पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा हत्याकांड के बाद पूरा देश पाकिस्तान के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों द्वारा समर्थन का भरोसा दिये जाने से उत्साहित होकर सरकार ने पाकिस्तान पर तरह - तरह के प्रतिबंध लगाते हुए उसके नागरिकों को भारत छोड़ने के आदेश के अलावा आपसी व्यापार रोक दिया। यहाँ तक कि डाक आने पर भी पाबंदी लग गई। भारतीय बंदरगाहों पर पाकिस्तानी पोतों की आवाजाही भी निषिद्ध कर दी गई। तीनों सेनाध्यक्षों को प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से बदला लेने के लिए लक्ष्य, समय और तरीका तय करने के लिए स्वतंत्र कर दिया।वहीं जनता को आश्वस्त किया गया कि पहलगाम के हमले का बदला हर हाल में लिया जाएगा। सैन्य कारवाई करने का निर्णय सेना पर छोड़ने के अलावा केन्द्र सरकार ने जो सबसे बड़ा कदम उठाया वह है सिंधु नदी जल संधि को निलंबित करना जिसके अनुसार सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया जबकि रावी, सतलज और व्यास भारत के हिस्से में। भारत अब तक इसका पालन करता आया है जबकि इससे उसे नुकसान था। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए स्वीकार किया कि सिंधु नदी जल संधि से उनके राज्य के हित प्रभावित हुए। संधि का पालन करते हुए भारत ने सिंधु पर बहुत छोटा तथा झेलम और चिनाब नदी पर मध्यम श्रेणी के बांध बनाये । ये देखते हुए हर बात में सरकार का विरोध करने वाला विघ्नसंतोषी वर्ग ये ढिंढोरा पीटने लगा कि सिंधु नदी जल संधि का निलंबन जनता को बहलाने के लिए छोड़ा गया शिगूफा है क्योंकि भारत के पास सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी रोकने में सक्षम बांध ही नहीं हैं और यदि अभी उस दिशा में काम शुरू भी किया जाए तो उसे पूरा होने में कम से कम 20 वर्ष लगेंगे। इसके साथ ही आये दिन पाकिस्तान पर हमले में देरी के लिए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा जाता है। चूंकि पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछकर नृशंस हत्या की लिहाजा देश का बहुसंख्यक समाज भी उम्मीद लगाए बैठा है कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया जाए जिससे भविष्य में वह इस तरह के हमले के बारे में सोच भी न पाए। सरकार भी जनभावनाओं को महसूस कर रही है किंतु उसे इस बात का भी एहसास है कि बिना तैयारी के युद्ध छेड़ देना बुद्धिमत्ता नहीं होती। इसीलिए प्रधानमंत्री ने सेना प्रमुखों को उस बारे में अंतिम फैसला करने की छूट दे दी और जैसी खबरें आ रही हैं उनके अनुसार थल, वायु और नौसेना मिलकर संयुक्त रणनीति के अंतर्गत सैन्य कारवाई की तैयारी कर रही हैं किंतु इस बीच केंद्र सरकार ने पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए जो कदम उठाये उनका असर दिखाई देने लगा है। पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश प्रसारित होते ही अवैध रूप से रह रहे हजारों पाकिस्तानियों के चेहरे सामने आ गए। पाकिस्तान के साथ व्यापार संबंध खत्म करने से भी वह परेशानी में आ गया है। लेकिन सबसे बड़ा झटका उसे लगा सिंधु नदी जल संधि निलंबित होने से। बीच में खबर आई थी कि भारत द्वारा अतिरिक्त जल छोड़े जाने से पाकिस्तान में बाढ़ आ गई । हालांकि उस खबर की पुष्टि सरकार ने नहीं की किंतु गत दिवस आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया गया कि झेलम नदी पर बने बांध से पाकिस्तान जाने वाला पानी रोक दिया गया है और चिनाब के बाँध से भी संभवतः आज से पानी छोड़ना बंद हो जायेगा। इसके साथ ही भारतीय सीमा से सटे पाकिस्तान के सियालकोट इलाके में झेलम के जलस्तर में 6 फीट की कमी होने की जानकारी आ गई। चिनाब का जल रोके जाने से भी पाकिस्तान में भरी गर्मी जल संकट होना सुनिश्चित है। जो वर्ग अब तक सिंधु नदी जल संधि के निलंबन को शिगूफेबाजी बताते हुए 24 घंटे प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करने पर आमादा था उसे उक्त खबरें अच्छी नहीं लग रही होंगी किंतु आवेश में आकर सैन्य कारवाई कर देना आत्मघाती हो सकता है। और उसके पहले कूटनीतिक मोर्चे पर भी अनुकूलता बनानी जरूरी है। जो संकेत मिल रहे हैं उनके अनुसार दुनिया के अनेक बड़े देश भारत के प्रति समर्थन और सहानुभूति प्रदर्शित कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि तुर्किये को छोड़ अन्य किसी भी मुस्लिम देश ने पाकिस्तान की तरफदारी नहीं की जिसे भारत की बड़ी कामयाबी कहा जा सकता है। इन्हीं सबसे उत्साहित होकर ही केंद्र सरकार सावधानी पूर्वक आगे बढ़ रही है। दुश्मन की ताकत और तैयारी का सटीक आकलन करने के उपरांत ही सैन्य कार्रवाई करना सही होगा। उसके पहले अन्य जो कदम उठाये गए उनके प्रभाव की जानकारी भी लेना जरूरी है। गत दिवस झेलम और चिनाब नदी का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने का फैसला निश्चित रूप से बड़ा कदम है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो भारत द्वारा नदियों का पानी रोके जाने के फैसले को युद्ध जैसा कार्य (Act of War) कहे जाने के साथ ही धमकी दी गई थी कि सिंधु हमारी है उसमें हमारा बहेगा या उनका ( भारत ) खून । भारत के साथ एक हजार साल तक लड़ने की डींग हाँकने वाले बिलावल के मरहूम पिता ज़ुल्फिकार अली भुट्टो ने अपनी एक पुस्तक की प्रारंभिक पंक्तियों में लिखा था कि बहादुरी का सबसे बेहतर तरीका होशियारी है। बिलावल को अब तक तो समझ में आ गया होगा कि भारत होशियारी के साथ आगे बढ़ रहा है। झेलम और चिनाब का पानी रोकना उसी की बानगी है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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