केरल के विझिंजम में डीप-सी बंदरगाह के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर वामपंथी मुख्यमंत्री पी. विजयन, कांग्रेस के स्थानीय सांसद शशि थरूर और बंदरगाह निर्माण करने वाले उद्योगपति गौतम अडानी की उपस्थिति को नये बदलाव का संकेत बताते हुए कटाक्ष किया कि संदेश जहाँ पहुंचना था , पहुँच गया। यद्यपि कांग्रेस उनकी इस टिप्पणी से भन्नाई हुई है किंतु प्रधानमंत्री ने जो कहा उसके निहितार्थ काफी गहरे हैं। मसलन वामपंथी मुख्यमंत्री का उनके साथ होना, और केरल सरकार की विरोधी कांग्रेस के सांसद की उपस्थिति और कांग्रेस तथा वामपंथियों की आँख की किरकिरी बने उद्योगपति गौतम अडानी का सबके साथ बैठना। श्री मोदी ने बंदरगाह की तारीफ करते हुए उसे देश की आर्थिक प्रगति में सहायक बताया जो अपेक्षित था किंतु श्री अडानी की जो तारीफ की श्री थरूर को भी असहज कर दिया होगा। दरअसल इस बंदरगाह में केरल के साथ केंद्र सरकार और श्री अडानी तीनों हिस्सेदार हैं। जब इसका टेंडर निकला तब अकेले अडानी समूह ने बोली लगाई। इस परियोजना के कारण समुद्री व्यापार में केरल विश्व के नक्शे पर आ गया। गहरे समुद्र में बना यह बंदरगाह बड़े जल पोतों के लिए उपयुक्त है। इसका निर्माण भारतीय कंपनी द्वारा होने से देश का धन बाहर जाने से रुक गया जिसका उल्लेख श्री मोदी ने किया। इसके लिए प्रयास 1991 से चले आ रहे थे। लेकिन सुरक्षा संबंधी चिंताएं, बोली संबंधी कानूनी विवाद और निवेशकों की कम रुचि जैसी बाधाएं आती रहीं। अंततः केरल सरकार ने अगस्त 2015 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड (एपीएसईजेड) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें अदाणी को बंदरगाह के निर्माण, संचालन और हस्तांतरण के लिए 40 साल की रियायत दी, जिसमें 20 साल के विस्तार का प्रावधान था। इसके बनने से सभी दक्षिणी राज्यों को जबरदस्त लाभ होगा। लेकिन वामपंथी राज्य सरकार द्वारा अडानी समूह को इतने बड़े बंदरगाह के निर्माण और संचालन का अधिकार 60 वर्ष के लिए देना प्रमाणित करता है कि इस समूह का जो विरोध कांग्रेस करती आई है वह खोखला है। वरना श्री थरूर दिल्ली से भागे - भागे जाकर प्रधानमंत्री की अगवानी नहीं करते और न ही उस मंच दिखते जिस पर वह उद्योगपति मौजूद हो जिस पर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी आये - दिन हमले किया करते हैं। प्रधानमंत्री ने केरल के मुख्यमंत्री को इंडिया गठबंधन का बड़ा नेता बताकर असल में श्री गाँधी पर ही निशाना साधा। साथ ही स्थानीय सांसद के तौर पर ही सही श्री थरूर की उपस्थिति को भी उससे जोड़ा। उल्लेखनीय है कि श्री गाँधी हमेशा आरोप लगाते हैं कि प्रधानमंत्री , अडानी समूह पर मेहरबान हैं और देश के हवाई अड्डे और बंदरगाह जैसे बड़े उपक्रम उनको सौंपकर देश का नुकसान कर रहे हैं। हालांकि इंडिया गठबंधन में ममता बैनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे सहित कुछ अन्य छत्रप उनका साथ नहीं देते किंतु राहुल लगभग रोज ही अडानी विरोध की माला जपते हैं। दूसरी ओर राजस्थान और छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकारों ने अडानी समूह को बिजली और खनन क्षेत्र में बड़े - बड़े काम देकर श्री गाँधी के विरोध को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जिससे कांग्रेस की काफी किरकिरी भी हुई। अब केरल की वामपंथी सरकार ने भी केंद्र के साथ मिलकर जब अडानी समूह को यह परियोजना सौंप दी तब सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या श्री गाँधी प. बंगाल में वामपंथियों के साथ चला आ रहा गठजोड़ तोड़ेंगे और इंडिया गठबंधन से भी वामपंथियों को निकाल बाहर करेंगे ? बीते समय अमेरिका की कतिपय एजेंसियों द्वारा जब अडानी समूह के बारे में कुछ खुलासे किये तब राहुल सहित अन्य विपक्षी दलों द्वारा संसद नहीं चलने दी और संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की जिद कर डाली।केरल के बंदरगाह का काम अडानी समूह को देकर वहाँ की वामपंथी सरकार ने श्री गाँधी को भी आईना दिखा दिया जो इसी राज्य की वायनाड सीट से दो चुनाव जीते और वर्तमान में उनकी बहिन वहाँ से सांसद हैं। अगले साल केरल में विधानसभा चुनाव होंगे। इंडिया गठबंधन में होने के बाद भी यहाँ कांग्रेस और वामपंथी एक दूसरे के विरुद्ध ताल ठोंकते नजर आयेंगे। देखने वाली बात ये रहेगी कि अडानी समूह को उपकृत करने का जो आरोप श्री गाँधी प्रधानमंत्री पर लगाया करते हैं क्या वही अब केरल की वामपंथी सरकार पर भी लगाएंगे जिसने विझिंजम में डीप-सी बंदरगाह 60 वर्षों के लिए अडानी समूह को सौंप दिया और उस जलसे में कांग्रेस सांसद श्री थरूर न सिर्फ मौजूद थे बल्कि श्री मोदी के स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर भी नजर आये।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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