भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ बड़े से बड़े पद पर आसीन व्यक्ति की भी आलोचना की जा सकती है। यहाँ तक कि संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति भी इससे बच नहीं सकते। सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों की भी समीक्षात्मक आलोचना स्वीकार्य है। रही बात प्रधानमंत्री या सरकार में बैठे अन्य नेताओं की तो राजनीतिक शख्सियत होने के कारण वे आये दिन कठघरे में खड़े किये जाते हैं। गत रात्रि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के नाम दिये गए संदेश के साथ भी यही हुआ जो किसी भी कोण से अस्वाभविक नहीं था। पहलगाम में पाकिस्तान की शह प्राप्त आतंकवादियों द्वारा किये गए नरसंहार के बाद ही परंपरागत मोदी विरोधी लॉबी सक्रिय हो उठी थी। जब तक भारत ने पाकिस्तान पर कार्रवाई नहीं की तब तक प्रधानमंत्री को उसके लिए उकसाया गया। लेकिन जब ऑपरेशन सिंदूर प्रारंभ हुआ तथा पूरा देश सेना और सरकार के साथ एकजुट खड़ा हो गया तब युद्ध के औचित्य और निरपराध लोगों के मारे जाने को लेकर रुदाली गैंग सक्रिय हो गई। भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान पर किये गए हमले से वहाँ जो तबाही हुई उसे नजरंदाज करते हुए भारत में हुई क्षति को लेकर सरकार को घेरने का सुनियोजित अभियान चल पड़ा। यही जमात युद्धविराम के बारे में मनगढंत किस्से प्रसारित करते हुए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाने लगी। कल रात श्री मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए पहलगाम की घटना से युद्धविराम तक की सभी बातों पर देश की नीति स्पष्ट कर दी। सबसे बड़ी बात उन्होंने कही कि भारतीय हमले के कारण पूरी तरह भयाक्रांत होकर पाकिस्तान ने खुद होकर लड़ाई रोकने संपर्क किया था। प्रधानमंत्री ने भारतीय सेनाओं के पराक्रम और मारक क्षमता का उल्लेख करते हुए पूरे विश्व को बता दिया कि भारत में निर्मित रक्षा उपकरणों की तकनीकी श्रेष्ठता इस लड़ाई में प्रमाणित हो गई जबकि पाकिस्तान का आक्रमण हमारी सुरक्षा व्यवस्था के सामने बेअसर साबित हुआ। युद्धविराम को लेकर निराशा फैलाने वालों का नाम लिए बिना श्री मोदी ने साफ कर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर स्थगित हुआ है , समाप्त नहीं। और आतंकवादियों के विरुद्ध भारत की आक्रामकता जारी रहेगी। पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते जैसी उनकी टिप्पणी सिंधु नदी जल संधि का स्थगन जारी रहने का ऐलान था। पाकिस्तान से बातचीत पर प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि टेरर (आतंकवाद) और टाक ( बातचीत) एक साथ नहीं चल सकते। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कश्मीर विवाद में मध्यस्थता की पेशकश को तो भारत सरकार ने पहले ही खारिज कर दिया था। लेकिन अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने भारतीय नीति को दोहराते हुए कह दिया कि पाकिस्तान से बात होगी तो आतंकवाद और पाक अधिकृत कश्मीर पर होगी। उन्होंने आतंक के साथ व्यापार होने को भी अव्यावहरिक बताया। श्री मोदी ने न सिर्फ पाकिस्तान अपितु विश्व बिरादरी को भी संदेश दे दिया कि युद्धविराम का आशय भारत के रुख में नरमी नहीं है। चूंकि हमारा लक्ष्य आतंकवादियों के अड्डे थे इसलिए प्रारंभिक सैन्य कारवाई वहीं तक सीमित रही किंतु जब पाकिस्तान ने भारत के नागरिक एवं सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया तब हमारी सेना ने दुश्मन के सैन्य केंद्रों तथा हवाई अड्डों के साथ ही आयुध भंडारों पर जबरदस्त हमले कर उस iके हौसले पस्त कर दिये। पाकिस्तान द्वारा बार - बार परमाणु अस्त्रों की धौंस दिखाने के बारे में श्री मोदी ने खुलकर कहा कि इस ब्लेकमेलिंग से भारत को डराना संभव नहीं है। ज़ाहिर है भाषण का यह अंश डोनाल्ड ट्रम्प सहित उन राष्ट्रप्रमुखों को इशारा था जो इस लड़ाई को परमाणु युद्ध में बदल जाने के नाम पर रुकवाने का श्रेय लूटने लालायित हैं। यद्यपि आलोचकों को प्रधानमंत्री के भाषण में कमियां नजर आ रही हैं किंतु पाकिस्तान के प्रधानमंत्री एवं अन्य नेताओं द्वारा किये गए झूठे दावों और डींगों के विपरीत प्रधानमंत्री का भाषण बेहद सधा हुआ था जिसमें भारत की नीति, नीयत और दृढ़ता स्पष्ट तौर पर नजर आई। उनके विरोधियों को ऐतराज है कि उन्होंने ट्रम्प का नाम नहीं लिया जो आये दिन बड़बोलापन दिखा रहे हैं किंतु श्री मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विपरीत बजाय किसी विदेशी नेता का महिमामंडन करने के स्पष्ट कर दिया कि युद्धविराम पाकिस्तान के निवेदन पर किया गया। हालांकि उन्होंने ये जरूर कहा कि भारतीय सैन्य कार्रवाई से घबराकर वह दुनिया भर में युद्ध रुकवाने गिड़गिड़ाया। प्रधानमंत्री ने देश और दुनिया को बड़े ही सरल और साफ लहजे में बता दिया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के विरुद्ध जंग होने से आगे भी जारी रहेगी और भारत अपनी रक्षा करते हुए शत्रु की कमर तोड़ने में सक्षम है। वर्तमान वैश्विक परिथितियों के मद्देनजर श्री मोदी द्वारा गत रात्रि प्रसारित संदेश बहुत ही संतुलित एवं उत्साहवर्धक था।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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