Sunday, 11 May 2025

कल की बैठक पर टिका है युद्धविराम का भविष्य


    हालांकि सोमवार को होने वाली DGMO की बैठक के बाद ही तय हो सकेगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच अचानक हुए युद्धविराम का हश्र क्या होगा क्योंकि भारत का दावा है कि पाकिस्तान के अनुरोध पर उसने लड़ाई रोककर बातचीत करने पर सहमति प्रदान की किंतु उसने कुछ घंटों बाद ही सीमा पर गोलाबारी शुरू कर दी और उससे भी बड़ी बात प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश के नाम दी गई तकरीर में न सिर्फ भारत पर युद्धविराम तोड़ने का ठीकरा फोड़ दिया बल्कि  अंतिम फैसले तक लड़ते रहने की डींग भी हाँकी। उन्होंने ये कहने में भी संकोच नहीं किया कि पाकिस्तान ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को तहस - नहस करते हुए उसे झुकने मजबूर कर दिया। उनका भाषण और चीन द्वारा पाकिस्तान के साथ खड़े होने का आश्वासन लगभग आगे पीछे आये। ये भी कहा जा रहा है कि युद्धविराम को तोड़ने के लिए  चीन ने उकसाया और भारत विरोधी बयान देने के लिए भी। आज पाकिस्तान के सभी प्रमुख अखबारों ने युद्धविराम को विजय पर्व की तरह पेश करते हुए लिखा कि युद्ध और शांति दोनों में सफल। वहाँ की जनता भी भारत द्वारा युद्धविराम के लिए रजामंदी देने को पाकिस्तान की जीत मानकर जश्न मना रही है।

      हालांकि भारत में भी हर कोई इस बात से तो गौरवान्वित है कि हमारे सैन्य बलों ने बेमिसाल प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। ये दावा भी किया जा रहा है कि शुक्रवार की रात भारतीय आक्रमण ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया जिसके बाद वह अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाया जिसने दोनों पक्षों से संपर्क कर फिलहाल तो जंग रुकवा दी।

    हालांकि भारत के विदेश सचिव और सेना की दो महिला अधिकारियों ने अपनी पत्रकार वार्ता में बहुत ही गरिमामय तरीके से भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान को पहुंचाई गई क्षति के बारे में विस्तार से बताते हुए उसके दुष्प्रचार को गलत बताया और युद्धविराम के लिए उसकी तरफ से आये प्रस्ताव को स्वीकार करने की जानकारी दी। साथ ही ये भी बताया कि  सिंधु नदी जल संधि जो निर्णय लिए गए थे वे जारी रहेंगे तथा किसी भी आतंकवादी वारदात को युद्ध के तौर पर देखा जाएगा। लेकिन जब कुछ घंटों के बाद पाकिस्तान ने सीमा पर गोलाबारी शुरू कर दी तब आम जनता को लगा कि शायद भारत युद्धविराम को तोड़कर  शुक्रवार की रात वाले हमले को दोहराएगा।

     लेकिन कुछ घंटों बाद ही सब शांत हो गया जिसका कारण शायद पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव होगा किंतु युद्ध के हर चरण में भारी पड़ने के बाद भी भारत द्वारा मैदान ए जंग से हटकर बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार होने का औचित्य देश के आम और खास जनमानस को समझ में नहीं आ रहा। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्चस्तरीय बैठक की जिसमें संभवतः कल होने वाली DGMO  स्तर की बातचीत की रणनीति तय की गई होगी। किंतु पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कल रात अपने देशवासियों को जिस बड़बोले  अंदाज में संबोधित किया वह कोई नई बात नहीं है । वहाँ के नेता इसी तरह की बातें करने के लिए प्रसिद्ध हैं किंतु भारत सरकार की ओर से किसी भी नेता मसलन रक्षा या विदेश मंत्री द्वारा  सामने आकर जानकारी नहीं देने से लोग हैरान हैं। गृह मंत्री अमित शाह भी मौन पर हैं। प्रधानमंत्री का न बोलना चौंकाने वाला नहीं है क्योंकि कल होने वाली वार्ता के पहले वह गैरजरूरी होगा।

   बावजूद इसके भारत सरकार को ये साफ करना चाहिए कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा कल रात दिये गये बयान के बाद भी उसके साथ किस मुद्दे पर बातचीत की जाएगी क्योंकि उसने आतंकवादियों को पनाह देने और पहलगाम हादसे में हाथ होने के आरोप को हमेशा की तरह ठुकरा दिया है।

     यद्यपि रक्षा और कूटनीतिक मामलों में पहले से सब कुछ बताना सरकार के लिए संभव नहीं होता किंतु देशवासियों की अपेक्षा है कि कल की बैठक में भारत को विजेता की तरह पेश आना चाहिए तथा शांति के लिए मिलकर काम करने, रेल बस सुविधा बहाल करने, नागरिकों की आवाजाही शुरू करने के साथ ही सांस्कृतिक आदान - प्रदान जैसी घिसी- पिटी बातों से किनारा करते हुए आतंकवादियों के विरुद्ध कारवाई पर जोर देना चाहिए।

  पाकिस्तान ने युद्धविराम  की गंभीरता को तो कुछ घंटों में ही खत्म कर अपने इरादे जता दिये अब हमारी बारी है उसे ये समझाने की हम भी युद्ध विराम तोड़ने में सक्षम हैं। उसे ये संदेश देना भी जरूरी है कि हमने इसरायल से हथियार और युद्ध की तकनीक ही नहीं अपितु शत्रु की कमर तो़ड़ने की मानसिकता भी हासिल कर ली है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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