अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किये गए नृशंस हत्याकांड के कारण पूरा देश गुस्से में उबल रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया जाएगा जिसे वह भूल नहीं सकेगा। सर्वदलीय बैठक में सभी नेताओं ने सरकार के किसी भी कदम के समर्थन का आश्वासन दिया जिसके बाद प्रधानमंत्री ने सेना प्रमुखों को ये अधिकार दे दिया कि वे अपना लक्ष्य, तरीका और समय तय करते हुए आतंकवादियों की कमर तोड़ें। हालांकि श्री मोदी के उक्त फैसले पर उनके विरोधियों ने कहना शुरू कर दिया कि वे अपनी जिम्मेदारी सेना पर डालकर दूर हो गए। सोशल मीडिया में भी पाकिस्तान में घुसकर मारने का दबाव बनाया जाने लगा। प्रधानमंत्री सहित भाजपा नेताओं द्वारा 26/11 हमले के बाद दिये बयानों के वीडियो दिखाकर उनका मजाक उड़ाते हुए 56 इंची सीने के दावे पर भी तंज कसे जाने लगे। सिंधु नदी जल संधि और पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने संबंधी निर्णयों को युद्ध से बचने का तरीका बताने का अभियान भी देखने मिला। कुछ लोग ये कहने से भी नहीं चूके कि चीन के डर से भारत सरकार पाकिस्तान पर हमला करने का साहस नहीं कर पा रही। पाकिस्तान भी परमाणु बमों का हवाला देकर धमकाने की जुर्रत कर रहा था। हालांकि भारत की ओर से जवाबी कारवाई का डर उसके सिर पर सवार था। सीमा पर उसने सैन्य तैयारियां भी करना शुरू कर दिया। इन सबके बीच देश में एक वर्ग निराशावाद फैलाने में जुटा था। उ.प्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भारतीय वायुसेना के सबसे आधुनिक लडाकू विमान रफाल को खिलौना बताते हुए उसका उपहास किया। कुछ विपक्षी नेताओं के बयानों को पाकिस्तान ने अपनी बेगुनाही के प्रमाण तौर पर भी पेश किया। वहाँ की संसद में भी उनका उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारत में पूरा देश सरकार के साथ नहीं है। जैसे - जैसे दिन बीत रहे थे सरकार पर सवाल दागने वालों के हौसले बुलंद होने लगे। यहाँ तक दावा किया गया कि सरकार ने ही पहलगाम हत्याकांड करवाया। आतंकवादियों द्वारा धर्म पूछकर पर्यटकों की हत्या किये जाने की बात को झुठलाने के भी खूब जतन हुए। लेकिन इन सबसे विचलित हुए बिना सरकार और सेना ने तैयारी जारी रखी। सबसे बड़ी बात ये हुई कि विश्व जनमत को भारत के पक्ष में मोड़ने में सफलता मिली जो बड़ी उपलब्धि थी। यहाँ तक कि प्रमुख मुस्लिम देश तक आतंकवाद से लड़ने में भारत के पक्ष में नजर आये। और जब ये सुनिश्चित हो गया कि पलटवार के समुचित इंतजाम हो चुके हैं तब गत मध्यरात्रि के बाद वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकवादियों के 9 बड़े अड्डों को निशाना बनाकर ध्वस्त कर दिया। इस कारवाई में पाक के कब्जे वाला कश्मीर भी शामिल था। पाकिस्तान द्वारा भी हमले के वीडियो प्रसारित किये गए हैं। इसके बाद भारत में पिछली सर्जिकल स्ट्राइकों का सबूत मांगने वाला तबका मुँह छिपाये घूम रहा है। सेना ने साफ कर दिया कि उसने पाकिस्तान के किसी सैन्य ठिकाने पर हमला नहीं किया और केवल आतंकवादियों के अड्डों को ही निशाना बनाया गया। दो दिन पहले सं.राष्ट्र.संघ सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत को घेरने के प्रयास में पाकिस्तान खुद फंस गया जब सदस्य देशों ने उसके यहाँ आतंकवादी अड्डे होने का आरोप लगाकर कठघरे में खड़ा कर दिया। ऐसा लगता है भारत सरकार इसी का इंतजार कर रही थी। दिल्ली में बीते दो - तीन दिनों में उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जिस प्रकार चला उससे ये संकेत तो मिल ही गए थे कि कुछ न कुछ होने वाला है और आखिरकार ऑपरेशन सिंदूर नामक अभियान के जरिये पहलगाम हत्याकांड का बदला ले लिया गया। इस हमले में पाकिस्तान को कितना नुकसान हुआ इसका विवरण आता जा रहा है। आतंकी सरगना मसूद अजहर के परिवार का सफाया होने की पुष्टि तो खुद उसी ने की है। नष्ट हुए आतंकवादियों के अड्डों की तस्वीरें साबित कर रही हैं कि भारतीय वायुसेना ने बहुत ही कुशलता से अपने लक्ष्य को भेदा। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों की सीमा पर भी गोलाबारी की खबरें आई हैं। ये अभियान लंबे युद्ध में तब्दील होगा , ये पाकिस्तान के जवाब पर निर्भर है। यद्यपि सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक उसके पास पर्याप्त सैन्य संसाधन नहीं हैं और आर्थिक स्थिति भी दयनीय है।बलूचिस्तान के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर भी वह फंसा हुआ है। ये देखते हुए वह ऑपरेशन सिंदूर का जवाब किस तरह से देता है इस पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हैं । यद्यपि युद्ध से दोनों पक्षों को नुकसान होगा किंतु पाकिस्तान जैसे देश को सबक सिखाना जरूरी हो गया था। भारत बेशक पूर्ण युद्ध को टाले परंतु ज़हरीले सांप का फन कुचलना समय की मांग है। भारतीय सेना की कारवाई से जैसा उत्साह और संतोष का भाव जागा है वह देशवासियों के मन में सरकार और सेना के प्रति विश्वास का प्रमाण है। साथ ही जो आत्मविश्वास सर्वत्र परिलक्षित हो रहा है वही किसी शक्तिशाली देश की पहिचान है। रास्वसंघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में कहा था कि शक्तिशाली हैं तो शक्ति का प्रदर्शन भी होना चाहिए। भारतीय सेना ने वह कर दिखाया जिसके लिए हर देशभक्त उसके प्रति श्रद्धावनत है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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