Wednesday, 2 April 2025

सरकार की कमाई में वृद्धि का लाभ जनता को भी मिले

वित्तीय वर्ष 2024 - 25 की समाप्ति पर जीएसटी वसूली के मासिक आंकड़े ने पिछले सभी रिकार्ड तोड़ दिये। मार्च में 1.96 लाख करोड़ रु. जीएसटी संग्रह अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार का प्रमाण है । वैश्विक उथल - पुथल के बावजूद इस तरह के आंकड़े प्रभावित करते हैं। पेट्रोल , डीजल और बिजली के अलावा ऑटोमोबाइल उद्योग में भी बीते कारोबारी साल अच्छी खपत रही। इसी तरह मकानों की खरीदी में वृद्धि से  रियलिटी सेक्टर में भी उत्साह रहा। आयकर सहित अन्य प्रत्यक्ष करों की वसूली से भी सरकारी खजाना लबालब हुआ। निर्यात में वृद्धि जहाँ उत्साहवर्धक रही वहीँ कृषि क्षेत्र भी  उत्पादन में वृद्धि करते हुए योगदान देता आ रहा है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने के बावजूद अन्न के भंडार भरे हुए हैं। करोड़ों गरीब लोगों को आयुष्मान भारत योजना 5 लाख तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध करवाने में सफल है। अब तो 70 वर्ष और ऊपर के सभी आय वर्ग के नागरिक भी इसके अंतर्गत आ गए हैं।   राजमार्ग , फ्लायओवर  पुल , हवाई अड्डे  और रेलवे स्टेशन का विकास भी हौसला बढ़ाने वाला है। नई परिवहन संस्कृति के  जन्म से टोल टेक्स से  आय बढ़ती ही जा रही है। घरेलू उड्डयन क्षेत्र में प्रगति का प्रमाण हवाई यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि है।  भारतीय रेलवे भी अपनी अधोसंरचना में सुधार करते हुए नई रेल लाइनें बिछाने के साथ ही पुराने पुलों के सुधार और  विद्युतीकरण के लंबित प्रकल्प तेजी से पूरे कर रही है। कश्मीर और उत्तर पूर्व के राज्यों तक रेल  पहुँचने से वहाँ विकास की संभावना बढ़ी है। आई.टी सेक्टर में हमारी वैश्विक उपस्थिति पहले से भी ज्यादा मजबूत हो गई है । आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस जैसे नये क्षेत्र में भी भारत विश्व के कदम से कदम मिलाकर चल रहा है । कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि कोरोना काल के पहले जो हालात थे उनसे बेहतर स्तर पर देश आ पहुंचा है |  लेकिन इसके साथ ही महंगाई वह नकारात्मक पक्ष है जिसकी वजह से आम जनता खुश होकर भी  परेशान है | कोरोना काल में  अकल्पनीय परेशानियों के बावजूद  जनता सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही | सरकार ने भी जितना बन सका किया लेकिन उसके बाद से दैनिक उपयोग में आने वाली चीजों के दाम जिस तरह बढ़ते जा रहे हैं उससे  घरेलू बजट गड़बड़ा गया है । यूक्रेन संकट के बाद इजरायल और हमास में जंग ने दुनिया को संकट में डाल दिया। रही - सही कसर पूरी कर दी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  के ऊलजलूल फैसलों ने। लेकिन भारत इस सबके बावजूद अपनी स्थिति मजबूत किये है तो उसका कारण राजनीतिक स्थिरता है। नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से नीतिगत स्पष्टता आई है।  नये साल के बजट में आयकर छूट की सीमा 12 लाख किये जाने से मध्यम वर्ग की नाराजगी काफी हद तक दूर हो सकी है। लेकिन महंगाई से लोगों में असंतोष है। हाल ही में सरकार ने अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जिस तरह बढ़ा दिया उसी तरह शेष  जनता को राहत देने के बारे में  गम्भीरता से सोचना चाहिए । गैर भाजपा सरकारें  भी महंगाई के मुद्दे पर कठघरे में खड़ी हैं   क्योंकि पेट्रोल – डीजल पर भारी – भरकम टैक्स लगाकर वे भी आम उपभोक्ता पर बोझ बढ़ाने से बाज नहीं आतीं । इसीलिए इन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाने के लिए कोई भी  तैयार नहीं है | हाल  ही में कुछ  राज्यों के चुनावों में भाजपा को जो सफलता मिली वह मतदाताओं की उदारता और व्यापक दृष्टिकोण का परिचायक है | लेकिन इसे स्थायी नहीं माना जा सकता ।  ऐसे में केंद्र सरकार को चाहिए कि वह गैर लाभार्थी वर्ग के लोगों  को भी राहत दे जिनकी बचत महंगाई  की भेंट चढ़ जाती है । जब तक सरकार के खजाने में आवक कम थी तब तक तो अपेक्षा करना अनुचित  था लेकिन जब जीएसटी की वसूली सर्वकालिक ऊंचाई को छूने लगी  है और आर्थिक मोर्चे से लगातार सुखद समाचार आ रहे हों तब महंगाई से हलाकान जनता के चेहरों पर मुस्कान लौटाने का प्रयास भी ईमानदारी से होना चाहिए । ये बात केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को ध्यान रखनी होगी कि उनकी जिम्मेदारी केवल उनके कर्मचारी ही नहीं बल्कि पूरी जनता है । नये वित्तीय वर्ष में जिस तरह आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर राहत दी गई वैसी ही  मेहरबानी जीएसटी की दरें घटाकर और पेट्रोल - डीजल को उसके अंतर्गत लाने के तौर पर की जानी चाहिये। इसी तरह जिन सड़कों की लागत वसूल हो चुकी है उनसे  टोल नाके तत्काल हटाया जाना जरूरी है। सरकार की कमाई बढ़ना अच्छी बात है  लेकिन उसके बदले में जनता को महंगाई मिले , ये बात खटकती है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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