्जनों लोग मौत का शिकार बन जाते हैं। वैसे कुंभ मेले में पहले भी हादसे हुए हैं । 1954 में प्रयागराज कुंभ में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू और राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद के आगमन पर हुई धक्का - मुक्की में भी 1 हजार से ज्यादा मौतें हुई थीं। हरिद्वार के कुंभ में भी एक बार ऐसा हो चुका है। इन दुर्घटनाओं से सबक लेकर आगामी आयोजनों में सुव्यवस्था और सुरक्षा पर काफी ध्यान दिया जाने लगा। वर्तमान महाकुंभ तो अपने विराट स्वरूप की वजह से वैश्विक आकर्षण उत्पन्न करने में सफल रहा। संचार और आवागमन के सीमित साधनों में वृद्धि की वजह से लोगों का आगमन बढ़ता ही जा रहा है। विशेष रेलगाड़ियों और हवाई सेवा के साथ ही निजी वाहनों से लोग आते हैं। पिछले कुछ दिनों से ही ये लगने लगा था कि मौनी अमावस्या पर भीड़ पिछले रिकार्ड तोड़ देगी। इसीलिए लोगों को रोका जाने लगा किंतु हमारे देश में आस्था के उत्साह में व्यवस्था को भंग करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। प्रयागराज में जमा लोग इंतजाम पर भारी पड़ने लगे और बीती रात वही हुआ। यदि मृतकों की जो संख्या बताई गई वह सही है तब तो गनीमत है क्योंकि इतने विशाल जनसागर के कारण ऐसी घटना कहीं भी हो सकती है किंतु ऐसे आयोजनों में शामिल होने वालों से भी अपेक्षा होती है कि वे व्यवस्था का पालन करते हुए आत्मानुशासन का परिचय दें क्योंकि धक्का - मुक्की जैसी घटनाओं का दुष्परिणाम उन्हीं को भोगना पड़ता है। जिन श्रद्धालुओं की इस हादसे में मौत हुई उनके परिजनों के लिए ये महाकुंभ कड़वी यादें छोड़ गया। अभी महाकुंभ आधा ही संपन्न हुआ है। आने वाले दिनों में आयोजकों द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं में हर श्रद्धालु को ईमानदारी से सहयोग करना चाहिए क्योंकि यह महाकुंभ केवल उ.प्र सरकार और प्रशासन के प्रबंधन कौशल ही नहीं अपितु सनातन में आस्था रखने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की अनुशासनप्रियता का परिचय भी समूचे विश्व को देगा। इस हादसे से सबक लेते हुए श्रद्धालुओं को सभी प्रकार की सावधनियाँ रखते हुए ही वहाँ जाने का कार्यक्रम बनाना चाहिए। छोटे बच्चों और अति वृद्धजनों को भी इस महाकुंभ में ले जाने से परहेज करें। सुनी - सुनाई जानकारी के आधार पर प्रयागराज पहुँच जाना और फिर वहाँ जाकर भोजन - आवास की शिकायत करने की प्रवृत्ति उचित नहीं लगती। सुरक्षा ,सफाई , चिकित्सा, यातायात आदि की व्यवस्था देख रहे अमले को कटघरे में खड़ा करना आसान है। लेकिन श्रद्धालुओं को अपना दोष भी देखना चाहिए। किसी भी बड़े आयोजन में विघ्नकर्ता अपनी कारस्तानी से बाज नहीं आते। इस हादसे का प्रारंभिक कारण अफवाह ही बताया गया। हो सकता है और कोई वजह हो किंतु अब बचे हुए समय में महाकुंभ निर्विघ्न संपन्न हो इसके लिए श्रद्धालुओं को पूर्ण अनुशासन का परिचय देना होगा। जिन श्रद्धालुओं को गत रात्रि अपने प्राण गँवाना पड़े उन्हें ईश्वर सद्गति प्रदान करे और महाकुंभ का शेष आयोजन योजनानुसार संपन्न हो यही प्रभु से प्रार्थना है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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