Friday, 16 May 2025

बदजुबान मंत्री को हटाने से बाकी नेताओं को नसीहत मिलेगी


म.प्र सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में की गई टिप्पणी के बाद माफी मांग ली गई किंतु उच्च न्यायालय के सख्त आदेश के कारण उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी। उनकी  स्तरहीन टिप्पणी से  अनुशासन और संस्कारों पर जोर  देने वाली भाजपा  में भोपाल से  दिल्ली तक ख़लबली है। विवादास्पद टिप्पणियों के लिए कुख्यात शाह को समझाया जा रहा है कि  त्यागपत्र दे दें किंतु वे धमकी दे रहे हैं कि  वे आदिवासियों का अलग संगठन बना लेंगे। उनके समर्थन में राज्य और केंद्र के एक -  एक मंत्री का कूदना ये संकेत है कि लड़ाई को आदिवासी अस्मिता से जोड़ने का प्रयास हो रहा है।  हरसूद विधानसभा सीट से लगातार आठ बार जीतने वाले शाह को आदिवासी समुदाय से होने के कारण  मंत्री बनाया जाता है । उनके बयान सरकार पार्टी के लिए सिरदर्द पैदा करते रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी के बारे में की गई  टिप्पणी पर भी उन्हें मंत्री पद गंवाना पड़ा था। पार्टी नेतृत्व उनके बारे में  फैसला लेने के पहले  राजनीतिक नफे - नुकसान का आकलन कर रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अपना मोर्चा खोल दिया है । दरअसल भाजपा की चिंता ये है कि वह एक तरफ तो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता  प्रचारित करने के लिए तिरंगा यात्रा निकाल रही है वहीं दूसरी तरफ  राज्य सरकार के एक मंत्री ऑपरेशन की प्रतीक बनीं महिला सैन्य अधिकारी के बारे में  अभद्र टिप्पणी कर बैठे जिसमें उसके धर्म का जिक्र था। उनका आशय जो भी रहा किंतु  लहजा और शब्दावली में शालीनता का अभाव था। भाजपा के भीतरी सूत्रों के मुताबिक या तो उनको बर्खास्त कर राजनीतिक विरोध ठंडा करने का प्रयास किया जाएगा या फिर उन पर  प्राथमिकी पर  कानूनी कार्रवाई का इंतजार करते हुए फिलहाल किसी बड़े कदम से बचने का विकल्प चुना जाएगा। दरअसल पार्टी नेतृत्व  मंत्री पद से हटाए जाने के बाद शाह के संभावित राजनीतिक कदम का पूर्वानुमान लगा रही है।  वैसे भी पार्टी के पास प्रभावशाली आदिवासी नेताओं का अभाव है जिसका लाभ शाह को मिलता रहा है । वैसे पार्टी उनकी माफी के बाद मामला समाप्त कर देती किंतु कई पेच एक साथ फँस गये । एक तो बयान सैन्य अधिकारी को लेकर था , उस पर भी वह महिला है और मुस्लिम । केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देने विदेश सचिव के साथ दो महिला सैन्य अधिकारियों को दायित्व सौंपकर पहलगाम के आतंकी हमले में मारे गए पुरुषों की विधवाओं की भावनाओं को सम्मान किया वहीं दूसरी तरफ धार्मिक आधार पर किसी भी प्रकार के मतभेद की आशंका को भी दरकिनार कर दिया। इस निर्णय की सर्वत्र प्रशंसा हुई तथा सोफिया कुरैशी के साथ नजर आईं विंग कमांडर व्योमिका सिंह रातों - रात  भारतीय महिलाओं विशेषकर युवतियों के बीच  महानायिका के तौर पर स्थापित हो गईं। ऐसे में म.प्र के कैबिनेट मंत्री  की टिप्पणी ने कड़वाहट घोल दी। ये विवाद ठंडा हो पाता उसके पहले ही  वरिष्ट सपा सांसद डॉ. रामगोपाल यादव ने व्योमिका सिंह की जाति को लेकर जो टिप्पणी की वह भी अप्रासंगिक , अनावश्यक और घोर आपत्तिजनक है। अब उन पर क्या कार्रवाई होती है ये देखने वाली बात होगी किंतु देश की रक्षा से जुड़े मसलों और व्यक्तियों के बारे में  जिम्मेदार पदों पर आसीन लोग यदि स्तरहीन टिप्पणियां करें तो इससे उनकी घिनौनी मानसिकता ही उजागर होती है। विडंबना ये है कि ऐसे लोगों को निकाल बाहर करने में राजनीतिक दल डरते हैं क्योंकि वे दो - चार सीटों के नुकसान की वजह बन सकते हैं।  दलित समुदाय से जुड़े कांग्रेस नेता उदित राज को तो ऑपरेशन सिंदूर शब्द ही नागवार गुजरा क्योंकि उसका संबंध हिन्दू महिलाओं से है । इस तरह की बातें करने वाले न तो अपनी जाति या समुदाय के हितचिंतक होते हैं और न ही धर्म के । उनका उद्देश्य दरअसल केवल  अपने राजनीतिक प्रभुत्व को बनाए रखना होता है। ऐसे नेताओं को ढोने में  क्षेत्रीय पार्टियों की मजबूरी तो समझ में आने लायक है किन्तु भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां जब ऐसे बदजुबान नेताओं को सिर पर बिठाती हैं तब आश्चर्य के साथ दुःख भी होता है । वहीं इन नेताओं को मिलने वाली अहमियत दूसरों को भी  प्रोत्साहित करती है। ये देखते हुए भाजपा को चाहिए वह अदालत का इंतजार किए बिना  शाह को मंत्री पद से हटाने का साहसिक फैसला ले।  उनके द्वारा नया संगठन बनाए जाने जैसी धमकी का भी कोई महत्व नहीं है क्योंकि म.प्र में मुख्यधारा से अलग होने के बाद स्व. वीरेंद्र कुमार सखलेचा , स्व. अर्जुन सिंह और उमाश्री भारती भी कुछ नहीं कर पाये। विजय शाह उनसे बड़े नेता नहीं है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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