नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब उनके समक्ष राज्य परिवहन बस सेवा बंद करने का प्रस्ताव आया। उसका कारण लगातार हो रहा घाटा बताया गया। तब उन्होंने अधिकारियों को बुलाकर सरकार संचालित बस सेवा को पेशेवर बनाते हुए निजी क्षेत्र की परिवहन कंपनियों से प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने का निर्देश दिया। उनके निर्देशों के अनुसार कार्य हुआ और कुछ वर्षो बाद ही सरकारी बस सेवा लाभ अर्जित करने की स्थिति में आ गई। देश के अनेक राज्यों में शासन संचालित सार्वजनिक परिवहन सेवा सफलता पूर्वक न सिर्फ चल ही रही हैं बल्कि निजी बस संचालकों से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी कर रही हैं। इस चर्चा की वजह बना म.प्र सरकार का वह निर्णय जिसके अंतर्गत मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू की जा रही है। इसके लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा में अलग - अलग होल्डिंग कंपनियां बनाई जाएंगी। बजट में इस हेतु प्रावधान किये जाने के बाद गत दिवस प्रदेश मंत्रीमंडल ने उक्त निर्णय लिया। 22 साल पहले राज्य परिवहन सेवा बंद कर दी गई थी। उसका कारण बढ़ता घाटा था। राज्य परिवहन निगम भ्रष्टाचार का पर्याय माना जाता था। उसकी बसों की स्थिति बेहद कंडम हो चली थी। तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने उसे बंद करने का फैसला किया जिसका उसके कर्मचारियों ने खूब विरोध किया। उसके बाद सार्वजनिक परिवहन सेवा निजी क्षेत्र के लिए खोल दी गई । देखते - देखते हजारों बसें प्रदेश के सभी क्षेत्रों में दिखाई देने लगीं। प्रमुख मार्गों पर तो वातानुकूलित और स्लीपर बसों की बाढ़ आ गई है। प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर अन्य राज्यों तक बस सेवा उपलब्ध करवा रहे हैं। यद्यपि छोटे शहरों तक चलाई जा रही बसों की स्थिति अच्छी नहीं है। ओवरलोडिंग के कारण दुर्घटनाएं भी खूब होती हैं। सरकार के परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण निजी ऑपरेटर मनमानी करते हैं। और फिर उनकी रुचि फायदे वाले मार्गों पर चलने की ज्यादा होती है। बावजूद इसके निजी क्षेत्र की बस सेवा यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के कारण सफल हुई। समयबद्धता का भी ध्यान उनमें रखा जाता है। ये देखते हुए म.प्र सरकार का उक्त निर्णय साहसिक कहा जायेगा क्योंकि निजी क्षेत्र से मुकाबला करना आसान नहीं होगा। सबसे बड़ी बात सरकार के पास आर्थिक संसाधनों का अभाव होने से वह इस व्यवसाय में कितना निवेश कर पायेगी ये विचारणीय है। दूसरी बात ये है कि सरकारी बसें जिन कर्मचारियों और अधिकारियों के भरोसे चलेंगी वे निजी क्षेत्र का मुकाबला करने के बजाय उसके साथ गठजोड़ कर पुराना खेल करने लग जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा। इसीलिए सरकार को अपनी परिवहन सेवा शुरू करने से पहले उन कारणों को दूर करने की सावधानी बरतनी होगी जिनके चलते दो दशक पहले राज्य परिवहन बंद करना पड़ा। हालांकि नई कंपनियों को लेकर जो बातें कही जा रही हैं यदि उन पर अमल किया जाए तो निश्चित रूप से उसके सुखद परिणाम आ सकते हैं। लेकिन इस बारे में पेशेवर विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही आगे बढ़ना सही होगा। जो जानकारी आई है उसके अनुसार नई परिवहन सेवा में कार्गो जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी। ऑन लाइन बुकिंग का प्रावधान भी किया जाना प्रस्तावित है जिसे निजी परिवहन सेवाओं से भी जोड़ा जाएगा। निश्चित तौर पर राज्य सरकार ने पुरानी गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का सोचा होगा। हालांकि इसके लिए प्रशासनिक ढांचे के अलावा नया इंफ्रा स्ट्रक्चर तैयार करने में भी समय और संसाधन लगेंगे। प्रदेश सरकार अनेक क्षेत्रों में जिस तरह से नवाचार कर रही है उसे देखते हुए सार्वजनिक परिवहन सेवा में निजी क्षेत्र के एकाधिकार का मुकाबला बड़ी चुनौती है। लेकिन यदि नीति स्पष्ट और नीयत साफ हो तो कामयाबी में कोई संदेह नहीं रह जाता। डॉ. मोहन यादव सरकार प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए जिस उत्साह के साथ जुटी हुई है वह उसकी प्रतिबद्धता का परिचायक है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली बस सेवा प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सेवा में सुधार का कारण बनेगी । और जिन गलतियों के कारण 22 वर्ष पूर्व उसे बंद किया गया उन्हें दोहराने से बचा जाएगा।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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