Friday, 2 May 2025

वैध तरीकों से हुई घुसपैठ सामने आने लगी


बात से बात किस तरह निकलती है ये पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने के फरमान के बाद देखा जा सकता है ।  केंद्र सरकार ने 48 घंटों के भीतर उन पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने कहा जो किसी कारण से यहाँ आये हुए थे। गत दिवस इस अवधि को अगली सूचना तक बढ़ा दिया गया। पहलगाम में आतंकवादी हमले के  बाद  की गई  कारवाई से चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं । ऐसी हजारों महिलाएं हैं जिनका विवाह पाकिस्तानी नागरिक से होने के बाद वे वहाँ की नागरिक बन गईं। उनके बच्चे पाकिस्तान में पैदा हुए। बाद में  तलाक़ या अन्य किसी कारण से वह बच्चों सहित लौट आई । भारतीय मूल की होने से वह तो यहाँ रहने की पात्र हो सकती है किंतु उसके बच्चे नहीं।हजारों मामले सामने आने से  साबित हो चुका है कि भारत में पाकिस्तानियों की घुसपैठ वैध तरीकों से भी होती रही। बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं भी हैं जिनके पति पाकिस्तान में ही रहते किंतु वे यहाँ डेरा जमाये बैठी हैं। जम्मू कश्मीर में कुछ ऐसे लोग भी पकड़ में आये हैं जो पाकिस्तानी नागरिक के तौर पर आये किंतु अब्दुल्ला और मुफ्ती की सरकारों के  राज में बिना नागरिकता लिए मतदाता बन गए। बांग्ला देशी घुसपैठियों के अलावा रोहिंग्या  समुदाय को देश से निकालने की जब - जब मांग उठी तब - तब  तुष्टीकरण में लगा तबका मानवता का ढोल पीटने लगता था। लेकिन अब ये तथ्य सामने आया कि वैध तरीकों से भी घुसपैठ होती रही है। पाकिस्तान में शादी करने वाले पुरुष या महिला को यहाँ आने - जाने और लंबे समय तक रहने की जो सुविधा मिली उसके कारण आंतरिक सुरक्षा को जो खतरा हुआ वह सामने आ रहा है। पाकिस्तान में ब्याही लड़कियों के पति और वहाँ से आईं बहुओं के  शत्रु देश के जासूस होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। सबसे अधिक हैरान करने वाली बात ये है कि अनेक शादियां ऐसी सामने आ रही हैं जिनमें बीवी अथवा शौहर ने अपना देश नहीं छोड़ा। ऐसे में बच्चे जहाँ पैदा हुए वहीं के नागरिक माने जाते हैं। भारत सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद ये समस्या सामने आ रही है कि जिन भारतीय और पाकिस्तानियों ने शादी के बाद भी नागरिकता नहीं बदली उनका क्या होगा? कुल मिलाकर बात यहाँ फंसती है कि पाकिस्तान में इस तरह रह रहे भारतीय बेहद कम हैं जबकि भारत में आकर जमे पाकिस्तानी कल्पना से भी ज्यादा। ये स्थिति देश में अवैध घुसपैठ को लेकर व्यक्त की जाने वाली चिंताओं को और बढ़ाने वाली है। वोट बैंक के लालची राजनेताओं ने बांग्लादेश और म्यांमार से आये घुसपैठियों को फर्जी तरीके से मतदाता होने का अधिकार दिलवा दिया जिससे वे शासकीय सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। इनके द्वारा अवैध कब्जे कर अपनी बस्ती बसा ली गई जिसमें बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं वोट बैंक के सौदागरों ने उपलब्ध करवा दीं। पाकिस्तान, बांग्ला देश और म्यांमार में जो बदहाली है उसके कारण ये घुसपैठिये वापस जाने को राजी नहीं है और भारत पर बोझ बन गये हैं। यहाँ तक भी गनीमत है किंतु इनकी निष्ठा भारत के प्रति नहीं होना हमारी सुरक्षा के लिए स्थायी खतरा बन गया है। देश के किसी भी हिस्से में घटित आतंकवादी घटना के तार पाकिस्तान या बांग्ला देश से जुड़े पाए जाते हैं। जिनमें  घुसपैठियों का हाथ होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन जिस बड़ी संख्या में वैध दस्तावेजों के साथ रह रहे  पाकिस्तानी नागरिकों की जानकारी आई वह  व्यवस्था में व्याप्त खामियों और भ्रष्टाचार का प्रमाण है। पाकिस्तानी नागरिक यहाँ आने के बाद लंबे समय तक न लौटे तब ये पुलिस और  प्रशासन का काम है कि उसकी पतासाजी करे। लेकिन ये बात भी सही है कि ऐसे लोगों को आश्रय देने के लिए मुस्लिम समुदाय पर भी स्वाभाविक रूप से उंगलियाँ उठती हैं। कश्मीर घाटी से आ रही जानकारियों से ये बात निकलकर आ रही है कि पहलगाम हत्याकांड के आतंकवादियों को स्थानीय लोगों ने सहायता की जिनमें कुछ तो घटनास्थल पर ही थे। घटना के बाद आतंकवादी भाग गए और अभी तक पकड़े नहीं गए क्योंकि उन्हें घाटी में ही किसी न किसी ने पनाह दे रखी होगी। आजकल कश्मीरियों की मानवीय भावनाओं का खूब बखान हो रहा है परंतु हत्याकांड के चश्मदीद  लोग घटना के बाद से गायब हैं। पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश प्रसारित होते ही उनके प्रति हमदर्दी व्यक्त करने वाले  सामने आने लगे। लेकिन ऐसे लोग तब नजर नहीं आते जब इनके जरिये देश में अशांति फैलाने का काम होता है। ये बात सुनने में तो अच्छी लगती है कि दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत होने से जनता के स्तर पर रिश्ते मधुर हो सकते हैं किंतु गीतकार जावेद अख्तर का ये कहना सही है कि इकतरफा मोहब्बत कब तक चलेगी ? पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध  को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में स्व. लता मंगेशकर का एक भी कार्यक्रम नहीं हुआ जबकि पाकिस्तानी कलाकार यहाँ आते रहते हैं। इस तरह के और भी मुद्दे हैं जिनको देखते हुए पाकिस्तानी नागरिकों को जितनी जल्दी हो सके निकाल बाहर करना जरूरी है। इस बारे में स्थानीय प्रशासन को भी सजग होकर उनकी तलाश कर उन्हें खदेड़ना होगा जो  आये तो वैध तरीके से थे किंतु फिर अवैध रूप से यहीं डटे हुए हैं। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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