भले ही भारत ने अभी तक विधिवत युद्ध की घोषणा नहीं की लेकिन हालात युद्ध के ही हैं। भारत द्वारा आतंकवादियों के अड्डों पर हमला किये जाने के बाद पाकिस्तान ने हमारे नागरिक इलाकों के साथ ही सैन्य ठिकानों पर गोलाबारी के अलावा ड्रोन से हमला किया जिसे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली ने हवा में ही मार गराया। जवाब में भारतीय सेना ने लाहौर, इस्लामाबाद, बहावलपुर और रावलपिंडी पर मिसाइलें दागकर दुश्मन के घर में दहशत फैला दी। साथ ही करांची बंदरगाह को नौसेना ने जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। हालांकि पाकिस्तान , जम्मू से गुजरात तक भारत के सीमावर्ती इलाकों में हमलों की लगातार कोशिशें कर रहा है किंतु उसकी कोशिशें बदहवासी का संकेत देती हैं। दूसरी ओर भारत ने पहलगाम हमले के बाद दो सप्ताह तक सैन्य मोर्चे पर पूरी तैयारी करने के बाद ही पाकिस्तान में आतंकवादी अड्डों को तबाह किया। पाकिस्तान को ये लगता था कि ज्यादा से ज्यादा भारत छोटी - मोटी सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद ठंडा पड़ जाएगा। लेकिन उसके अनुमान गलत साबित हुए। पहलगाम हादसे के तत्काल बाद भारत चाहता तो पाकिस्तान पर चढ़ाई कर देता किंतु उसने केवल सैन्य तैयारियां ही नहीं कीं अपितु कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रियता दिखाते हुए विश्व जनमत को अपने पक्ष में करने में सफलता हासिल की। भारत ने इस लड़ाई को आतंकवाद के विरुद्ध केंद्रित रखने की जो प्रतिबद्धता वैश्विक मंचों पर व्यक्त की उसके कारण इक्का - दुक्का को छोड़कर दुनिया के तमाम बड़े देश या तो भारत की तरफदारी कर रहे हैं या चुप बैठे हैं। सबसे बड़ी बात अमेरिका, रूस, फ्रांस , ब्रिटेन जैसी सामरिक और आर्थिक शक्तियों द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का समर्थन करते हुए भारतीय नीति का औचित्य साबित कर दिया। सं.रा.संघ ने भी पाकिस्तान की शिकायत को विचार योग्य नहीं समझा जो भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत कही जा सकती है। इस युद्ध का अंतिम परिणाम क्या होगा इस बारे में कोई भी भविष्यवाणी अथवा दावा करना तो विवेक सम्मत नहीं होगा किंतु इतना अवश्य है कि भारत ने बीते तीन दिनों में सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी जो कुशलता साबित की वह दुश्मन का मनोबल तोड़ने के लिए पर्याप्त है। उसकी ओर से की जा रही कार्रवाई पूरी तरह से अनियोजित लग रही है। पहलगाम की घटना के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया के कारण पाकिस्तान ने खैबर पख्तून सीमा और बलूचिस्तान में मौजूद अपने सैन्यबलों को भारत से सटी सीमा पर तैनात तो किया किंतु लंबा युद्ध लड़ने में उसकी अक्षमता उजागर होने से उसका मनोबल गिरा हुआ है। खस्ता आर्थिक स्थिति और वैश्विक मंचों पर खराब छवि की वजह से परंपरागत सहयोगी भी उसका साथ देने के बजाय लीपापोती कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात है मुस्लिम देशों का तटस्थ बने रहना। तुर्किये के अलावा कोई भी बड़ा मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान के साथ खड़ा होने की पहल नहीं कर रहा। सऊदी अरब जैसा इस्लाम का संरक्षक समझे जाना वाला देश जिसने पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर का कर्ज देकर सहारा दिया , इस विवाद से निर्लिप्त बना हुआ है। लंबे समय तक पाकिस्तान भारत के साथ अपने झगड़े को इस्लाम और हिन्दू धर्म से जोड़कर इस्लामिक देशों का भावनात्मक दोहन करता रहा। लेकिन बीते कुछ सालों के भीतर भारत अपनी कुशल कूटनीति से प्रमुख मुस्लिम देशों के मन में ये बात स्थापित करने में काफी हद तक सफल हो गया कि पाकिस्तान मानवता का दुश्मन है और उसके द्वारा आतंकवादियों को प्रश्रय, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिये जाने से दुनिया भर में मुसलमान और आतंकवाद समानार्थी बन गए। चीन जैसा उसका अंध समर्थक भी अभी तक तेल की धार देख रहा है क्योंकि वह खुद इस्लामिक अतिवाद को कुचलने में लगा है। पाकिस्तान में उसके जो प्रकल्प चल रहे हैं उनके विरोध में स्थानीय जनता का विरोधी रवैया उसके लिए सिरदर्द बना हुआ है जिनमें चीन के करोड़ों डॉलर फंसे हुए हैं। कुल मिलाकर भारत ने बड़ी ही कुशलता से पाकिस्तान को हर मोर्चे पर घेर रखा है। गौरतलब है आज की दुनिया में जंग केवल हथियारों से जीतना संभव नहीं होता। यदि ऐसा होता तो रूस अभी तक यूक्रेन को घुटनाटेक करवा देता और चीन ने ताईवान पर कब्जा कर लिया होता। आशय ये है कि जब तक विश्व जनमत किसी देश के साथ नहीं होता तब तक ऐसे मुकाबले में पूर्ण विजय हासिल करना कठिन होता है। पाकिस्तान ने अब तक जो कुछ भी किया उससे उसकी कमजोरी जाहिर हो चुकी है। वहीं भारत अत्यंत धैर्य के साथ सामरिक और कूटनीतिक मोर्चे पर प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहा है। ऐसे समय देशवाशियों का दायित्व है कि वे संयम और अनुशासन का परिचय देते हुए न अफवाहों पर भरोसा करें और न ही उन्हें फैलाने का माध्यम बनें। सोशल मीडिया पर भी अनावश्यक सामग्री परोसने से बचना चाहिए। युद्ध में उत्साह बुनियादी जरूरत है किंतु बतौर नागरिक जिम्मेदारी भरा आचरण भी उतना ही आवश्यक है। सेना और सरकार अपना काम पूरी तन्मयता से कर रही हैं। हमें उनमें अपना विश्वास व्यक्त करते हुए दुनिया को ये बताना चाहिए कि संकट के इस समय पूरा देश एकजुट है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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