Tuesday, 29 April 2025

ऐसा कुछ न कहें जिससे दुश्मन का मनोबल बढ़े


पहलगाम में  आतंकवादी हमले के बाद हुई सर्वदलीय बैठक में जिस तरह की आम सहमति बनी  और सभी दलों ने सरकार को पूर्ण  समर्थन का आश्वासन दिया उसका सकारात्मक संदेश पूरे देश में गया। वैसे इसमें नया कुछ भी नहीं है। जब - जब देश पर संकट आया है राजनीतिक मतभेद भुलाकर सभी पार्टियों ने सरकार को देशहित में जरूरी फैसले लेने के लिए खुला हाथ दिया। लेकिन मौजूदा संकट के समय कुछ राजनेताओं के गैर जिम्मेदाराना बयानों ने  राजनीतिक कटुता पैदा की। सोशल मीडिया पर तो कुछ लोग दिन - रात सरकार को घेरने के प्रयास में देश का मनोबल गिराने में लगे हैं। पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा धर्म पूछकर किये गए कत्लेआम  को झुठलाने के लिए एड़ी - चोटी का जोर लगाया जा रहा है। कश्मीरी मुसलमानों की तारीफ में अतिशयोक्ति को भी पीछे छोड़ने की प्रतिस्पर्धा चल पड़ी है। कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों से भी ये साफ झलका कि सीमा पर मंडरा रहे संकट के बावजूद देश में एकता का अभाव है। हालांकि उनमें से कुछ अपनी बदजुबानी के लिए कुख्यात हैं और कांग्रेस उनकी वजह से काफी नुकसान भी सह चुकी है। शायद इसीलिए इस बार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सभी कांग्रेस जनों को सख्त निर्देश दिये हैं कि वे पार्टी लाइन से  हटकर कोई बयानबाजी न करें। ये भी कहा गया है कि जिन नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा वह उनकी निजी राय है जिससे पार्टी सहमत नहीं है। पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा की गई हत्याओं के बाद पाकिस्तान के विरुद्ध जवाबी कारवाई करने के लिए पार्टी ने सरकार को पूरी तरह समर्थन देने की बात सर्वदलीय बैठक में ही कह दी थी। इसलिए कांग्रेसजन पहलगाम मुद्दे पर मुँह बंद रखें। हालांकि कुछ अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने सर्वदलीय बैठक के बाद भी राजनीतिक लाभ लेने के लिए अवांछित बयान दिये किंतु कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी होने के साथ ही संसद के दोनों सदनों में मान्यता प्राप्त विपक्षी दल होने के कारण मुख्य धारा में है। इसलिये उससे ज्यादा जिम्मेदारी की अपेक्षा रहती है। लेकिन उसके कुछ नेता हमेशा कुछ न कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिससे पूरी पार्टी को शर्मिंदा होना पड़ता है। अच्छा हुआ इस बार जल्दी कदम उठा लिया गया वरना कतिपय नेताओं ने पुरानी गलतियों को दोहराकर पार्टी की फजीहत करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इनमें एक तो ऐसे हैं जो अपनी बदजुबानी के चलते पार्टी से निलंबित भी हो चुके हैं। बहरहाल कांग्रेस पार्टी ने जो हिदायत दी वह समयानुकूल और देश हित में है। अच्छा होगा यदि सभी राजनीतिक दल ऐसे ही निर्देश अपने लोगों को दें। सत्ताधारी भाजपा को भी चाहिए वह अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को दो टूक समझाइश दे कि स्थिति से निपटने का काम सरकार और सेना का है। ऐसे अवसरों पर जनता के मन में जोश जगाना बुरा नहीं है किंतु बढ़ा - चढ़ाकर बातें करने से कोई लाभ नहीं होता। यदि विपक्ष से कोई आपत्तिजनक बात कहता भी है तो उसका जवाब देने के लिए अधिकृत व्यक्ति ही सामने आये। सोशल मीडिया में बैठे सूरमाओं से भी अपेक्षा है वे जंग को सीमा तक ही सीमित रखें। खुद विषय की जानकारी नहीं होने के बाद भी कहीं से नकल करते हुए तथ्यहीन सामग्री परोसने से देश का अंदरूनी वातावरण खराब हो रहा है। एक वर्ग विशेष तो सरकार की आड़ में देश का विरोध करने की हद तक जा रहा है। जो कदम सरकार द्वारा उठाये गए उनकी सफलता पर पाकिस्तान से ज्यादा संदेह तो सोशल मीडिया पर सक्रिय कतिपय तत्व व्यक्त कर रहे हैं। ये स्थिति किसी भी तरह से अच्छी नहीं कही जा सकती। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है किंतु जब राष्ट्र पर संकट हो तब सभी को एक स्वर में बात करनी चाहिए क्योंकि इंटरनेट के युग में  कोई भी  बात पलक झपकते ही दुनिया भर में  फैल जाती है। ये देखते हुए न सिर्फ राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को बल्कि सोशल मीडिया में सक्रिय वर्ग को भी जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए क्योंकि हमारे आपसी मतभेद  शत्रु राष्ट्र के लिए रक्षा कवच बन जाये ये अच्छा नहीं है। सिंधु जल संधि को निलंबित किये जाने के फैसले के विरुद्ध पाकिस्तान भारत को धमकियाँ दे तो बात समझ में आती है किंतु जब हमारे देश में ही अपनी ताकत पर सवाल उठेंगे तो उससे दुश्मन को ही लाभ होगा। इसलिए राजनेताओं के साथ ही देश के हर नागरिक को इस समय ऐसी कोई बात नहीं कहनी चाहिए जिससे हमारी एकता पर प्रश्न चिन्ह लगे। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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