Saturday, 17 May 2025

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल : राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण




पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा  किये गए नरसंहार के बाद पूरे देश में गुस्से की लहर देखने मिली। उसके बाद आयोजित  सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने  पाकिस्तान पर समुचित कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरे समर्थन का आश्वासन दिया । जब ऑपरेशन सिंदूर के जरिये भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के अड्डों को मिसाइलें दागकर ध्वस्त किया तब भी सभी पार्टियों ने सरकार के कदम का स्वागत करते हुए ये संदेश दिया कि  देश संकट में हो तब आपसी मतभेदों को भूलकर सब एकजुट हो जाते हैं। यद्यपि जब युद्धविराम की घोषणा हुई तो  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तरह - तरह के तंज कसते हुए बांग्ला देश के निर्माण में स्व. इंदिरा गाँधी की भूमिका की प्रशंसा होने लगी। युद्धविराम के पीछे  सरकार का तर्क ये था कि उसका उद्देश्य पहलगाम की घटना के बाद आतंकवादियों की कमर तोड़ना था। इसीलिए भारतीय सेना के किसी भी अंग ने सीमा नहीं लांघी। धीरे - धीरे  युद्धविराम के  पक्ष में वातावरण  बनने लगा जिसकी बानगी कांग्रेस के  वरिष्ट नेता  पी. चिदंबरम और शशि थरूर के लेख और बयानों से मिली। प्रमुख उद्योगपतियों ने भी युद्ध के लम्बा नहीं खिंचने पर राहत की सांस ली क्योंकि उसकी आशंका में  विदेशी निवेशकों के छिटकने का डर पैदा हो गया।  युद्धविराम होते ही भारत के पूंजी बाजार के प्रति आकर्षण और बढ़ने लगा। इसका एक कारण  हमारी सेनाओं के युद्ध कौशल के साथ ही स्वदेशी अस्त्र- शस्त्रों विशेष रूप से मिसाइलों और प्रतिरक्षा प्रणाली को मिली सफलता के साथ ही केंद्र सरकार का ये ऐलान भी है कि  ऑपरेशन सिंदूर स्थगित किया गया है, खत्म नहीं। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान पर लगाए गए सभी प्रतिबंध जारी रखने की घोषणा कर दी गई जिसमें सिंधु नदी जल संधि पर लगी रोक भी है। भारत चूंकि  पाकिस्तान को पूरी तरह घेरने की दीर्घकालीन रणनीति बना रहा है इसलिए अन्य देशों को अपना पक्ष समझाने की जरूरत है। खबर है , इसके लिए सांसदों के  प्रतिनिधि मंडल कुछ देशों में भेजे जाएंगे जिनमें भाजपा के अलावा कांग्रेस और अन्य कुछ दलों का प्रतिनिधित्व भी होगा। उल्लेखनीय है स्व. पी .वी  नरसिम्हा राव के शासन काल में जिनेवा के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाने की चाल चली। इसकी भनक लगते ही स्व. राव ने विपक्ष के कद्दावर नेता स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेता बनाकर भेजा जिन्होंने वहाँ भारत का पक्ष मजबूती से  रखा जिससे पाकिस्तान की कोशिशें बेकार चली गईं। केंद्र सरकार ने उसी परिपाटी को दोहराते हुए पाकिस्तान के साथ मौजूदा विवाद के बारे में भारत के रुख से विश्व समुदाय को परिचित करवाने सांसदों के 7 प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजने का निर्णय किया। हालांकि इसमें श्री थरूर का नाम होने से विवाद की स्थिति बन गई है क्योंकि कांग्रेस का कहना है उसने जो चार नाम दिये थे उनमें श्री थरूर शामिल नहीं थे किंतु उन्होंने  प्रतिनिधिमंडल में शामिल किये जाने पर खुशी जताते हुए देशहित में सेवाएं देने के लिए सदैव तैयार रहने की बात कही। ऐसा लगता है बीते कुछ समय से केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन करने की वजह से वे कांग्रेस आलाकमान की नजरों में संदिग्ध हो गए हैं। हालांकि मोदी सरकार की प्रशंसा तो श्री चिदंबरम द्वारा भी की गई। गत दिवस सलमान खुर्शीद की पुस्तक के विमोचन पर उन्होंने भाजपा की संगठनात्मक क्षमता की भी मुक्तकंठ से सराहना कर पार्टी नेतृत्व को चौंका दिया। आगामी वर्ष तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होंगे।  श्री चिदंबरम और थरूर क्रमशः उक्त दोनों राज्यों से आते हैं। यद्यपि केंद्र सरकार ने बजाय श्री चिदंबरम के तमिलनाडु से द्रमुक सांसद और मुख्यमंत्री स्टालिन की बहन कनिमोझी को विदेश जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में रखा। श्री थरूर चूंकि संरासंघ से जुड़े रहे इसलिए उन्हें विदेशी मामलों में महारत हासिल है। कांग्रेस उनके नाम पर क्यों सहमत नहीं है ये उसका आंतरिक मामला है लेकिन केंद्र सरकार ने विभिन्न दलों के सांसदों का जो प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया वह भारत की एकता, मजबूती और लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण है। एक तरफ जहाँ पाकिस्तान में गृहयुद्ध की स्थिति है तथा सरकार तथा विपक्ष में टकराव है तब भारत द्वारा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजने से उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव और बढ़ेगा। चूंकि ऑपरेशन सिंदूर को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई जा रही है लिहाजा पहलगाम हमले के बाद राजनीतिक मतभेदों को स्थगित रखने की जो समझदारी विभिन्न दलों द्वारा प्रदर्शित की गई वह जारी रहना चाहिये। 

- रवीन्द्र वाजपेयी

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