पाकिस्तान के साथ जंग का आज चौथा दिन है। दोनों तरफ से आक्रमण और प्रत्याक्रमण का सिलसिला अनवरत जारी है। कल दिन में लगा था कि कुछ ढिलाई आई किंतु रात फिर धमाकों में गुजरी। यद्यपि अनेक संवाददाता जान जोखिम में डालकर सीमा के नजदीकी इलाकों से खबरें भेज रहे हैं लेकिन अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि सही स्थिति क्या है ? जो संकेत भारतीय सेना और सरकार के जिम्मेदार लोगों से मिल रहे हैं उनसे इतना जरूर कहा जा सकता है कि हमारा मनोबल काफी ऊंचा है तथा पाकिस्तान हमारी रणनीति में ही फंसा नजर आ रहा है। उसके हमले जिस तरह से बेअसर हो रहे हैं उससे वहाँ फौज और सरकार दोनों में बौखलाहट है। भारत द्वारा समाचार माध्यमों को जानकारी देने का दायित्व विदेश सचिव के साथ ही थल और वायुसेना की दो युवा महिला अधिकारियों को सौंपा जाना दर्शाता है कि उसका आत्मविश्वास कितना प्रबल है। दूसरी तरफ पाकिस्तान में मंत्री बेसिर - पैर के बयान देकर हँसी के पात्र बन रहे हैं। भारत में विपक्ष ने सरकार की नीति - रीति से मतभेदों के बावजूद आलोचना से परहेज करते हुए एकता का प्रदर्शन किया जबकि पाकिस्तान की संसद में विपक्ष प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विरुद्ध खुलकर बोल रहा है। एक सांसद ने तो उनको गीदड़ तक कह डाला। वहीं एक ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से बाहर निकालने की मांग करते हुए कह दिया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला वही कर सकते हैं। पाकिस्तानी फौज के कुछ अधिकारी अभी भी धमकी वाली भाषा बोल रहे हैं जबकि भारत ने शुरुआती संयम के बावजूद जब दुश्मन ने रिहायशी और सैन्य ठिकानों पर गोले दागे तब जाकर पाकिस्तान के सैन्य केंद्रों सहित अन्य लक्ष्यों पर हमले किये जिनसे शत्रु को काफी क्षति पहुँची है। सेना से जुड़े मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान की प्रतिरक्षा प्रणाली तहस - नहस हो जाने से भारतीय मिसाइलें अपने कार्य को पूरी सफलता के साथ कर पा रही हैं। ये बात सही है कि अभी तक दोनों देशों की थलसेनाएं अपनी सीमाओं में ही है। यद्यपि घुसपैठियों को भेजने की हरकत अभी भी उस तरफ से की जा रही है किंतु वे या तो सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ रहे हैं या फिर मारे जा रहे हैं। अभी तक भारत की तरफ से हवा - हवाई दावे नहीं किये गए क्योंकि विधिवत युद्ध घोषित नहीं हुआ। लेकिन पाकिस्तान जिस तरह के आसमानी दावे कर रहा है उन पर उसी के नागरिक विश्वास नहीं कर रहे। ये वहाँ के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के प्रति विश्वास के अभाव का प्रमाण है। वैसे हमारे देश में अभी भी कुछ लोगों ने अपना रवैया नहीं बदला जो सोशल मीडिया के जरिये सरकार और सेना पर अविश्वास करते हुए युद्ध के विरोध में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं। ये वही तबका है जो पहलगाम की घटना के बाद प्रधानमंत्री को युद्ध प्रारंभ करने के लिए ललकार रहा था किंतु जंग शुरू होते ही इस बात का मातम मनाने बैठ गया कि दोनों तरफ से मरने वाले इंसान हैं। पाकिस्तान के साथ बातचीत कर रिश्ते सुधारने की वकालत करने वाले इन्हीं लोगों ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के मामले में भी सवाल उठाकर अपनी ही सरकार के विरुद्ध अविश्वास उत्पन्न करने जैसा घिनौना काम किया। इनके बयानों को आधार बनाकर पाकिस्तान की संसद तक में भारत को झूठा साबित करने का प्रयास हुआ। बेहतर हो सोशल मीडिया सहित अन्य मंचों पर इन तत्वों का बहिष्कार हो। जिन लोगों के मन में सेना और सरकार की प्रतिबद्धता और निर्णय क्षमता में विश्वास है उनको भी चाहिए कि वे अति उत्साह से बचते हुए अनधिकृत जानकारी को प्रसारित करने से बचें। टीवी चैनलों में खबरें परोस देने के मामले में जो आपाधापी है उससे प्रभावित हुए बिना केवल सेना और सरकार द्वारा प्रदत्त जानकारी को ही प्रामाणिक मानकर न खुद उत्तेजित और भ्रमित हों और न ही दूसरों को करें। केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों में छुट्टियां रद्द करने का जो निर्णय लिया उससे जाहिर है देश निर्णायक लड़ाई लड़ते हुए अपने दूरगामी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कमर कस चुका है। ऐसा करने का एक कारण सेना सहित युद्ध से किसी भी रूप में जुड़े वर्ग को यह एहसास कराना भी है कि संकट की इस घड़ी में पूरा देश कन्धे से कन्धा मिलाकर खड़ा है। द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन का सफल नेतृत्व करने वाले प्रधानमंत्री स्व. विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि किसी भी देश का चरित्र युद्ध के दौरान उसके नागरिकों के आचरण से उजागर होता है। वर्तमान स्थिति हमारे लिए अपने चरित्र को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का बेहतरीन अवसर है।
स्व. राजेंद्र अनुरागी की ये पंक्तियाँ आज फिर प्रासंगिक हो उठी हैं:-
आज पूरा देश मेरा लाम पर है,
जो जहाँ पर है वतन के काम पर है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
No comments:
Post a Comment