Tuesday, 15 April 2025

मुस्लिम तुष्टीकरण ने प. बंगाल में बना दिया लघु बांग्ला देश


ममता बैनर्जी द्वारा प.बंगाल में नया वक़्फ़ कानून लागू नहीं करने की  घोषणा के बाद भी राज्य के मुर्शिदाबाद इलाके में मुस्लिम समुदाय हिंसा पर उतर आया। हिंदुओं के घरों और प्रतिष्ठानों पर हमले, लूटपाट और महिलाओं की अस्मत लूटने जैसी वारदातों के परिणामस्वरूप सैकड़ों हिन्दू परिवार पड़ोसी जिलों में भागने  मजबूर हो गए। इस घटना से नाराज उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात करने का आदेश देते हुए टिप्पणी की कि वह चुपचाप नहीं बैठ सकता क्योंकि राज्य पुलिस उपद्रव रोकने में असफल रही । सच्चाई यही है कि इस हिंसा के लिए ममता खुद जिम्मेदार हैं क्योंकि उन्होंने  इतना अधिक मुस्लिम तुष्टीकरण किया कि ये समुदाय पूरी तरह अराजक हो गया। राज्य का  राजनीतिक संतुलन भी बुरी तरह बिगड़ चुका है। 27 फीसदी मुस्लिम आबादी के कारण 100 विधानसभा और 13 लोकसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में आ गए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में बहरामपुर में ये बात प्रमाणित हो गई। इस सीट से लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी 1999 से जीतते आ रहे थे। 52 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर कभी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं जीत पाया था। लेकिन 2024 में वह परंपरा टूट गई। अधीर रंजन से निजी खुन्नस के चलते ममता ने गुजरात के क्रिकेटर युसुफ पठान को उम्मीदवार बना दिया और मुस्लिम ध्रुवीकरण के कारण वे जीत गए। ममता की राजनीतिक सफलता में मुस्लिम समुदाय का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है। एक जमाना था जब वामपंथी सरकार ने भी मुस्लिमों को खुश रखते हुए अपना वर्चस्व बनाये रखा। लेकिन तब उसमें से कुछ हिस्सा कांग्रेस भी बटोर लिया करती थी। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि प. बंगाल में मुस्लिम आबादी बढ़ाने के लिए वामपंथी सरकार सर्वाधिक कसूरवार है जिसने  बांग्ला देशी घुसपैठियों के  राशन कार्ड बनवाकर उनके नाम मतदाता सूची में जुड़वा दिये। कांग्रेस भी चूंकि तुष्टीकरण में लिप्त थी इसलिए वह खामोश होकर देखती रही। वैसे भी वह वामपंथी सरकार की बी टीम के तौर पर बदनाम थी और इसी कारण ममता ने उससे नाता तोड़ तृणमूल कांग्रेस की स्थापना कर वामपंथियों के खिलाफ कमर कसी। जनता चूंकि वामपंथी गुंडों से त्रस्त हो चुकी थी लिहाजा उसने ममता को सत्ता में बिठाकर असंभव को संभव कर दिखाया। लेकिन जल्द ही वे भी उसी रास्ते पर चलने लगीं। जिन असामाजिक तत्वों को चुनाव में वामपंथी सरकार के लिए गुंडागर्दी के बदले लूटपाट का अघोषित लाइसेंस मिल जाया करता था, वे सत्ता बदलते ही तृणमूल में आकर वही सब ममता के लिए करने लग गए। दूसरी तरफ ममता ने  वामपंथियों को भी पीछे छोड़ते हुए बांग्लादेश के अलावा म्यांमार से आये रोहिंग्या मुसलमानों को मतदाता बनाकर  अपनी स्थिति मजबूत कर ली और बदले में उन्हें स्वच्छंद हो जाने की छूट दे दी। । मुर्शिदाबाद में जो हालात बने ये नई बात नहीं है। संदेशखाली में मुस्लिम अपराधी सरगना के अत्याचार लोग भूले नहीं हैं। प. बंगाल के सैकड़ों कस्बे और गाँव बांग्ला देश जैसा  एहसास करवाते हैं। मुर्शिदाबाद में वक़्फ़ कानून के विरोध में मुस्लिम समुदाय ने जिस तरह की नीचता की वैसी ही बांग्ला देश में शेख हसीना के सत्ता पलट के बाद हिंदुओं के साथ हुई थी। जो समाचार आ रहे हैं उनके अनुसार मुर्शिदाबाद में हिंदुओं  पर हुए हमलों के तार बांग्ला देश से जुड़े हुए हैं। लेकिन बजाय कड़ी कारवाई करने के मुख्यमंत्री केवल नकली आँसू बहा रही हैं। यदि यही हादसा मुस्लिमों के साथ हुआ होता तो अभी तक देश भर की सेकुलर जमात के पेट में मरोड़ होने लगता और धड़ाधड़ नेताओं के दौरे होने लगते।  उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी के बाद भी ममता सरकार  जिस प्रकार उदासीन रही उससे स्पष्ट हो गया कि आगामी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए वे  बिना ये सोचे मुस्लिमों को पूरी तरह अराजक होने की छूट देने पर आमादा हैं कि पड़ोसी बांग्ला देश इससे लाभ उठाकर भारत में गड़बड़ी फैलाने से बाज नहीं आयेगा। उल्लेखनीय है संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने खुलकर आरोप लगाया था कि घुसपैठ रोकने के लिए बांग्ला देश सीमा पर तार की बाड़ ( फेंसिंग) लगाने का काम जिस 400 कि.मी क्षेत्र में बचा है वहाँ ममता सरकार केन्द्र को भूमि उपलब्ध नहीं करवा रही जबकि इसके लिए  अनेक स्मरण पत्र दिए जा चुके हैं। ममता या उनकी सरकार की ओर से इस आरोप का खंडन नहीं किया जाना उसकी पुष्टि करने पर्याप्त है। राज्य के वर्तमान हालात देखते हुए राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग हो रही है। लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि कांग्रेस और वामपंथी दल संदेशखाली कांड के विरोध में तो ममता सरकार के विरुद्ध खुलकर मैदान में आ गए थे किंतु मुर्शिदाबाद हिंसा पर इसलिए मुँह में दही जमाये बैठे हैं क्योंकि हिंसा वक़्फ़ कानून के विरोध में हो रही है। इस प्रकार राज्य  की वर्तमान स्थिति के लिए ममता के साथ ये पार्टियां भी बराबर की दोषी हैं जिन्होंने प. बंगाल में  लघु बांग्ला देश बना दिया। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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