प्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को 20 लाख रु. तक की नगदी रहित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का जो निर्णय लिया वह समयोचित आवश्यकता है। सेवा निवृत हो चुके लोगों के लिए यह राशि 5 लाख रु. रखी गई है। इसी तरह बिना भर्ती हुए करवाये गए इलाज के लिए 20 हजार रु. की एकमुश्त राशि सालाना दिये जाने का प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव शासकीय अमले को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर काफी सम्वेदनशील हैं। उनका ये कहना पूरी तरह न्यायोचित है कि कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पदोन्नति सहित उन्हें दी जाने सुविधाओं सम्बन्धी निर्णय लंबित रखा जाना उनके प्रति अन्याय है। उनकी इस टिप्पणी का आशय ये भी निकाला जा सकता है कि राजनेताओं को तो हर सुविधा समय पर प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध हो जाती परंतु कर्मचारी को अपने वाजिब अधिकार के लिए भी लंबा इंतजार करते हुए भटकना भी पड़ता है। और बातें तो छोड़ दें किंतु जहाँ तक चिकित्सा खर्च का प्रश्न है तो केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सी.जी.एच.एस के अंतर्गत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में नगदी रहित इलाज की सुविधा है किंतु प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को चिकित्सा व्यय के भुगतान के लिए उसी सरकारी भर्राशाही से जूझना पड़ता है जिसके वे भी हिस्से हैं। ये वास्तविकता है कि उन्हें अपने चिकित्सा बिलों का भुगतान हासिल करने के लिए भी घूस देनी पड़ती है। केवल कर्मचारी ही नहीं बल्कि अधिकारी वर्ग को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। आई.ए.एस और आई.पी.एस वर्ग चूंकि आज भी ब्रिटिश काल वाले विशेषाधिकारों का सुख भोग रहा है इसलिए उनकी ज्यादातर जरूरतें प्राथमिकता के आधार पर पूरी हो जाती हैं। एक साधारण कर्मचारी या उसके आश्रित परिजन यदि गंभीर रूप से बीमार हो जाएं तब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही इलाज करवाना पड़ता है क्योंकि बाहर किसी बड़े अस्पताल में इलाज के लिए यदि उसके पास पर्याप्त धनराशि न हो तब शासन से उसकी स्वीकृति प्राप्त करना कितना कठिन है ये सर्वविदित है। लेकिन कोई मंत्री, सांसद, विधायक, बड़ा प्रशासनिक अधिकारी उसकी जगह हो तो आनन फानन में एयर एंबुलेंस के जरिये उन्हें दिल्ली - मुंबई के किसी नामी - गिरामी अस्पताल में इलाज हेतु भेज दिया जाता है। और यदि कहीं किसी न्यायाधीश का स्वास्थ्य खराब हो तो फिर इंतजाम और भी शीघ्रता से किया जाता है। उस लिहाज से म.प्र के मुख्यमंत्री डाॅ. यादव की सरकार शासकीय कर्मचारियों को नगदी रहित इलाज की जो सुविधा प्रदान करने जा रही है वह बेहद सकारात्मक कदम है। ये बात सर्वविदित है कि आजकल इलाज बहुत महंगा है। बड़े - बुजुर्गों को तो छोड़ भी दें किंतु छोटे - छोटे बच्चों का साधारण इलाज तक बेहद खर्चीला हो गया है। सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना भुगतान किये बिना 20 लाख रु. के इलाज की सुविधा मिलने से उक्त समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल जायेगी। मुख्यमंत्री डाॅ. यादव ने सरकारी अमले की बेहतरी के बारे में हाल में जो कदम उठाये वे पूरी तरह से उचित हैं। लेकिन नगदी रहित इलाज सुविधा देने के बाद ये सतर्कता रखनी होगी कि निजी अस्पतालों द्वारा आयुष्मान योजना और सी.जी.एच.एस जैसी सरकारी योजनाओं में किया जाने वाला फर्जीवाड़ा न दोहराया जा सके। हालांकि ऐसा करना सामान्य रूप से असंभव प्रतीत होता है क्योंकि शासन की कोई भी योजना कितनी ही अच्छी हो किंतु उसमें भ्रष्टाचार नामक बीमारी घुस ही जाती है। इसलिए म.प्र के सरकारी सरकारी कर्मचारियों को 20 लाख तक के नगदी रहित इलाज की सुविधा भी उससे मुक्त रहेगी इसमें संदेह ही है । इसलिए सरकार को इस बारे में सतर्क रहना होगा। इसी के साथ ये बात भी विचारणीय है कि सरकार के जिला अस्पतालों और मेडीकल कालेजों के चिकित्सालयों को इतना उन्नत किया जाए जिससे कि शासकीय अधिकारी और कर्मचारी अपना इलाज सरकारी अस्पतालों में करवाएं। दिल्ली में स्थित एम्स और विभिन्न राज्यों में खोली गईं उसकी शाखाओं में उच्चस्तरीय व्यवस्थाओं के कारण साधारण जन ही नहीं अधिकारी और नेतागण भी अपना इलाज करवाना पसंद करते हैं। दिल्ली के एम्स में तो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक इलाज हेतु भर्ती होते हैं। हालांकि रातों - रात सर्वसुविधासंपन्न अस्पताल खड़ा करना आसान नहीं होता । इसके साथ ही ये समस्या भी है कि सरकारी चिकित्सा सेवाएं चिकित्सकों की कमी से जूझ रही हैं। इसके कारण प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने में भी शासकीय तंत्र विफल दिखता है। युवा चिकित्सक निजी अस्पतालों से जुड़ना या प्रायवेट प्रैक्टिस करना पसंद करते हैं। शायद इसीलिए सरकार निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा प्रदान कर रही है। लेकिन दीर्घकालीन सोच यही होनी चाहिए कि सड़क क्रांति की तरह से ही चिकित्सा क्रांति भी हो क्योंकि आबादी के अनुपात में चिकित्सा सुविधाएं बहुत कम हैं। ये देखते हुए प्रदेश में चिकित्सा क्रांति का सूत्रपात होना समय की मांग है। बेहतर होगा मुख्यमंत्री इस दिशा में भी प्रयास करें।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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